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भारत से इंजन निर्यात को फोर्ड है बेकरार

Last Updated- December 07, 2022 | 4:04 AM IST

अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी ऑटो निर्माता कंपनी फोर्ड मोटर की योजना भारत में कंपनी की इकाई को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में इंजनों के निर्यात केन्द्र के रूप में इस्तेमाल करने की है।


फोर्ड भारत को केन्द्र इसलिए बनाना चाहती है, क्योंकि देश में उत्पादन लागत कम आती है। फोड के प्रबंध निदेशक (स्थानीय इकाई) माइकल बोनेहैम ने अपने साक्षात्कार में कहा कि फोर्ड चेन्नई में अपनी फैक्टरी के विस्तार में 2000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, ताकि कंपनी 2010 तक अपने इंजनों और वहानों की सालाना को बढ़ाकर ढाई और 2 लाख कर सके।

उन्होंने कहा कि फोर्ड हो सकता है कि अपनी छोटी कारों का भी निर्यात करे, जिसे कंपनी भारत में बनाने पर विचार कर रही है। निसान मोटर कंपनी और हुंडई मोटर कंपनी जैसी कार निर्माता कंपनियां भारत में अपनी फैक्टरियों में कुल लगभग 24 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही हैं। फोर्ड एशिया में विस्तार कर रही है, चूंकि अमेरिकी बाजारों में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों की वजह से ट्रक की बिक्री लगभग खत्म ही हो गई है।

बोनेहैम का कहना है, ‘भारत हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण बाजार है और यह इस क्षेत्र में इंजनों के लिए हमारा एक निर्यातक देश बन सकता है।’ उनका कहना है, ‘देश में उत्पादन लागत में बचत भी काफी होती है।’ मेकिंसी ऐंड कंपनी के अनुसार भारतीय इंजनों और कल-पुर्जों का निर्यात 2015 में 6 गुना बढ़कर 2003 में 26,800 करोड़ रुपये के मुकाबले 1,60,000 करोड़ रुपये हो जाएगा, क्योंकि ऑटो निर्माता कंपनियां अपने उत्पादन की लागत में कटौती पर विचार कर रही हैं।

भारतीय ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियों के संघ (सियाम) के अनुसार, भारत का वहान निर्यात 31 मार्च को समाप्त हुए वर्ष में 11 प्रतिशत बढ़ कर 2,76,053 हो चुका है, जिसके पीछे एक बड़ी वजह यह है कि ऑटो निर्माता कंपनियां देश का इस्तेमाल यूरोप और एशिया में हैचबैक और मिनीकारों के निर्यात के लिए एक केन्द्र के रूप में कर रही हैं।

First Published - June 7, 2008 | 12:06 AM IST

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