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आईबीबीआई ने किया उच्चतम न्यायालय का रुख

Last Updated- December 14, 2022 | 10:06 PM IST

सर्वोच्च न्यायालय ने आज भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) की उस याचिका पर सुनवाई की जिसमें उसने विभिन्न उच्च न्यायालयों में चल रहे फिलहाल विवादग्रस्त व्यक्तिगत गारंटी के मामलों को सर्वोच्च न्यायालय में भेजने और उन्हें एकसाथ जोडऩे का अनुरोध किया है। इसमें रिलायंस समूह के अनिल अंबानी का मामला भी है।  सर्वोच्च अदालत कल इस पर अपना फैसला दे सकती है। एक वरिष्ठ वकील के मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय ने संकेत दिया कि वह सारे मामलों को अपने पास मंगा सकता है।
वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘हमारे पास सीमित संसाधन हैं और विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश मामले में विरोधाभासी फैसला दे सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय एक बार में सारे मुकदमों पर निर्णय दे सकता है।’ अंबानी के अलावा, व्यक्तिगत गारंटी का मुकदमा झेलने वाले प्रमोटरों में भूषण पावर ऐंड स्टील के संजय सिंघल, पुंज लॉयड के संस्थापक अतुल पुंज सहित कई नाम हैं। सभी मामलों पर फिलहाल मुकदमा चल रहा है।   
इस बीच, कारपोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए) ने दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता के एक प्रावधान का बचाव किया है। इसके तहत दिल्ली उच्च न्यायालय में हलफनामा दायर कर अनिल अंबानी के व्यक्तिगत दिवाला मामले में कॉर्पोरेट कर्जदारों के प्रमोटर गारंटी को मंजूरी दी गई थी।मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘एक नोटिस जारी किया गया था जिसके बदले में जवाब दाखिल करना पड़ा है। मंत्रालय को अपने कानून का बचाव करना पड़ता है। कानून बिल्कुल सही है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।’
कारपोरेट मंत्रालय सरकार का पक्ष रखने के लिए कानून मंत्रालय के संपर्क में है। वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी कहा कि अंबानी की ओर से जो याचिका दाखिल की गई है सरकार उसका अध्ययन कर रही है। इस याचिका में कानून की वैधता को चुनौती दी गई है। कानून का अंतत: परीक्षण सर्वोच्च न्यायालय के स्तर पर होता है।
इस साल अगस्त में, अंबानी ने भारतीय स्टेट बैंक की याचिका के खिलाफ अपील की थी जिसमें बैंक ने उनकी व्यक्तिगत गारंटी की बात कही थी। सर्वोच्च न्यायालय ने एसबीआई की याचिका को रद्द कर दिया था और उच्च न्यायालय को निर्देश दिया था कि वह कॉर्पोरेट कर्जदारों के व्यक्तिगत गारंटर के लिए सरकार के दिवाला समाधान प्रक्रिया विनियमन 2019 को अंबानी की चुनौती की सुनवाई करे।  
रिलायंस समूह के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘श्रीमान अंबानी के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने आईबीसी के अंश तीन के तहत एसबीआई की ओर से शुरू की गई कार्रवाई पर रोक लगा दी है। मामला अदालत में विचाराधीन है और दिल्ली उच्च न्यायाल में 10 नवंबर, 2020 को सुनवाई के लिए सूचीबद्घ है।’ अंबानी ने अपनी दो दूरसंचार कंपनियों को 16 करोड़ डॉलर के ऋण की गारंटी दी थी। यह मामला गत वर्ष आईबीबीआई द्वारा नवंबर में पेश किए गए नए आईबीसी नियमों या व्यक्तिगत गारंटरों के लिए परीक्षण का मामला बन गया है।
ब्याज राहत पर एफएक्यू
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि ‘चक्रवृद्धि और साधारण ब्याज के बीच अंतर के लिए ‘अनुग्रह राहत भुगतान योजना’ के तहत 29 फरवरी को बकाया ऋण को संदर्भ राशि माना जाएगा। इस अंतर की गणना इसी बकाया राशि के आधार पर की जाएगी। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को इस बारे एफएक्यू (बार-बार पूछे जाने वाले सवाल) जारी किए। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सभी कर्जदाता संस्थानों से मंगलवार को कहा था कि वे दो करोड़ रुपये तक के कर्ज के लिये हाल ही में घोषित ब्याज पर ब्याज की माफी योजना को लागू करें। भाषा

First Published - October 29, 2020 | 12:36 AM IST

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