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India-US Trade: ट्रंप का टैरिफ शॉक! 27% टैक्स के बाद किस भारतीय बिजनेस को मिलेगी पावर, कहां लगेगा झटका

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ट्रंप प्रशासन ने भारतीय आयात पर 27% टैरिफ लगा दिया है, लेकिन कुछ उद्योगों को राहत भी मिली है।

Last Updated- April 03, 2025 | 12:50 PM IST
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार सुबह (भारतीय समयानुसार) भारत से आने वाले सभी सामानों पर 27% का नया टैक्स (टैरिफ) लगाने की घोषणा की। इस फैसले से भारत के कई उद्योगों को नुकसान होगा, लेकिन कुछ सेक्टरों को इससे फायदा भी हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर भारत और अमेरिका के व्यापार संबंधों पर लंबे समय तक रह सकता है।

भारत क्या निर्यात और आयात करता है?

भारत अमेरिका को मुख्य रूप से दवाएं, टेलीकॉम उपकरण, रत्न और आभूषण, पेट्रोलियम उत्पाद, सोना और सूती वस्त्र बेचता है। अमेरिका भारत से इन सामानों की बड़ी मात्रा में खरीदारी करता है, जिससे भारतीय उद्योगों को अच्छी कमाई होती है। दूसरी ओर, भारत अमेरिका से कच्चा तेल, कोयला, पेट्रोलियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक मशीनरी और एयरोस्पेस से जुड़े उपकरण खरीदता है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संतुलन में हमेशा असमानता रही है, क्योंकि भारत अमेरिका को ज्यादा सामान बेचता है और वहां से कम सामान खरीदता है।

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किन उद्योगों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा?

इस नए टैक्स का सबसे ज्यादा असर भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और रत्न-आभूषण उद्योग पर पड़ेगा। अमेरिका हर साल भारत से लगभग 14 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स और 9 अरब डॉलर के गहने और रत्न खरीदता है। पहले इन सामानों पर अमेरिका में बहुत कम टैक्स था – इलेक्ट्रॉनिक सामान पर सिर्फ 0.41% और गहनों पर करीब 2.12% टैक्स था। लेकिन अब 27% टैक्स लगने से भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका में अपने उत्पाद बेचना महंगा हो जाएगा। इससे निर्यात में गिरावट आ सकती है और इन उद्योगों में काम करने वाले लाखों लोगों की नौकरियों पर भी असर पड़ सकता है।

हालांकि, ऑटो पार्ट्स और एल्यूमिनियम उद्योग को इस नए टैक्स से राहत मिली है, क्योंकि वे इस 27% टैक्स के दायरे में नहीं आए हैं। हालांकि, इन पर पहले से ही 25% का अलग टैक्स लागू है, जो इन उद्योगों के लिए पहले से ही मुश्किलें पैदा कर रहा है।

किन उत्पादों को राहत मिली है?

दवा और ऊर्जा उत्पादों को इस नए टैक्स से छूट मिली है। भारत अमेरिका को हर साल लगभग 9 अरब डॉलर के फार्मा और ऊर्जा से जुड़े उत्पाद बेचता है। हालांकि, ट्रंप पहले इन पर भी टैक्स लगाने की बात कह चुके हैं, इसलिए भविष्य में इन पर भी शुल्क बढ़ सकता है।

इसके अलावा, अमेरिका ने कुछ और उत्पादों को भी नए टैक्स से छूट दी है। इनमें तांबा, सेमीकंडक्टर, लकड़ी और दवाएं शामिल हैं। कीमती धातुएं जैसे सोना और चांदी भी इस नए टैक्स के दायरे में नहीं आए हैं। ऊर्जा और खनिजों से जुड़े कुछ उत्पाद, जो अमेरिका में उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें भी टैक्स से छूट दी गई है।

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क्या भारतीय वस्त्र उद्योग को फायदा होगा?

इस फैसले से भारतीय वस्त्र उद्योग को नुकसान होने की बजाय फायदा हो सकता है। अमेरिका ने वियतनाम, बांग्लादेश और चीन से आने वाले कपड़ों पर भारी टैक्स लगाया है। वियतनाम से आने वाले कपड़ों पर 46%, बांग्लादेश पर 37% और चीन पर 34% टैक्स लगाया गया है। इसके मुकाबले भारत को कम टैक्स देना पड़ रहा है, जिससे भारतीय टेक्सटाइल कंपनियों को फायदा मिल सकता है।

हालांकि, भारतीय टेक्सटाइल उद्योग का योगदान देश की जीडीपी में केवल 2% है, जबकि बांग्लादेश के लिए यह 11% और वियतनाम के लिए 15% है। इसलिए, भले ही इस फैसले से भारत को फायदा हो, लेकिन इसका देश की पूरी अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

भारत की स्थिति अन्य देशों की तुलना में कैसी है?

भारत सरकार इस नए टैक्स के असर का विश्लेषण कर रही है। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला भारत के लिए पूरी तरह नुकसानदायक नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव मिश्रित रहेगा। कुछ सेक्टर प्रभावित होंगे, लेकिन कुछ को फायदा भी मिल सकता है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के निदेशक अजय सहाई ने कहा कि भारत की स्थिति अन्य देशों की तुलना में बेहतर है। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने कई अन्य देशों पर इससे भी ज्यादा टैक्स लगाए हैं।

अन्य एशियाई देशों को इस फैसले से ज्यादा झटका लगा है। अमेरिका ने चीन पर 34%, जापान पर 24%, थाईलैंड पर 36%, मलेशिया पर 24%, ताइवान पर 32% और दक्षिण कोरिया पर 25% टैक्स लगाया है। वियतनाम को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, क्योंकि उसके उत्पादों पर 46% टैक्स लगाया गया है। इन देशों पर ज्यादा टैक्स लगने से भारतीय कंपनियों को अमेरिका में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका मिल सकता है।

अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर असर

अमेरिका का भारत के साथ 46 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापार को लेकर मतभेद रहे हैं। अमेरिका चाहता है कि भारत अपनी बाजार नीति में बदलाव करे और अमेरिकी कंपनियों को अधिक मौके दे। दूसरी ओर, भारत चाहता है कि अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगाए गए टैक्स में राहत दे। फिलहाल, दोनों देश एक व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, जिससे भविष्य में इन टैक्सों को कम किया जा सकता है। अगर यह समझौता होता है, तो भारतीय उद्योगों को राहत मिल सकती है और दोनों देशों के व्यापारिक संबंध मजबूत हो सकते हैं।

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First Published - April 3, 2025 | 12:41 PM IST

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