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भारी घाटे के कगार पर फ्यूचर के शेयरधारक

Last Updated- December 11, 2022 | 7:35 PM IST

प्रवर्तक किशोर बियाणी की हिस्सेदारी फ्यूचर समूह की कंपनियों में दिसंबर 2019 के बाद से लगातार घट रही है जब अमेरिकी रिटेल दिग्गज एमेजॉन ने फ्यूचर समूह की प्रवर्तक इकाई में निवेश किया था और समूह की कंपनियां कोविड महामारी के कारण वित्तीय दबाव के संकेत देने लगी थी।
चूंकि लेनदारों ने फ्यूचर समूह की कंपनियों से अपना बकाया वसूलने के लिए उसे दिवालिया संहिता के तहत दिवालिया अदालत ले गए, लेकिन फ्यूचर समूह की कंपनियों के शेयरधारक अपने पूरे निवेश गंवाने के कगार पर हैं क्योंंकि सुरक्षित लेनदारों को किसी भी संभावित रिकवरी में अग्रणी प्राथमिकता दी जाएगी। यह कहना है वकीलों का।
विक्योरियम लिगलिस के प्रबंध साझेदार आदित्य चोपड़ा ने कहा, फ्यूचर समूह के शेयरधारकों को अब पूरा नुकसान उठाना पड़ सकता है। कंपनी पर दिवालिया कार्यवाही शुरू हो सकती है और लेनदार अपने बकाए का ज्यादातर हिस्सा वसूलने की स्थिति में नहीं होंगे। यह स्थिति इसलिए पैदा हुई क्योंंकि पुनर्गठन नाकाम रहा, जिसकी वजह योजना के खिलाफ सुरक्षित लेनदारों की वोटिंग रही।
स्टॉक एक्सचेंजों के आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल मार्च में फ्यूचर कंज्यूमर में बियाणी परिवार की हिस्सेदारी दिसंबर 2019 के 46.9 फीसदी के मुकाबले घटकर 8.4 फीसदी रह गई है क्योंंकि लेनदारों ने समूह कंपनियों की गिरवी हिस्सेदारी को जब्त करना शुरू कर दिया। समूह की मूल कंपनी फ्यूचर रिटेल में बियाणी की हिस्सेदारी मार्च में घटकर 14.3 फीसदी रह गई, जो दिसंबर 2019 में 47 फीसदी थी। फ्यूचर समूह ने फ्यूचर कूपन (फ्यूचर रिटेल की प्रवर्तक इकाई) की 50 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर दिसंबर 2019 एमेजॉन से 1,430 करोड़ रुपये जुटाए थे।
फ्यूचर एंटरप्राइजेज में बियाणी की हिस्सेदारी 50 फीसदी से घटकर इस साल मार्च में 17 फीसदी रह गई। ऐसा ही रुख फ्यूचर सप्लाई चेन सॉल्युशंस में देखने को मिला, जहां प्रवर्तक हिस्सेदारी 47.9 फीसदी से घटकर 22 फीसदी रह गई। फ्यूचर लाइफस्टाइल फैशंस में बियाणी की हिस्सेदारी इस साल मार्च में घटकर 20.4 फीसदी रह गई। हालांकि फ्यूचर मार्केट्स नेटवक्र्स में बियाणंी की हिस्सेदारी 71.6 फीसदी बनी रही है।
मार्च 2020 में जब भारत में लॉकडाउन का ऐलान हुआ था तब समूह कंपनियों की वैल्यू के लिहाज से गिरवी प्रवर्तक हिस्सेदारी 89.8 फीसदी अनुमानित थी। रीड इंटेलिजेंस के आंकड़ों के मुताबिक, फ्यूचर रिटेल की 83.9 फीसदी पप्रवर्तक हिस्सेदारी गिरवी रखी हुई थी जबकि फ्यूचर कंज्यूमर की 92 फीसदी हिस्सेदारी। इसी तरह फ्यूचर एंटरप्राइजेज की 92.3 फीसदी हिस्सेदारी गिरवी थी जबकि फ्यूचर लाइफस्टाइल की 99.8 फीसदी हिस्सेदारी साल 2020 की शुरुआत में गिरवी रखी हुई थी।
समूह की कंपनियों मेंं जब वित्तीय गिरावट के संकेत दिखने लगे तब समूह ने अप्रैल व दिसंबर 2019 के बीच कई जरिये से 4,620 करोड़ रुपये जुटाए थे। इसमेंं से 1,750 करोड़ रुपये का निवेश ब्लैकस्टोन ने किया था जबकि 590 करोड़ रुपये प्राइवेट इक्विटी फर्म अपोलो से कर्ज के तौर पर जुटाए गए थे। एयॉन व यूबीएस ने भी बियाणी की प्रवर्तक इकाई में कर्ज के तौर पर क्रमश: 500 करोड़ रुपये व 350 करोड़ रुपये निवेश किए थे।

First Published - April 25, 2022 | 12:52 AM IST

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