वैश्विक वित्तीय संकट का असर धीरे-धीरे देसी कंपनियों पर भी दिखने लगा है। आईटी आउटसोर्सिंग सेवा प्रदात्ता कंपनी एमफेसिस आगामी नियुक्तियों पर कैंची चलाने की तैयारी में है।
कंपनी ने इस वित्त वर्ष की शुरुआत में जितने कर्मचारियों की भर्ती की योजना बनाई थी, अब उसे 50 फीसदी तक कम कर दिया गया है।
कंपनी ने बताया कि पहले उसने घोषणा की थी कि करीब 8,000 पेशेवरों को नियुक्त किया जाएगा पर अब इस साल केवल 4,000 लोगों को ही भर्ती किया जाएगा।
हालांकि कम कर्मचारियों को नियुक्त करने के पीछे कंपनी के सीईओ जय कुमार कुछ अलग ही तर्क देते हैं। उनका कहना है कि कंपनी के मौजूदा कर्मचारियों से ही अधिकांश काम पूरा किया जा रहा है, ऐसे में नए कर्मचारियों की जगह ही नहीं बन रही।
कुमार कहते हैं, ‘हम सभी जानते हैं कि उद्योग जगत में नए कर्मचारियों को भर्ती करने की रफ्तार कम हुई है। हम उत्पादकता बढ़ाने पर और परिचालन में सुधार लाने पर ध्यान दे रहे हैं, नए कर्मचारियों की भर्ती पर नहीं।
पिछले 8 महीनों में कंपनी ने मौजूदा कर्मचारियों की उपयोगिता को 10 फीसदी तक बढ़ाया है।’ उन्होंने बताया कि यही वजह है कि इस साल कम भर्तियां करने की योजना है।
एमफेसिस का बैंकिंग, वित्तीय और बीमा क्षेत्र पर खासा दबदबा है और कंपनी के कुल राजस्व का 40 फीसदी हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। दुनिया के पांच प्रमुख ब्रोकरेज इकाइयों में से दो एमफेसिस की क्लाइंट हैं।
वहीं वित्त सेवा क्षेत्र में एआईजी भी कंपनी के ग्राहकों में से एक है जिसे हाल ही में अमेरिकी सरकार ने वित्तीय सहायता मुहैया कराई है। इन सबके बाद भी कुमार कहते हैं कि वैश्विक वित्त संकट का कोई तत्काल प्रभाव उनकी कंपनी पर नहीं पड़ेगा।
हालांकि उन्होंने माना कि कुछ समय के बाद इस संकट का गंभीर प्रभाव देखने को मिल सकता है। अब चूंकि आउटसोर्सिंग की मांग में कमी आई है और आपूर्तिकर्तों की संख्या पहले जितनी ही है, तो पूरी संभावना है कि क्लाइंट्स कंपनियों को भुगतान में कटौती करेंगे।
कुमार ने कहा, ‘पिछली कुछ तिमाहियों में हमनें देखा है कि क्लाइंट्स की ओर से परियोजनाओं की संख्याएं तो नहीं घटाई गई हैं पर हो सकता है कि वे ऐसा कोई फैसला करने में थोड़ा समय लगाएं।
पिछले सात दिनों में जो कुछ हुआ, उसे देखते हुए लगता है कि ऐसा कोई फैसला आने में कुछ और वक्त लगे।’ बीएफएसआई सेक्टर में मंदी को देखते हुए एमफेसिस अब दूरसंचार, उत्पादन और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दे रही हैं।