दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) की वित्तीय स्थिति को लेकर लोकसभा में नई जानकारी पेश की गई है। सरकार ने बताया कि DDA पर लगभग 17,000 करोड़ रुपये की देनदारी है और उसके पास 34,000 से ज्यादा फ्लैट अब भी बिना बिके पड़े हैं। यह जानकारी केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री टोखन साहू ने लिखित जवाब में दी। उन्होंने कहा कि DDA अपनी देनदारियां समय पर चुका रहा है और किसी तरह की कुप्रबंधन या प्रशासनिक गलती का सबूत नहीं मिला है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च तक DDA की कुल देनदारी ₹16,987.98 करोड़ थी। नरेला में DDA ने कुल 62,801 फ्लैट बनाए, जिनमें से 31,314 फ्लैट अलॉट हो चुके हैं, जबकि 31,487 फ्लैट अब भी बिना बिके पड़े हैं। पूरी दिल्ली में DDA की अनसोल्ड इन्वेंट्री की संख्या 34,052 है। इतनी बड़ी संख्या में फ्लैटों का बिना बिके रहना इस बात का संकेत है कि दिल्ली में, खासकर नरेला जैसे नए विकसित इलाकों में, घर खरीदने वालों के लिए अभी भी काफी विकल्प उपलब्ध हैं।
DDA बिक्री बढ़ाने और खरीदारों को अधिक विकल्प देने के लिए इस वित्त वर्ष में और भी नए आवास प्रोजेक्ट लॉन्च करने जा रहा है। करकरडूमा में DDA Towering Heights Housing Scheme 2025 के तहत 1,026 MIG यानी दो बेडरूम वाले फ्लैट उपलब्ध कराए जाएंगे। नरेला में भी 3,666 नए फ्लैट लॉन्च होने की उम्मीद है, जिनमें HIG, MIG और EWS जैसी विभिन्न कैटेगरी के घर शामिल होंगे।
DDA के पास बड़ी संख्या में अनसोल्ड फ्लैट होने का फायदा सीधे खरीदारों को मिल सकता है। इससे अलॉटमेंट पाने की संभावनाएं बढ़ेंगी और DDA को बिक्री बढ़ाने के लिए कीमतों को आकर्षक रखना पड़ सकता है। खरीदारों को साइज, बजट और लोकेशन के हिसाब से अधिक विकल्प भी मिलेंगे। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खरीदारों को विशेष रूप से नरेला जैसे तेजी से विकसित हो रहे इलाकों की कनेक्टिविटी, आसपास की सुविधाएं और भविष्य की रहने लायक स्थिति को ध्यान से जांचना चाहिए।