facebookmetapixel
Advertisement
पश्चिम एशिया की जंग से भारतीय अर्थव्यवस्था पर संकट: क्या 7.4% की विकास दर हासिल कर पाएगा भारत?WTO में भारत का बड़ा कदम: डिजिटल ट्रेड पर टैरिफ न लगाने के मोरेटोरियम को दो साल के लिए दी मंजूरीमोदी-ट्रंप की फोन पर बातचीत में मस्क की मौजूदगी को भारत ने नकारा, कहा: सिर्फ दोनों नेता ही शामिल थेApple ने बदला अपना गेम प्लान, भारत में पुराने आईफोन खरीदना अब नहीं होगा इतना सस्ता2026 में आ सकता है फाइनेंशियल क्रैश? रॉबर्ट कियोसाकी ने चेताया, बोले: पर ये अमीर बनने का मौका होगाIPL 2026: इस बार बिना MS Dhoni उतरेगी CSK, कौन संभालेगा टीम की कमान?ITR Filing 2026: इस बार नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होगा या पुराना? एक्सपर्ट से दूर करें सारा कंफ्यूजनIRB इंफ्रा और Triton Valves समेत ये 4 कंपनियां अगले हफ्ते देंगी बोनस शेयर, निवेशकों की बल्ले-बल्लेRentomojo ने सेबी के पास IPO के ड्राफ्ट पेपर जमा किए, ₹150 करोड़ फ्रेश इश्यू का लक्ष्य; बाजार में हलचलTVS Motor से लेकर CRISIL तक, अगले हफ्ते ये 7 दिग्गज कंपनियां बांटेंगी मुनाफा; चेक कर लें रिकॉर्ड डेट

2024 में 30% बढ़े सोने के दाम

Advertisement

केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीद ने 2024 में सोने की कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचाया, लेकिन 2025 में अस्थिरता के बीच नरम वृद्धि की उम्मीद

Last Updated- December 13, 2024 | 10:12 PM IST
Gold

भारतीय बाजार में कैलेंडर वर्ष 2024 में सोने के दाम अब तक 30 प्रतिशत से ज्यादा बढ़े हैं। करीब 7,300 रुपये प्रति ग्राम (नवंबर के अंत तक डॉलर में 28 प्रतिशत की वृद्धि) की बढ़ोतरी के साथ सोने के दाम 10 वर्षों में किसी कैलेंडर वर्ष में अब तक सर्वश्रेष्ठ रहे हैं। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों की वजह से यह शानदार प्रदर्शन शायद साल 2025 के अंत तक जारी न रहे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2024 में दुनिया भर में सोने की कीमतों में तेज उछाल मुख्य रूप से केंद्रीय बैंकों और निवेशकों की खरीद की वजह से आई है जिसने उपभोक्ता मांग में खासी गिरावट की काफी भरपाई की। डब्ल्यूजीसी के आंकड़ों के अनुसार केंद्रीय बैंकों की मांग मजबूत रही और सोने की खरीद कैलेंडर वर्ष 24 की तीसरी तिमाही तक 694 टन के स्तर तक पहुंच गई जो साल 2022 के स्तर के बराबर है।

डब्ल्यूजीसी ने कहा कि उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंकों ने सोने के बाजारों पर दबदबा बनाए रखा है। तुर्की और पोलैंड ने अक्टूबर 2024 तक अपने भंडार में क्रमशः 72 टन और 69 टन सोना जोड़ा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्टूबर में 27 टन जोड़ा जिससे अक्टूबर तक उसकी कुल स्वर्ण खरीद 77 टन हो गई। अक्टूबर तक भारत की शुद्ध खरीद साल 2023 की तुलना में पांच गुना अधिक रही।

डब्ल्यूजीसी ने कहा, ‘एशियाई निवेशक लगभग लगातार रहे हैं जबकि कैलेंडर वर्ष 24 की तीसरी तिमाही के दौरान कम यील्ड और कमजोर डॉलर से पश्चिमी निवेश को बढ़ावा मिला। अलबत्ता बाजार में बढ़ती अस्थिरता और भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की भूमिका इसके उल्लेखनीय प्रदर्शन को बता देती है।’

साल 2025 में सोने की चाल

ज्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि साल 2025 सोने के लिए चुनौतीपूर्ण वर्ष होगा क्योंकि उसे कई प्रतिकूल हालात का सामना करना पड़ेगा। सबसे पहला तो डॉनल्ड ट्रम्प का राष्ट्रपति बनना और वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों पर इसके असर से जुड़ा है। सोने के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक चीन में होने वाले घटनाक्रम पर भी नजर रहेगी। डब्ल्यूजीसी ने कहा कि चीनी उपभोक्ता पिछले कुछ महीनों से इससे दूर रहे हैं जबकि निवेशकों ने समर्थन दिया है। लेकिन ये रुख व्यापार, प्रोत्साहन और जोखिम की धारणा के सीधे (और परोक्ष) प्रभावों पर टिका हुआ है।

गोल्डमैन सैक्स और यूबीएस के विश्लेषक भी साल 2025 में भू-राजनीति, व्यापार युद्धों के कारण समूचे मनोबल पर नियंत्रण जैसी अस्थिरता के बीच सोने की कीमतों में नरम वृद्धि की उम्मीद करते हैं। गोल्डमैन सैक्स को उम्मीद है कि दिसंबर 2025 तक सोने के दाम प्रति औंस 3,150 डॉलर (तेजी वाला परिदृश्य में, आधार केस 3,000 डॉलर प्रति औंस) के स्तर तक पहुंच जाएंगे और इनमें मौजूदा स्तरों की तुलना में लगभग 17 प्रतिशत की वृद्धि होगी।

Advertisement
First Published - December 13, 2024 | 10:12 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement