facebookmetapixel
हाइपरसर्विस के असर से ओला इलेक्ट्रिक की मांग और बाजार हिस्सेदारी में तेजी, दिसंबर में 9,020 स्कूटरों का हुआ रजिस्ट्रेशनदिसंबर 2025 में इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में उछाल, TVS टॉप पर; बजाज–एथर के बीच मुकाबला तेजव्हीकल रजिस्ट्रेशन में नया रिकॉर्ड: 2025 में 2.8 करोड़ के पार बिक्री, EVs और SUV की दमदार रफ्तारEditorial: गिग कर्मियों की हड़ताल ने क्यों क्विक कॉमर्स के बिजनेस मॉडल पर खड़े किए बड़े सवालभारत का झींगा उद्योग ट्रंप शुल्क की चुनौती को बेअसर करने को तैयारभारत में राज्यों के बीच निवेश की खाई के पीछे सिर्फ गरीबी नहीं, इससे कहीं गहरे कारणमनरेगा की जगह आए ‘वीबी-जी राम जी’ पर सियासी घमासान, 2026 में भी जारी रहने के आसारबिना बिल के घर में कितना सोना रखना है कानूनी? शादी, विरासत और गिफ्ट में मिले गोल्ड पर टैक्स के नियम समझेंMotilal Oswal 2026 Stock Picks| Stocks to Buy in 2026| मोतीलाल ओसवाल टॉप पिक्सNew Year 2026: 1 जनवरी से लागू होंगे 10 नए नियम, आपकी जेब पर होगा असर

Gig worker bill: गिग कामगार विधेयक से नैसकॉम चिंतित

नैसकॉम ने कर्नाटक गिग कामगार विधेयक पर जताई गंभीर चिंता, परामर्श अवधि बढ़ाने की मांग

Last Updated- July 12, 2024 | 10:47 PM IST
Gig worker bill

आईटी कंपनियों के प्रतिनिधि संगठन नैसकॉम ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को पत्र लिखकर कर्नाटक के गिग कामगार (सामाजिक सुरक्षा और कल्याण) विधेयक, 2024 पर कई तरह की गंभीर चिंता जताई है। यह पत्र 9 जुलाई को लिखा गया।

मसौदे में कैब ड्राइवरों और डिलिवरी पर्सन जैसे गिग कामगारों के लिए शिकायत निवारण तंत्र बनाने और उनके लिए औपचारिक अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा की योजना है है।

इसमें कामगारों को मनमाने तरीके से काम से हटाने और उनके लिए बुनियादी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है। इस विधेयक को विधान सभा के मॉनसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में नैसकॉम ने कहा कि सार्थक विचार-विमर्श के लिए सार्वजनिक परामर्श अवधि को 10 कार्यदिवसों से कम से कम 45 कार्यदिवस तक तक बढ़ाना चाहिए।

परामर्श के हिस्से के तौर पर नैसकॉम ने सरकार से एक अंतरविभागीय बैठक (श्रम विभाग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और वाणिज्य एवं उद्योग विभाग) बनाने का भी आग्रह किया है। ऐसी बैठक में कर्नाटक के सक्रिय प्लेटफॉर्म कारोबारों, उद्योग संगठनों और अन्य संबंधित हितधारकों को बुलाने का सुझाव दिया गया है।

पत्र में कहा गया है कि विधेयक में केंद्रीय कानून- सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 (सीओएसएस) की नकल करते हुए प्लेटफॉर्मों के गिग कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा कानून के ढांचे का प्रस्ताव किया गया है। इसमें ऐसी कोई निर्णायक धारा का प्रस्ताव नहीं है जो विधेयक को केंद्रीय कानून में शामिल कर देगा।

पत्र में कहा गया है, ‘गिग कामगार कर्मचारी नहीं बल्कि स्वतंत्र ठेकेदार के तौर पर होते हैं क्योंकि उनके साथ नियंत्रण, प्रतिबद्धता और जवाबदेही जैसे तत्व नहीं होते। मगर विधेयक में इन बातों का ध्यान नहीं रखा गया और इसके बजाय एक धारणा बना ली गई कि गिग कामगार भी कर्मचारी की तरह हैं।’

नैसकॉम ने कहा है कि यह विधेयक एग्रीगेटरों पर टर्मिनेशन के लिए न्यूनतम नोटिस अवधि, एल्गोरिदम संबंधी खुलासे, निगरानी एवं ट्रैकिंग व्यवस्था को सख्त बनाते हुए उन पर जिम्मेदारी का बोझ डालता है।

First Published - July 12, 2024 | 10:46 PM IST

संबंधित पोस्ट