त्वचा रोग सोराइसिस में इस्तेमाल होने वाली बायोकॉन की दवा इटोलिजुमैब को जब से दवा नियामक द्वारा कोविड-19 में आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मिली है, तब से उसकी बिक्री में सात गुना इजाफा हो चुका है। हालांकि इस दवा को अभी स्वास्थ्य मंत्रालय के कोविड-19 के इलाज के चिकित्सा प्रबंधन नियमों का हिस्सा नहीं बनाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस दवा पर चौथे चरण के चिकित्सकीय परीक्षण चल रहे हैं, इसलिए अगर कोविड-19 के मरीजों पर दवा के इस्तेमाल के नतीजे अनुकूल आए तो इसकी बिक्री और बढ़ सकती है।
बाजार अनुसंधान कंपनी एआईओसीडी एडब्ल्यूएसीएस के आंकड़े दर्शाते हैं कि इस दवा को जुलाई में मंजूरी मिलने के समय इसकी बिक्री महज 50 यूनिट थी, जो अगस्त में सात गुना बढ़कर 350 यूनिट हो गई। जून में इस दवा की कोई बिक्री नहीं दिखी।
भारत में इटोलिजुमैब को अलजुमैब ब्रांड के नाम से जाना जाता है। इसकी कीमत 8,000 रुपये प्रति शीशी है। ज्यादातर मरीजों को चार शीशी की जरूरत होती है। इस तरह इस दवा से इलाज की कुल लागत 32,000 रुपये आती है। हालांकि कुछ मामलों में मरीज को दो और शीशियों की दूसरी खुराक की जरूरत पड़ सकती है। इस दवा का बायोकॉन की बेंगलूूरु स्थित बायो-मैन्यूफैक्चरिंग इकाई में इन्ट्रावेनस इंजेक्शन के रूप में विनिर्माण होता है।
कंपनी को कोविड-19 के सामान्य और गंभीर लक्षणों वाले मरीजों के आपातकालीन इलाज के लिए इस नई जैविक दवा की बिक्री की भारत के औषध महानिदेशक (डीसीजीआई) से मंजूरी जुलाई की शुरुआत में मिली थी।
हालांकि इस दवा को स्वास्थ्य मंत्रालय के चिकित्सा प्रबंधन नियमों में शामिल नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि सरकार इसकी प्रभावी इलाज के रूप में सिफारिश नहीं करती है। इस दवा को कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल करने के लिए पहले का परीक्षण उन 30 मरीजों पर किया गया, जो सार्स-सीओवी-2 संक्रमण के कारण सामान्य से गंभीर एआरडीएस (एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ऑर्डर सिंड्रोम) से पीडि़त थे। इन 30 मरीजों में 20 को इटोलिजुमैब दी गई और 10 को मानक इलाज मिला। जिन 20 मरीजों को इलोलिजुमैब दी गई, वे पूरी तरह ठीक हो गए और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। दूसरी तरफ जिन 10 अन्य मरीजों को मानक देखभाल दी गई, उनमें से तीन मर गए।
कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि यह अध्ययन सीमित मरीजों पर किया गया। इसके बाद अब बायोकॉन ने चौथे चरण का परीक्षण शुरू किया है, जिसके पूरा होने में कम से कम कुछ महीने लगेंगे। चौथे चरण का परीक्षण दवा के कारगर और सुरक्षित होने के वास्तविक दुनिया के सबूतों की पड़ताल है। यह पहले के परीक्षणों से कंपनी को मिले आंकड़ों की पुष्टि के लिए की जा रही है।
कंपनी पूरे देश में करीब 25 से 30 केंद्रों में कुल 300 लोगों पर चौथे चरण के परीक्षण कर रही है। कंपनी ने अध्ययन को अंजाम देने के लिए इंटरनैशनल क्लीनिकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन को जोड़ा है।