फरवरी 2026 में सीमेंट बाजार एक बार फिर चर्चा में रहा। जनवरी में बढ़े दामों के बाद उम्मीद थी कि तेजी और मजबूत होगी, लेकिन तस्वीर थोड़ी मिली-जुली रही। महीने की शुरुआत में कंपनियों ने कई शहरों में दाम बढ़ाने की कोशिश की, पर हर जगह यह बढ़ोतरी टिक नहीं पाई। इसके बावजूद कुल मिलाकर हालात संभले रहे। पूरे देश में औसत ट्रेड कीमत 2 रुपये प्रति बोरी बढ़कर 342 रुपये तक पहुंच गई। यानी बाजार पूरी तरह सुस्त भी नहीं पड़ा और बहुत तेज भी नहीं भागा।
इलाकों की बात करें तो पश्चिम भारत ने सबसे ज्यादा दम दिखाया। यहां दाम 7 रुपये प्रति बोरी तक बढ़ गए। पूर्व भारत में 4 रुपये और उत्तर भारत में 3 रुपये की तेजी रही। लेकिन कहानी हर जगह एक जैसी नहीं रही। मध्य भारत में दाम लगभग जस के तस रहे, जबकि दक्षिण भारत में औसतन 2 रुपये प्रति बोरी की गिरावट आ गई। कुछ बाजारों में तो महीने की शुरुआत की बढ़त बाद में गायब हो गई।
जनवरी और फरवरी को मिलाकर देखें तो चालू तिमाही में अब तक औसत दाम पिछली तिमाही से करीब 1 प्रतिशत ऊपर चल रहे हैं। यानी कंपनियों को थोड़ी राहत जरूर मिली है।
इस बार बाजार को सहारा मिला बड़े कामों से। सरकारी प्रोजेक्ट और बड़े निर्माण कार्यों में मांग ठीक रही। खुदरा बाजार में दाम 0 से 15 रुपये प्रति बोरी तक ऊपर-नीचे हुए, जबकि बड़े ऑर्डर वाले सौदों में 0 से 20 रुपये प्रति बोरी तक बढ़त देखी गई। ज्यादातर जगहों पर मांग जनवरी के मुकाबले बेहतर रही, लेकिन खुदरा खरीदार अभी भी पूरी ताकत से मैदान में नहीं उतरे हैं।
मार्च के पहले 10 दिन होली के कारण कामकाज थोड़ा धीमा पड़ सकता है। लेकिन त्योहार के बाद बाजार में फिर रफ्तार लौटने की उम्मीद है।
अब सबकी नजर मार्च पर है। ज्यादातर इलाकों में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है, लेकिन बिहार, पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में 10 से 15 रुपये प्रति बोरी तक दाम बढ़ाने की तैयारी चल रही है। सवाल यही है कि क्या इस बार बढ़े हुए दाम टिक पाएंगे?
बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि मांग फिलहाल ठीक है, इसलिए दाम में अचानक बड़ी गिरावट की आशंका कम है। लेकिन असली परीक्षा यही होगी कि कंपनियां बढ़े हुए दाम को कितने समय तक संभाल पाती हैं।
सेंट्रम का मानना है कि वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही सीमेंट कंपनियों के लिए अच्छी रह सकती है। बिक्री ठीक है, दाम पहले से थोड़ा ऊपर हैं और लागत में बड़ा उछाल नहीं है। लेकिन खेल अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले हफ्तों में यह साफ होगा कि बाजार मजबूती से आगे बढ़ेगा या फिर फिर से दबाव में आएगा।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।