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नाश्ते की मेज पर देसी स्वाद का दबदबा

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शहरी भारतीय नाश्ते में अब भी पारंपरिक देसी व्यंजन जैसे डोसा, इडली, उपमा और पोहा की मांग पश्चिमी विकल्पों से कहीं अधिक है।

Last Updated- December 23, 2025 | 8:56 AM IST
Regional dishes still rule Indian breakfast tables despite protein trend
Representative Image

भारतीय पैकेज्ड फूड बाजार में प्रोटीन क्रांति और पेट के लिए अच्छे माने जाने वाले ग्रीक योगर्ट जैसे उत्पादों को पसंद किए जाने के बावजूद जब नाश्ते की बात आती है तो आज भी अधिकांश शहरी भारतीय पश्चिम की नकल करने के बजाय पारंपरिक व्यंजनों को ही चुन रहे हैं।

पैकेज्ड फूड बाजार में खाली जगह की पहचान कर उसे भुनाने के लिए आईडी फ्रेश फूड ने 2005 में डोसा और इडली के लिए चावल का घोल बेचना शुरू किया। उसके बाद से ब्रांड ने बीते 20 वर्षों में पीछे मुड़कर नहीं देखा। वित्त वर्ष 25 में इसने 681.38 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया। उसने इसी अवधि में 50.75 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है।

आईडी फ्रेश फूड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रजत दिवाकर ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘पिछले दो वर्षों में हमने घरेलू बाजार में वृद्धि और मौजूदा उपभोक्ताओं के बीच उच्च खपत दर्ज की है और इससे ब्रांड को दोहरे अंकों की वृद्धि मिली है। नए ग्राहकों के लगातार जुड़ने से लाभ हुआ है।’

मार्केट रिसर्चर वर्ल्डपैनल बाय न्यूमरेटर (पूर्व में कंटार वर्ल्डपैनल) की हालिया एफएमसीजी पल्स रिपोर्ट के अनुसार, रेडी-टू-कुक मिक्स पिछले दो वर्षों में अपनी मात्रा को दोगुना करने वाली दो श्रेणियों में से एक है, जिसने इस अवधि के दौरान 1.8 करोड़ नए घरों में पहुंच बनाई है।

दिवाकर ने बताया कि पुरानी पहचान और भावनात्मक जुड़ाव के कारण ब्रांड लगातार बढ़ रहा है। लेकिन पुरानी यादों से परे ये खाद्य पदार्थ आमतौर पर ताजे होते हैं और कई रेडीमेड नाश्ते के विकल्पों की तुलना में स्वाभाविक रूप से अधिक पौष्टिक होते हैं। इडली, डोसा और उपमा जैसे व्यंजन पौष्टिक रूप से संतुलित और स्वादिष्ट होते हैं, जो उन्हें एक स्वाभाविक विकल्प बनाते हैं।

इस बीच, कॉर्नफ्लेक्स जैसे उत्पादों की मात्रा में गिरावट देखी गई है। शोधकर्ता के अनुसार, पिछले दो वर्षों में कॉर्नफ्लेक्स में लगभग 14 प्रतिशत की कमी आई है। म्यूसली, ओट्स और दलिया ने उसी समय में 1.5 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की है, लेकिन बैटर की बिक्री अभी भी इन प्रीमियम विकल्पों से अधिक है।
एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड के लिए पोहा की बिक्री में वित्त वर्ष 25 में सालाना आधार पर दोहरे अंकों की वृद्धि हुई है, जो सामान्य व्यापार और वैकल्पिक चैनलों, दोनों में मजबूत बिक्री से आई। कंपनी ने कहा कि उत्पाद के खुदरा बाजार में आने से वित्त वर्ष 25 में 40 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई।
एमटीआर फूड्स और ईस्टर्न स्पाइसेस जैसे ब्रांड वाली  ओर्क्ला इंडिया ने भी भारतीय आरटीसी/रेडी-टू-ईट श्रेणी में निरंतर रुचि के कारण वृद्धि देखी है। यह कंपनी इसी साल की शुरुआत में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई है। कंपनी उपभोक्ता जरूरतों के अनुरूप सुविधा वाले खाद्य पदार्थों को बदलने के लिए काम कर रही है और विशेष रूप से आरटीसी चिल्ड डोसा बैटर, उपमा और पुट्टू बैटर जैसे नवाचार के साथ नाश्ते की मेज सजाने का प्रयास कर रही है।

ओर्क्ला इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ संजय शर्मा ने कंपनी के सितंबर तिमाही के नतीजों की घोषणा करते हुए निवेशकों को बताया, ‘नाश्ते में हमने पारंपरिक पाउडर रेंज का विस्तार किया है जो हमारे पास ताजा, रेडी-टू-यूज बैटर के लिए था। यह पिछले दो वर्षों से बाजार में है।’ इस बीच, एमटीआर ‘तीन मिनट रेंज’ के तहत यह क्षेत्रीय स्वादों और स्थानीय खपत की आदतों को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रकार के पोहा भी बेचती है।

स्पेंसर के सीईओ (रिटेल) अनुज सिंह ने हाल ही में आयोजित सीआईआई इंडियाएज 2025 कॉन्क्लेव के मौके पर बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘भारतीय नाश्ता विविधता से भरा होता है और अन्य नाश्ता-संबंधी वस्तुओं की तुलना में यह बड़ी श्रेणी है।’

डेलॉइट की अगस्त की रिपोर्ट  ‘स्पॉटिंग इंडियाज प्राइम इनोवेशन मोमेंट’ के अनुसार, आरटीसी सेगमेंट की मात्रा 2022 से 2024 के बीच दोगुनी हो गई, जिसमें अकेले 2024 में 58 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। क्योंकि उपभोक्ताओं ने इंस्टेंट डोसा बैटर, ग्रेवी/पास्ता मिक्स और मील किट खरीदे। दिल्ली-एनसीआर स्थित प्रमुख किराने की श्रृंखला के बिक्री प्रमुख ने कहा, ‘हम निश्चित रूप से अधिक लोगों को पोहा के पैकेट और उपमा, पोंगल और यहां तक कि ताजा पराठे की बिक्री में उछाल देख रहे हैं।

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First Published - December 23, 2025 | 8:54 AM IST

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