उद्योग

कच्चे माल के महंगे होने से वाहन और ऑटो पार्ट्स कंपनियों के मार्जिन पर बढ़ेगा दबाव

कच्चे माल, खासकर एल्युमीनियम, तांबे और कीमती धातुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से आने वाली तिमाहियों में वाहन और कलपुर्जा कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

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सोहिनी दास   
Last Updated- December 27, 2025 | 9:20 AM IST

देश में वाहन और कलपुर्जा विनिर्माताओं को आने वाली तिमाहियों के दौरान मार्जिन पर नए सिरे से दबाव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए कि प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में तेज वृद्धि स्टील, रबर और कच्चे तेल से जुड़े इनपुट की नरमी से मिलने वाली राहत खत्म कर देगी। विश्लेषकों और उद्योग के अधिकारियों ने यह अनुमान जताया है।

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का कहना है कि एल्युमीनियम, तांबे और प्लेटिनम समूह की धातुओं में हालिया तेजी वाहन क्षेत्र के मामले में लागत की प्रमुख बाधा के रूप में फिर से उभरी है। स्टील, कच्चे तेल से जुड़े प्लास्टिक और रबर की कीमतें नरम बनी हुई हैं। हालांकि स्टील और रबर की कीमतों में नरमी से आंशिक राहत मिली है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह मूल धातु और कीमती धातुओं में तेज वृद्धि की भरपाई के लिए अपर्याप्त है, खास तौर उन श्रेणियों के लिए जिनमें इन इनपुट का अधिक उपयोग होता है।

एल्युमीनियम और तांबे जैसी मूल धातुओं के दाम पिछले तीन महीने के दौरान 10 से 25 प्रतिशत बढ़ चुके हैं। इसका कारण आपूर्ति में कमी, व्यापार में रुकावट और ऊर्जा परिवर्तन से जुड़े क्षेत्रों की मजबूत मांग है। साथ ही प्लेटिनम समूह की धातुओं (पीजीएम) का उपयोग कैटेलिटिक कन्वर्टर में होता है और इनके दाम खदानों में कम निवेश और आपूर्ति की बाधाओं की वजह से 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुके हैं। यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब वाहन कंपनियां पहले से ही कमजोर मांग के माहौल से जूझ रही हैं और बढ़ी हुई लागत को उपभोक्ताओं पर डालने में असमर्थ हो रही हैं। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने दिसंबर की रिपोर्ट में कहा है, ‘कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी मार्जिन पर संभावित जोखिम है। पिछले कुछ हफ्तों में आपूर्ति में कमी, टैरिफ के झटके और सुरक्षित निवेश की मांग के कारण मूल धातुओं और पीजीएम में तेजी आई है।’

घरेलू ब्रोकरेज कंपनी के विश्लेषक ने कहा, ‘हालांकि स्टील और रबर की कीमतें नरम हुई हैं। लेकिन एल्युमीनियम, तांबे और कीमती धातुओं में तेज वृद्धि लागत की बड़ी बाधा के रूप में उभर रही है, खास तौर पर दोपहिया और यात्री वाहन विनिर्माताओं के लिए।’ उन्होंने कहा, ‘कुल मिलाकर, इनपुट की नरमी से मिलने वाली लागत की राहत कम पड़ रही है।’

ब्रोकरेज के अनुमानों के अनुसार अगर मौजूदा हाजिर कीमतें बरकरार रहती हैं, तो दोपहिया और यात्री वाहन विनिर्माताओं को मौजूदा स्तरों की तुलना में परिचालन मार्जिन में 65 से 75 आधार अंकों की कमी देखने को मिल सकती है। वाणिज्यिक वाहन विनिर्माताओं पर लगभग 30 आधार अंकों का थोड़ा कम प्रभाव पड़ सकता है, जबकि ट्रैक्टर विनिर्माताओं के काफी हद तक अप्रभावित रहने की उम्मीद है।

यह अंतर सामग्री की संरचना में अंतर की वजह से है। स्टील, रबर और प्लास्टिक की कीमतें कम हुई हैं। वाणिज्यिक वाहनों और ट्रैक्टर के कच्चे माल की लागत में इनका बड़ा हिस्सा होता है।

First Published : December 27, 2025 | 9:20 AM IST