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मानसून खत्म हुआ तो चढ़ने लगे इस्पात के भाव

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Last Updated- December 07, 2022 | 9:41 PM IST

कच्चे माल की कीमतों में जबरदस्त कमी के बावजूद हाजिर बाजार में स्टील की कीमतें बढ़ी हैं। अभी पिछले पखवाड़े ही इनगॉट स्टील की कीमत में 5 फीसदी का उछाल देखा गया।


मजेदार बात यह है कि पूरी दुनिया में इस्पात के कच्चे माल की कीमतों में कमी देखी जा रही है लेकिन देश में मानसून खत्म होने के बाद मांग में इजाफा होने से कीमतों में वृद्धि हो रही है। देश के सबसे बड़े इस्पात बाजार पंजाब के मंडी गोबिंदगढ़ में इस महीने की शुरुआत में इनगॉट स्टील की कीमत 34,000 रुपये प्रति टन थी जो बढ़कर 35,700 रुपये हो गई है।

कारोबारियों के मुताबिक, मानसून खत्म होने के बाद निर्माण कार्यों में तेजी आने से इस्पात की मांग बढ़ी है। मंडी गोबिंदगढ़ में विशेषज्ञ अनिल सूरज का मानना है कि मांग में हुई मौजूदा तेजी से इस्पात की कीमतों को बल मिला है। उम्मीद की जा रही है कि अगले महीने इस्पात की कीमतों में 10 से 15 फीसदी की और तेजी हो सकती है।

ठीक इसी तरह, इस्पात की अन्य किस्मों में भी 5 से 10 फीसदी की वृद्धि हुई है। हॉट रोल्ड कॉयल (एचआरसी) और हॉट रोल्ड शीट को क्रमश: 44,220 रुपये प्रति टन और 43,520 रुपये प्रति टन की दर से बेचा जा रहा है, जबकि कोल्ड रॉल्ड कॉयल (सीआरसी) और कोल्ड रॉल्ड शीट की मौजूदा बिक्री दर क्रमश: 48,400 और 48,500 रुपये प्रति टन है।

इसी प्रकार, लोहे के छड़ की कीमत एक पखवाड़े के भीतर ही 41,500 रुपये प्रति टन से बढ़कर 43,500 रुपये प्रति टन हो गई है। इस्पात के तमाम उत्पाद चाहे वह सपाट हों या लंबे, सभी की मांग बरसात के महीनों में यानी जून से अगस्त के बीच काफी गिर गई। लेकिन सितंबर महीने में अचानक ही इनकी मांग में तेजी आ गई है।

विशेषकर, लंबे उत्पादों की मांग तो काफी बढ़ गई है। इनकी बिक्री इस समय 5 से 10 फीसदी के प्रीमियम पर 43,500 रुपये प्रति टन में हो रही है। प्राथमिक उत्पादक को तो लंबे इस्पात उत्पादों की आपूर्ति करने के लिए अगले चार महीने का अग्रिम ऑर्डर मिल चुका है।

भारत में विशेष प्रकार के इस्पात की मांग हमेशा ही काफी ज्यादा होती है, फिलहाल तो इसका आयात किया जा रहा है। इसलिए सरकार भी इसकी कीमतों को नहीं नियंत्रित करती। लगभग सारे प्रमुख प्राथमिक इस्पात उत्पादक विशेष किस्म के लंबे और सपाट उत्पादों का उत्पादन करते हैं।

भूषण स्टील के मुख्य वित्तीय अधिकारी नितिन जौहरी के मुताबिक, यह कहना बड़ा ही मुश्किल है कि इस्पात की कीमतों में वृद्धि होगी। ऐसा इसलिए भी कि कोयला, पिग आयरन के सस्ते होने से इस्पात की लागत में तेजी से कमी हो रही है। पिग आयरन के उत्पादक केआईसी मेटालिक्स लिमिटेड के एन. मोहपात्रा ने बताया कि मेट कोक की कीमतों में 50 डॉलर प्रति टन की कमी हुई है और इसके भाव 800 डॉलर प्रति टन हो गए हैं।

साथ ही, पिछले महीने भर से लौह अयस्क की कीमतें 5,500 रुपये प्रति टन के आसपास ही स्थिर है। चीन की ओर से सुस्त मांग रहने से पिग आयरन की कीमत में 23 फीसदी की कमी हुई है। फिलहाल पिग आयरन का मूल्य एक महीने पहले के 35,000 रुपये प्रति टन के मुकाबले 27,000 रुपये प्रति टन तक चला गया है।

भुवालका स्टील इंडस्ट्रीज लिमिटेड नामक द्वितीयक इस्पात कंपनी के प्रबंध निदेशक सुरेश कुमार भुवालका ने बताया कि स्टील की कीमतों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद नहीं है। ऐसा इसलिए कि स्क्रैप की कीमतें पूरी दुनिया में कम हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में मांग घटने से स्क्रैप की कीमतें 125 डॉलर कम होकर 475 डॉलर प्रति टन हो गई हैं। उम्मीद की जा रही थी कि ओलंपिक खेलों की समाप्ति के बाद इस महीने की शुरुआत से ही इस्पात की मांग बढ़ जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अभी तक ओलंपिक का असर जारी है।

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First Published - September 17, 2008 | 11:38 PM IST

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