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ऑटो इंडस्ट्री को मिला ‘जादुई फॉर्मूला’! पुराने नाम, नए फीचर्स के साथ

भारतीय ऑटो कंपनियां ग्राहकों की भावनाओं और ब्रांड पहचान का फायदा उठाते हुए पुराने लोकप्रिय मॉडल नामों को नए फीचर्स के साथ फिर से बाजार में ला रही हैं।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- December 07, 2025 | 2:04 PM IST

भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियां अब पुराने और प्रसिद्ध नामों का इस्तेमाल करके ग्राहकों का ध्यान खींच रही हैं। बाजार में नए मॉडल्स की भरमार के बीच यह रणनीति कंपनियों को अलग पहचान बनाने और पुराने ग्राहकों की भावनाओं से जुड़ने में मदद कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम बढ़ती प्रतिस्पर्धा का तार्किक जवाब है।

ICRA के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीकुमार कृष्णमूर्ति का कहना है, “इन पुराने ब्रांड्स में पहले से ग्राहकों के बीच भरोसा और पहचान मौजूद होती है। इसलिए नए मॉडल को लॉन्च करने पर ग्राहक जल्दी जुड़ जाते हैं। साथ ही, मार्केटिंग खर्च भी नए नाम लॉन्च करने की तुलना में काफी कम होता है।”

कौन से ब्रांड्स ने सफल वापसी की?

हाल के वर्षों में यह ट्रेंड मजबूत हुआ है।

  • टाटा मोटर्स ने लगभग तीन दशकों बाद सिएरा को फिर से बाजार में उतारा। इससे पहले 2021 में टाटा ने सफारी की रिवाइवल करके एसयूवी सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत की थी।

  • मारुति सुजुकी ने 2015 में पुराने बालेनो (पहले एक सेडान) को प्रीमियम हैचबैक के रूप में लॉन्च किया। नया बालेनो कंपनी की बेस्ट-सेलिंग कारों में शामिल हुआ।

  • Hyundai ने 2018 में Santro को वापस लाया, जो भारतीय परिवारों में भावनात्मक जुड़ाव रखती थी।

  • महिंद्रा ने 2022 में स्कॉर्पियो-एन पेश की और पुरानी स्कॉर्पियो को “स्कॉर्पियो क्लासिक” के नाम से जारी रखा।

कुछ अन्य उदाहरणों में मारुति ग्रैंड विटारा और महिंद्रा बोलेरो नियो शामिल हैं, जो पुराने नाम की पहचान का लाभ उठाकर नए मॉडल लॉन्च किए गए।

क्यों काम करते हैं पुराने नाम?

प्रिमस पार्टनर्स के सलाहकार अनुराग सिंह कहते हैं, “बहुत सारे ब्रांड्स और मॉडल्स के बीच पुराने और मजबूत नाम कंपनियों को बाजार में अलग पहचान दिलाते हैं। जहां पहले से भरोसा और पहचान मौजूद हो, वहां नाम को दोबारा इस्तेमाल करना समझदारी है।”

विशेषज्ञों का कहना है कि हर रिवाइवल सफल नहीं होता। ग्राहक की पसंद बदलती रहती है, और अगर डिज़ाइन या पोजिशनिंग सही न हो तो नॉस्टैल्जिया का फायदा नहीं मिलता। पुराने नाम को भावनात्मक जुड़ाव के साथ आधुनिक फीचर्स और स्टाइलिंग में संतुलित करना जरूरी है।

ग्राहक को जोड़ने की लागत बढ़ने और मॉडल्स की संख्या बढ़ने के कारण ऑटो कंपनियां इस रणनीति को और मजबूत कर सकती हैं। इसका मतलब है कि वे पुराने भरोसेमंद नामों के साथ आधुनिक इंजीनियरिंग और नए फीचर्स को जोड़कर न केवल पुराने ग्राहकों को आकर्षित करेंगे बल्कि नए खरीदारों को भी लुभाएंगे।

First Published : December 7, 2025 | 2:04 PM IST