देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) ने ग्रामीण बाजारों में नरमी के बावजूद चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में बाजार के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया। इस दौरान कंपनी ने मात्रात्मक बिक्री में 4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की।
तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 22.2 फीसदी बढ़कर 2,665 करोड़ रुपये हो गया जो एक साल पहले की समान तिमाही में 2,181 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी का राजस्व सालाना आधार पर 16.1 फीसदी बढ़कर 15,144 करोड़ रुपये हो गया जो एक साल पहले की समान तिमाही में 13,046 करोड़ रुपये रहा था।
एचयूएल का नतीजा उद्योग की वृद्धि से बेहतर रहा। कंपनी ने मात्रात्मक बिक्री में 4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की जबकि पूरे उद्योग की मात्रात्मक बिक्री में 6 फीसदी की गिरावट आई।
एचयूएल के एमडी एवं सीईओ संजीव मेहता ने कहा, ‘नीलसन के अनुसार, उद्योग के कुल मूल्य में 7 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि हमने 16 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है। जब आप मात्रात्मक बिक्री पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि उद्योग में 6 फीसदी की गिरावट आई जबकि हमने 4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की।’
एचयूएल के मुख्य वित्तीय अधिकारी रितेश तिवारी ने कहा कि सितंबर में एचयूएल के परिचालन वाली एफएमसीजी श्रेणियों के बाजार मूल्य में मध्य एकल अंक में वृद्धि दर्ज की गई और ग्रामीण बाजार के मुकाबले शहरी बाजार में अधिक वृद्धि हुई।
उन्होंने कहा, ‘पाम ऑयल से लेकर लगभग सभी जिंसों की कीमतों में तेजी लगातार बरकरार रही।’ उन्होंने कहा कि कुछ जिंस कीमतों में नरमी भी दिखी लेकिन ऊंची मुद्रास्फीति उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। तिवारी ने कहा, ‘एफएमसीजी बाजार की चुनौतियां बरकरार रहेंगी क्योंकि महंगाई के कारण मांग प्रभावित हो रही है।
बाजार में मात्रात्मक बिक्री लगातार घट रही है।’ तिमाही के दौरान कंपनी का ब्याज, अवमूल्यन एवं कर पूर्व लाभ यानी पीबीआईडीटी 9.4 फीसदी बढ़कर 3,588 करोड़ रुपये हो गया। तिमाही के दौरान होम केयर श्रेणी में 34 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई जबकि ब्यूटी एवं पर्सनल केयर में 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
इसी प्रकार फूड एवं रीफ्रेशमेंट श्रेणी में 4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई जिसे फूड, कॉफी एवं आइसक्रीम के दमदार प्रदर्शन से रफ्तार मिली। मात्रात्मक बिक्री में वृद्धि की वापसी के बारे में मेहता ने कहा कि जिंस कीमतों में नरमी आने पर मात्रात्मक बिक्री बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि जिंसों के दाम अब भी 10 साल के औसत से अधिक हैं।
मेहता ने कहा, ‘यदि हम एनएमआई (शुद्ध सामग्री महंगाई) पर गौर करते हैं तो तिमाही के दौरान 22 फीसदी दिखती है जो काफी अधिक है। इसमें गिरावट आने के साथ ही विनिर्माता अथवा बाजार जिंस कीमतों में नरमी का लाभ ग्राहकों को देना शुरू करेंगे जिससे मात्रात्मक बिक्री बढ़ेगी।’
उन्होंने कहा कि पाम ऑयल की कीमतों में नरमी के बाद कंपनी पहले ही साबुन के दाम घटाने लगी है। मांग के बारे में मेहता ने कहा कि सितंबर में मांग पिछली दो तिमाहियों के मुकाबले बेहतर रही।