रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के संस्थागत शेयरधारकों का मानना है कि कंपनी जल्द ही कई बड़ी घोषणाएं करने वाली है। इसी क्रम में आरआईएल अपनी दूरसंचार और खुदरा सहायक कंपनियों को सूचीबद्ध कराने की समय-सीमा की भी घोषणा कर सकती है। उनका मानना है कि इससे कंपनी के मूल्यांकन का खुलासा होगा।
केंद्र सरकार द्वारा रिफाइनरों और तेल उत्पादकों पर विंडफॉल टैक्स (अप्रत्याशित लाभ कर) लगाए जाने के कारण शुक्रवार को कंपनी के बाजार पूंजीकरण में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई थी।
एक सरकारी बीमा कंपनी के अधिकारी ने कहा, ‘हम उमीद करते हैं कि शेयरधारकों की अगली वार्षिक आम बैठक में जियो प्लेटफॉर्म्स और रिटेल कारोबार को सूचीबद्ध कराने के लिए स्पष्ट समय-सीमा के बारे में घोषणा की जाएगी।’ उन्होंने कहा, ‘इससे शेयरधारकों को काफी आश्वासन मिलेगा।’
विश्लेषकों के अनुसार, अप्रत्याशित लाभ कर के कारण आरआईएल के तेल से रसायन कारोबार की आय प्रभावित होगी क्योंकि इसे 1 जुलाई से विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में भी लागू किया गया है।
मॉर्गन स्टैनली और जेफरीज के विश्लेषकों ने कहा कि अप्रत्याशित लाभ कर के कारण रिलायंस इंडस्ट्रीज का सकल रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) पर 6 से 8 डॉलर प्रति बैरल का नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इसे (अप्रत्याशित लाभ कर) के खत्म होने के लिए किसी तिथि का उल्लेख नहीं किया गया है। उनका मानना है कि यह एक अस्थायी उपाय है और रिफाइनिंग क्षेत्र के मुनाफे में आई मौजूदा तेजी के मद्देजर यह पहल की गई है।
रिलायंस के रिफाइनिंग कारोबार में पेट्रोल और डीजल का प्रमुख योगदान है और कुल रिफाइनिंग उसका योगदान 72 फीसदी है।
जेफरीज ने शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा है, ‘हमारा मानना है कि किसी भी छूट को छोड़कर आरआईएल के मार्जिन पर 7 डॉलर प्रति बैरल का मिश्रित प्रभाव पड़ेगा। आरआईएल के 58 फीसदी रिफाइंड उत्पादों का निर्यात किया जाता है और 3.4 रुपये प्रति बैरल के अनुमानित मिश्रित प्रभाव के साथ रिलायंस के जीआरएम पर 7 डॉलर प्रति बैरल का प्रभाव दिख सकता है।’
सरकार ने डीजल के निर्यात पर 13 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल के निर्यात पर 6 रुपये प्रति लीटर अप्रत्याशित लाभ कर लगाया है।
आरआईएल का शेयर शुक्रवार को इस घोषणा पर प्रतिक्रिया दर्ज करते हुए 7 फीसदी लुढ़क गया। इस प्रकार कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण शुक्रवार को 1.25 लाख करोड़ रुपये घटकर 16.29 लाख करोड़ रुपये रह गया। इसमें प्रवर्तकों की शुद्ध हैसियत को करीब 61,497 करोड़ रुपये का झटका लगा।
अप्रत्यशित लाभ कर के अलावा सरकार ने घरेलू बाजार के लिए ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई अन्य उपायों की भी घोषणा की है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि कई राज्यों में पेट्रोल पंपों पर डीजल और पेट्रोल की किल्लत होने की बात सामने आई थी।
नए दिशानिर्देश के तहत सरकार ने आधे रिफाइंड उत्पादों की बिक्री देश के भीतर करना अनिवार्य कर दिया है। हालांकि यह आरआईएल की एसईजेड रिफाइनरी पर लागू नहीं होती है जिसकी क्षमता 3.5 करोड़ टन सालाना है।
आरआईएल फिलहाल अपने पेट्रोकेमिकल, बी2बी और पेट्रोल पंपों के जरिये 40 से 50 फीसदी उत्पादों की बिक्री घरेलू बाजार में करती है। बहरहाल, वित्त वर्ष 2022 में भारत ने 42 फीसदी डीजल और 44 फीसदी पेट्रोल उत्पादन का निर्यात किया।
आरआईएल ने अप्रत्याशित कर लाभ पर टिप्पणी नहीं की।