कोरोनावायरस के प्रसार और उसे रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन से आए व्यवधान के कारण जीवन बीमा उद्योग को 40 लाख पॉलिसी और 45,000 करोड़ रुपये प्रीमियम गंवाना पड़ा है।
मर्चेंट चैंबर आफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में कोविड के बाद की चुनौतियों व अवसर पर बोलते हुए भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के प्रबंध निदेशक राज कुमार ने कहा, ‘कुल मिलाकर जीवन बीमा उद्योग ने 40 लाख पॉलिसियां गंवाई है और नए कारोबार से आने वाले 15,000 करोड़ रुपये प्रीमियम का नुकसान हुआ है। लॉकडाउन होने के बाद से लोगों ने अपनी जरूरतों के लिए पैसे बचाने शुरू कर दिए। ऐसे में इस उद्योग में पॉलिसी के नवीकरण के करीब 30,000 करोड़ रुपये नहीं आए।’
परंपरागत रूप से मार्च महीने का दूसरा पखवाड़ा बीमा कारोबार के हिसाब से बहुत बेहतरीन माना जाता है और पूरे कारोबार का करीब 15 से 18 प्रतिशत प्रीमियम इस दौरान आता है। जीवन बीमा उद्योग के प्रीमियम में मार्च से लगातार 4 महीने तक कमी आई है। लेकिन उद्योग को लगता है कि जुलाई से स्थिति पटरी पर आ जाएगी और इसके साथ ही लोगों की बीमा में दिलचस्पी भी बढ़ेगी।
कुमार ने वेबिनॉर में कहा, ’31 अगस्त तक एलआईसी की प्रीमियम से आमदनी पहले के साल के स्तर पर आ गई। ऐसे में हमने अप्रैल और मई के अंतर की भरपाई कर ली है, जब प्रीमियम 32 प्रतिशत नीचे चला गया था।’
एलआईसी के नवीकरण का प्रीमियम भी बढ़ा है। 12 सितंबर तक एलआईसी ने प्रीमियम के नवीकरण से 87,327 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जबकि पिछले साल 77,176 करोड़ रुपये आए थे। नवीकरण प्रीमियम जहां 13 प्रतिशत बढ़ा है, वहीं सिकी संख्या में सिर्फ 0.4 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब है कि बड़े आकार के बीमा का नवीकरण ही आ रहा है।
एलआईसी के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) पर कुमार ने कहा, ‘दीपम ने दो लेन देन विश्लेषकोंं की नियुक्ति की है। अब वे सॉफ्टवेयर की खरीद में लगे हैं। हमने अपनी संपत्ति का मूल्यांकन पहले ही शुरू कर दिया है। यह हर तीन साल पर होता है। लेकिन इरडा के नियमों के मुताबिक वाणिज्यिक संपत्तियों का मूल्यांकन किया जाएगा।’