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Venture Capital: स्टार्टअप फंडिंग में भारी गिरावट, 5 साल में सबसे निचले स्तर पर

कुल सौदों में भारत की हिस्सेदारी में भी गिरावट देखी गई है, जो कैलेंडर वर्ष 23 के दौरान सभी वैश्विक सौदों में केवल 3.6 प्रतिशत रही।

Last Updated- January 22, 2024 | 10:35 PM IST
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कुल वैश्विक वेंचर कैपिटल (वीसी) फंडिंग में भारत की हिस्सेदारी कैलेंडर वर्ष 2023 में कम होकर 2.9 प्रतिशत रह गई और कैलेंडर वर्ष 19 के बाद से सबसे निचले स्तर 7.3 अरब डॉलर पर आ गई। अधिकांश स्टार्टअप रकम जुटाने के लिए जूझते नजर आईं। कारण यह कि वे अपने पुराने मूल्यांकन के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहती थीं।

वीसी फंडिंग पर सीबी इनसाइट्स के वैश्विक आंकड़ों के अनुसार भारतीय स्टार्टअप को मिलने वाली फंडिंग कैलेंडर वर्ष 22 की तुलना में लगभग एक-तिहाई कम हो गई। तब यह 20.6 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी और वैश्विक फंडिंग का 4.8 प्रतिशत हिस्सा थी।

हालांकि आंकड़ों से पता चलता है कि दुनिया में 71 नए यूनिकॉर्न (एशिया में 21) थीं, लेकिन इनमें भारत के दो ही यूनिकॉन थे जबकि कैलेंडर वर्ष 22 में यह संख्या 22 थी।

कुल सौदों में भारत की हिस्सेदारी में भी गिरावट देखी गई है, जो कैलेंडर वर्ष 23 के दौरान सभी वैश्विक सौदों में केवल 3.6 प्रतिशत रही। कैलेंडर वर्ष 22 में यह हिस्सेदारी 4.2 प्रतिशत थी।

वर्ष 2023 की चौथी तिमाही में भारत में एक ही ऐसा सौदा रहा, जो शीर्ष 10 वैश्विक सौदों की सूची में था। यह उड़ान का कम मूल्यांकन पर धन जुटाने का मामला था।

फंडिंग का स्वरूप भी बदल गया है। कैलेंडर वर्ष 23 में अंतिम चरण वाली फंडिंग का हिस्सा 9 प्रतिशत था, जबकि इससे पिछले वर्ष यह हिस्सेदारी 12 प्रतिशत थी।

मध्य चरण की फंडिंग की हिस्सेदारी में भी दो प्रतिशत की गिरावट आई, लेकिन शुरुआती चरण की फंडिंग की हिस्सेदारी में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह कैलेंडर वर्ष 22 के 75 प्रतिशत से बढ़कर कैलेंडर वर्ष 23 में 78 प्रतिशत हो गई।

अंतिम चरण की फंडिंग वाली स्टार्टअप के लिए अपना मूल्यांकन कम किए बिना पैसा जुटाना मुश्किल हो गया है या फिर उनसे कहा गया कि वे फंडिंग के लिए तभी आएं, जब उन्हें मुनाफा होने लगे। अधिकांश वीसी ने कम जोखिम वाली छोटी स्टार्टअपों की फंडिंग पर ध्यान केंद्रित किया।

अपनी अर्थव्यवस्था में तमाम उथल-पुथल के बावजूद चीन ने भारत से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया। यह कैलेंडर वर्ष 23 में 27.4 अरब डॉलर की वीसी फंडिंग जुटाने में कामयाब रहा, हालांकि इसमें भी भारी गिरावट देखी गई।

27.4 अरब डॉलर का यह आंकड़ा कैलेंडर वर्ष 22 की तुलना में एक-चौथाई कम रहा, जब चीन ने 100 अरब डॉलर का स्तर पार कर लिया था। परिणामस्वरूप फंडिंग की हिस्सेदारी में देशों के बीच का अंतर कम हो गया है।

First Published - January 22, 2024 | 10:35 PM IST

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