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देश में मल्टीप्लेक्स कारोबार का संकट

Last Updated- December 12, 2022 | 2:26 AM IST

पीवीआर सिनेमाज ने मार्च 2020 में खत्म हुए साल में 10.1 करोड़ से अधिक टिकट बेचे थे और 3,500 करोड़ रुपये से अधिक कमाई की तथा परिचालन मुनाफा 600 करोड़ रुपये से अधिक रहा। इससे पहले का साल यानी 2019 भारतीय सिनेमा के लिए बेहतरीन वर्षों में से एक रहा और देश की सबसे बड़ी फिल्म रिटेल कंपनी की बैलेंसशीट पर इसका असर भी दिखा।
 इसके ठीक एक साल बाद कंपनी की कमाई कम होकर 310 करोड़ रुपये तक रह गई जो मार्च 2020 के मुनाफे का 10 फीसदी से भी कम है। उसकी 842 स्क्रीन बंद हो गईं। समूह के लगभग 15,000 कर्मचारियों में से 6,000 से अधिक कर्मचारियों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। पीवीआर ने इन 18 महीनों में ऋण और इक्विटी के तौर पर 1,800 करोड़ रुपये जुटाए हैं जिससे कंपनी के प्रवर्तक परिवार की हिस्सेदारी 18.5 प्रतिशत से घटकर लगभग 17 फीसदी रह गई। इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि कंपनी की किसी अन्य मल्टीप्लेक्स चेन के साथ विलय या किसी तरह अन्य तरह के करार की चर्चा शुरू हो चुकी है।
पीवीआर सिनेमाज के अध्यक्ष अजय बिजली कहते हैं, ‘ये 18 महीने का वक्त हमारे लिए काफी मुश्किल भरा दौर रहा है। हमें पहले अपनी 842 स्क्रीन का प्रबंधन करता था। हमने इतने पैसे जुटाए ताकि हम अपनी किस्त चुकाने के साथ ही लोगों को वेतन दे सकें। अब सभी पूंजीगत खर्च टाल दिए गए हैं।’ देश की सबसे बड़ी सिनेमा कंपनी कारोबार पर महामारी की पड़ी मार का ब्योरा कुछ इस तरह बयां करती है।
देश में फिल्मों का कारोबार साल 2019 में 19,100 करोड़ रुपये तक था जो 2020 में घटकर 7,200 करोड़ रुपये हो गया। बॉक्स ऑफिस की कमाई का 62 फीसदी से अधिक हिस्सा खत्म हो गया। 1,500 से अधिक सिनेमा स्क्रीन (अधिकांशत: सिंगल स्क्रीन) बंद हो गए और फिक्की-ईवाई के आंकड़ों के मुताबिक देश में स्क्रीन की तादाद 9,500 से 8,000 स्क्रीन रह गई। विश्लेषकों और कंपनियों के मुख्य कार्याधिकारियों (सीईओ) का कहना है कि सिंगल स्क्रीन और छोटी सिनेमा चेन सस्ती भी हो रही हैं लेकिन इसके बावजूद निवेश में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।
भारत कोरोनावायरस की एक भयावह दूसरी लहर के बाद सामान्य स्थिति बहाल करने की पूरी मशक्कत कर रहा है लेकिन अब सवाल यह है कि ऐसे दौर में मल्टीप्लेक्स का भविष्य क्या होगा? क्या इनमें से कई बंद हो जाएंगे या प्रतिस्पद्र्धी कंपनियों के हाथों कम कीमतों पर बिक जाएंगे? आईनॉक्स लीजर के सीईओ आलोक टंडन का कहना है, ‘फि ल्म कारोबार कहीं खत्म नहीं होने जा रहा है। सिनेमा के 100 साल के इतिहास में यह एक बड़ा व्यवधान है लेकिन बेहतर आंकड़े इस बात को साबित कर देंगे।’
बिजली कहते हैं, ‘लंबी अवधि में फिल्म देखने में दिलचस्पी बनी रहेगी क्योंकि कमाई का एक बड़ा हिस्सा सिनेमा के रिलीज होने से आता है।’ उन्होंने कहा, ‘सूर्यवंशी, ’83’ जैसी कई फि ल्में रिलीज होने के इंतजार में हैं। ‘ब्लैक विडो’ (जून 2021 में रिलीज हुई) और ‘फास्ट ऐंड फ्यूरियस’ (मई 2021 में रिलीज हुई) को देखिए।’ अमेरिका और ब्रिटेन में लॉकडाउन खुलने के बाद वैश्विक स्तर पर रिलीज हुई पहली कुछ फि ल्मों में ‘फास्ट ऐंड फ्यूरियस’ शामिल है जिसने बॉक्स ऑफिस पर पहले ही 50 करोड़ डॉलर की कमाई कर ली है और कमाई के एक-तिहाई हिस्से में अमेरिका का योगदान है। कारोबार में सुधार के लिए तीन चीजें महत्त्वपूर्ण हैं। पहली, देश में सबको टीके लग जाएं, बड़े बजट और प्रोडक्शन वैल्यू वाली फिल्में हों साथ ही फिल्म निर्माता, दर्शकों की उन क्षमताओं पर खरा उतरें जिसने 18 महीने के दौरान ओटीटी मंचों पर विश्व स्तरीय शो और फिल्में देखी हैं।
भविष्य की तैयारी
ऑरमैक्स मीडिया के सीईओ शैलेश कपूर कहते हैं, ‘दक्षिण भारतीय भाषाओं और हिंदी की कुछ बड़ी फिल्में रिलीज के लिए तैयार हैं जिनमें ‘केजीएफ ‘, ‘आरआरआर’, ‘राधे श्याम’, ‘सूर्यवंशी’, ‘लाल सिंह चड्ढा’, ‘ब्रह्मास्त्र’ जैसी फिल्में हैं। पिछले एक साल में जो फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज हुईं उनमें ‘मास्टर’ ‘वकील साब’ और ‘जाठी रत्नालु’ को रिकॉर्ड ओपनिंग मिली।’
उद्योग के कारोबार में सुधार के लिए सबसे अहम बात यह होगी कि बड़े पर्दे के लिए फिल्में बनाई जाएं। कपूर कहते हैं, ‘टेंटपोल फिल्में ही सुधार की राह को आगे बढ़ाएंगी। लोगों ने अपना मन बना लिया है कि उन्हें प्रत्येक प्रारूप में क्या देखना है। बड़ी फिल्में सिनेमाघरों में अच्छा प्रदर्शन करेंगी और छोटी फिल्में ओटीटी पर चलेंगी। नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे अभिनेताओं की फिल्मों का कारोबार सिनेमाघरों में अच्छा नहीं होगा।’
उनका मानना है कि अगर शीर्ष 10 फिल्में उद्योग के बॉक्स ऑफिस कमाई का 80 फीसदी लाने में सक्षम होती थी तो अब वे 90 फीसदी कमाई में योगदान देंगी।
 इससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि कमाई की संरचना बदल सकती है। कपूर का मानना है कि दक्षिण भारतीय भाषाओं की हिस्सेदारी वर्तमान के 40-45 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत तक हो सकती है।
अब न केवल स्ट्रीमिंग के विभिन्न प्रारूपों का विकल्प लोगों के पास है बल्कि उनमें अंतरराष्ट्रीय शो और फिल्मों के लिए भी जिज्ञासा और दिलचस्पी बढ़ी है। कपूर कहते हैं कि कोविड की वजह से यह सबसे बड़ा बदलाव है कि लोगों की पहुंच दूसरी भाषाओं की फिल्मों तक भी हुई है।
उच्च गुणवत्ता वाली डबिंग और सबटाइटल की वजह से मलयालम फिल्मों को उत्तरी क्षेत्र में भी बाजार मिल रहा है जैसे कि दक्षिण में हिंदी और मराठी फिल्में चल रही हैं। कपूर कहते हैं, ‘ऑरमैक्स के शोध से पता चलता है कि आने वाली अखिल भारतीय स्तर की विभिन्न भाषाओं की फिल्में अगर अच्छी हों तो इनमें से करीब 7-8 फिल्में अकेले बॉक्स ऑफिस पर करीब 700-1000 करोड़ रुपये का कारोबार कर सकती हैं।’
 संपत कहते हैं, ‘रिलीज के लिए 40 फिल्में तैयार हैं। इनमें से लगभग सभी टेंटपोल फिल्में (बड़े प्रोडक्शन की फिल्में) हैं। अधिक बड़ी फिल्में कोई समस्या नहीं है। आईनॉक्स की 648 स्क्रीन हैं और इनमें पांच शो भी चलाये जाते हैं, वहीं दूसरे मल्टीप्लेक्स में यह तादाद भी ज्यादा है। इसमें सबसे बड़ी दिक्कत यह होगी कि इनमें से कौन सी फिल्म पहले देखनी है।’ यह कोई दुखी करने वाली समस्या नहीं है।

First Published - July 25, 2021 | 11:53 PM IST

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