उद्योग

इंडिगो संकट ने हिलाया विमानन क्षेत्र, भारत के विमानन क्षेत्र में बढ़ी प्रतिस्पर्धा की बहस

न सवाल यह है कि 400 से ज्यादा विमानों वाली दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी एयरलाइन को सरकार कैसे नियंत्रित करेगी?

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सुरजीत दास गुप्ता   
Last Updated- December 17, 2025 | 10:41 AM IST

नवंबर में ही संकट के संकेत साफ दिखने लगे थे, जब पायलटों के लिए अधिक आराम समय से जुड़े नए नियम 1 नवंबर से लागू हुए। अकेले नवंबर महीने में ही इंडिगो एयरलाइंस ने 950 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दीं। इस पूरे घटनाक्रम से परिचित लोगों ने बताया कि हालांकि, 1 दिसंबर को जब इंडिगो के वरिष्ठ अधिकारियों ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के शीर्ष अधिकारियों से नए नियमों पर स्पष्टता के लिए मुलाकात की, तब ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया कि देश की सबसे बड़ी एयरलाइन गंभीर संकट में है। न ही कंपनी ने यात्रियों को संभावित बड़े पैमाने पर उड़ान रद्द होने की जानकारी देने या एयरपोर्ट पर अव्यवस्था रोकने के लिए कोई ठोस योजना बनाई।

दो दिन में ठप हुआ देश का घरेलू विमानन नेटवर्क

इसके ठीक दो दिन बाद, 65% बाजार हिस्सेदारी रखने वाली इस एयरलाइन ने देश के घरेलू विमानन नेटवर्क को लगभग ठप कर दिया। दिसंबर के पहले कुछ दिनों में देशभर के एयरपोर्ट्स पर 5,500 से ज्यादा इंडिगो उड़ानें रद्द हुईं, जिससे अब तक 6 लाख से ज्यादा यात्री प्रभावित हुए। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा विमानन संकट माना जा रहा है।

आरोप-प्रत्यारोप का दौर

इस घटनाक्रम के बाद जैसीकि उम्मीद थी, इसके बाद दोषारोपण शुरू हो गया। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने DGCA का बचाव करते हुए पूरे संकट के लिए इंडिगो के भारी कुप्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने एयरलाइन को रद्द उड़ानों का पूरा पैसा लौटाने का निर्देश दिया और चेतावनी दी कि अगर मंत्रालय की ओर से गठित चार-सदस्यीय समिति की जांच में प्रबंधन दोषी पाया गया तो किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

हालांकि, कुछ विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि इसी संकट के चलते सरकार को फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को 10 फरवरी तक टालना पड़ा, जिससे एक बार फिर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

इंडिगो ने बड़े विज्ञापनों और कस्टमर केयर अभियान के जरिए माफी मांगी। कंपनी के चेयरमैन विक्रम सिंह मेहता ने कहा,“पिछले सप्ताह की बाधाएं किसी जानबूझकर की गई कार्रवाई का नतीजा नहीं थीं। ये आंतरिक और कुछ अप्रत्याशित बाहरी कारणों का मिलेजुले नतीजे थे, जिनमें तकनीकी गड़बड़ियां, सर्दियों के शेड्यूल में बदलाव, खराब मौसम, सिस्टम में बढ़ी भीड़ और नए क्रू रोस्टरिंग नियमों का लागू होना शामिल है।”

एयर इंडिया के पूर्व निदेशक और विमानन विशेषज्ञ जितेंद्र भार्गव ने कहा, “इंडिगो ने हाल के दिनों में तेजी से सुधार किया है और लगभग सामान्य परिचालन पर लौट आई है। लेकिन साफ है कि किसी ने सोचा था कि नियमों को टाल दिया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा कि वह कौन था।”

बिना तैयारी बेहिसाब विस्तार की योजना

यह संकट अचानक नहीं आया, बल्कि लंबे समय से बन रहा था। इंडिगो ने सर्दियों के शेड्यूल में उड़ानों का बड़ा विस्तार तय किया था। DGCA से उसे पिछले सर्दियों की तुलना में 9.6% और गर्मियों की तुलना में 6% अधिक घरेलू उड़ानों की अनुमति मिली थी। इससे साप्ताहिक उड़ानें बढ़कर 15,014 और मासिक उड़ानें 60,000 से अधिक हो गईं।

DGCA ने यह अनुमति इस आधार पर दी थी कि सर्दियों में इंडिगो के पास 403 विमान होंगे, जबकि गर्मियों में यह संख्या 351 थी।

इसके विपरीत, एयर इंडिया समूह (एयर इंडिया एक्सप्रेस सहित) ने नए पायलट नियमों और विमानों के अपग्रेड को ध्यान में रखते हुए अपनी सीट क्षमता में 4% से अधिक कटौती की। अकासा एयर और स्पाइसजेट ने सर्दियों में केवल 0.6 मिलियन सीटें जोड़ीं।

पायलटों की कमी से बढ़ा संकट

अनुमति मिलने के बावजूद, इंडिगो अक्टूबर में केवल 334 विमान और नवंबर में 344 विमान ही उड़ा पाई। यह साफ हो गया कि एयरलाइन के पास पर्याप्त पायलट नहीं थे, जो सभी विमानों और उड़ानों को नए आराम नियमों के तहत संभाल सकें। यही स्थिति धीरे-धीरे बड़े संकट में बदल गई।

नागरिक उड्डयन मंत्री नायडू ने इस पायलट कमी के लिए इंडिगो को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि एयरलाइन ने पिछले छह महीनों से पायलट भर्ती पर रोक लगा रखी थी। लोकसभा में दिसंबर की शुरुआत में दी गई जानकारी के अनुसार, इंडिगो में पायलटों की संख्या मार्च में 5,463 से घटकर दिसंबर में 5,085 रह गई, जबकि एयरलाइन घरेलू उड़ानों में बड़े विस्तार की योजना बना रही थी।

आगे की उड़ान योजना

इंडिगो ने अब DGCA को 2026 तक 900 पायलटों की भर्ती की योजना सौंपी है। यह एक साल में अब तक की सबसे बड़ी भर्ती होगी, लेकिन कई विशेषज्ञों को संदेह है कि एयरलाइन इसे पूरा कर पाएगी, क्योंकि इससे वेतन खर्च भी काफी बढ़ेगा।

अनुमान है कि 10 फरवरी के बाद, जब नए आराम नियम पूरी तरह लागू होंगे, इंडिगो को तुरंत 65 से 200 पायलट और चाहिए होंगे। एक विकल्प विदेशी कमांडरों को लाने का भी हो सकता है।

विमानन विश्लेषक अमेय जोशी ने कहा, “पायलट भर्ती में समय लगता है, लेकिन योग्य पायलटों को कमांडर में अपग्रेड करने की प्रक्रिया शुरू की जाए तो संकट कुछ हद तक कम हो सकता है।”

कम लागत मॉडल की कीमत

इंडिगो की सबसे बड़ी ताकत-कम लागत में सीमित कमाई वाली कंपनी चलाना-अब उसी पर भारी पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, इंडिगो में प्रति विमान केवल 14 पायलट हैं, जो इस आकार की एयरलाइन के लिए सबसे कम है। वैश्विक स्तर पर यह अनुपात आमतौर पर 18–21 पायलट प्रति विमान होता है। एयर इंडिया में यह 26 और अकासा में 15 है।

सरकार ने शुरुआत में इंडिगो को अपने सर्दियों के शेड्यूल में 10% कटौती का निर्देश दिया, जबकि DGCA ने 5% कटौती को कहा। इसका मतलब रोजाना करीब 107 उड़ानें और महीने में 3,210 उड़ानें कम होना है।

क्या प्रतिद्वंद्वी एयरलाइंस यह कमी पूरी कर सकती हैं? अमेय जोशी के अनुसार, “कुछ हद तक हां, लेकिन इंडिगो इतनी बड़ी है कि बाकी एयरलाइंस के पास पर्याप्त अतिरिक्त क्षमता नहीं है।”

प्रतिस्पर्धा पर बड़ा सवाल

इस पूरे संकट ने एक बुनियादी सवाल खड़ा कर दिया है, क्या भारत का घरेलू विमानन बाजार लगभग मोनोपोली या ड्यूपोली की ओर बढ़ गया है? दुनिया के कई देशों में प्रतिस्पर्धा कहीं ज्यादा है। अमेरिका में सबसे बड़ी एयरलाइन की हिस्सेदारी केवल 21%, चीन में शीर्ष तीन की 58%, थाईलैंड में 37-41%, और ब्रिटेन में 45-50% है।

इंडिगो की पकड़ सिर्फ कुल बाजार हिस्सेदारी तक सीमित नहीं है। सर्दियों के शेड्यूल में उसकी 20% सीटें ऐसी रूट्स पर हैं जहां वह अकेली उड़ान भरती है। कई रूट्स जैसे कोयंबटूर-चेन्नई, अहमदाबाद-हैदराबाद, हैदराबाद-इंदौर और कोलकाता-पटना पर उसका कोई प्रतिस्पर्धी नहीं है। बताया जा रहा है कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर समीक्षा शुरू कर दी है।

सरकार के सामने चुनौती

नायडू ने स्वीकार किया है कि मोनोपोली या ड्यूपोली विमानन क्षेत्र के लिए चुनौती है। उनका लक्ष्य घरेलू बाजार में कम से कम पांच एयरलाइंस देखना है, जिनके पास 100 से अधिक विमान हों। लेकिन सवाल यह है कि 400 से ज्यादा विमानों वाली दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी एयरलाइन को सरकार कैसे नियंत्रित करेगी?

किस तरह गहराया संकट

  • उड़ान रद्द: FDTL नियम लागू होने के बाद नवंबर में इंडिगो ने 950 से ज्यादा उड़ानें रद्द कीं
  • फ्लीट उपयोग: DGCA की अनुमति के बावजूद 403 में से केवल 344 विमान उड़ाए गए
  • यात्री प्रभाव: 3 नवंबर से अब तक 5,500 उड़ानें रद्द, 6 लाख से ज्यादा यात्री प्रभावित

सरकारी के उठाए कदम

  • जवाबदेही: मंत्री ने DGCA का समर्थन किया, इंडिगो को दोषी ठहराया, चार-सदस्यीय जांच समिति गठित
  • नियामकीय राहत: FDTL की समयसीमा 10 फरवरी तक बढ़ाई गई
  • उपभोक्ता सुरक्षा: रद्द उड़ानों पर पूरा रिफंड देने का निर्देश
  • क्षमता कटौती: सर्दियों की उड़ानों में 5% कटौती का आदेश
  • स्टाफिंग योजना: इंडिगो ने 2026 तक पायलट भर्ती योजना सौंपी
First Published : December 17, 2025 | 10:41 AM IST