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फिर मजबूत होने लगी कच्चे तेल की धार

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Last Updated- December 07, 2022 | 7:03 AM IST

सऊदी अरब द्वारा कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने के वायदे के बावजूद नाइजीरिया में पिछले हफ्ते एक पाइपलाइन के उड़ाए जाने से कच्चे तेल की किल्लत होने का अनुमान लगाया जा रहा है।


इसकी वजह से न्यू यॉर्क में कच्चे तेल का भाव 136 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया है। सोमवार को न्यू यॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज में अगस्त डिलिवरी के लिए कच्चे तेल के सौदे में 0.9 फीसदी या 1.24 डॉलर की मजबूती आयी और यह 136.6 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

इससे पहले 20 जून को कच्चे तेल के सौदे में 2.1 फीसदी या 2.76 डॉलर की मजबूती आयी थी और यह 135.36 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ गया था। मालूम हो कि 20 जून को निपटान होने वाले जुलाई के वायदा अनुबंध में 2 फीसदी या 2.68 डॉलर की वृद्धि हुई और यह 134.62 डॉलर प्रति बैरल को छू गया जबकि 16 जून को यह सौदा 139.89 डॉलर की रेकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था।

उल्लेखनीय है कि रविवार को जेद्दाह में ओपेक के ऊर्जा मंत्रियों की हुई बैठक में सऊदी अरब के तेल मंत्री अली अल-नैमी ने कहा कि उनका देश प्रतिदिन 2 लाख बैरल कच्चे तेल का अतिरिक्त उत्पादन करेगा। जबकि जरूरत पड़ने पर वह अपना उत्पादन और बढ़ा सकता है। कच्चे तेल के बड़े उत्पादकों में से एक नाइजीरिया में आतंकवादियों द्वारा कमाई में हिस्सेदारी को लेकर दी जा रही धमकी और पिछले हफ्ते एक पाइपलाइन को उड़ाये जाने से उत्पादन में रुकावट आयी है।

इससे कच्चे तेल की आपूर्ति में प्रतिदिन लगभग 3.3 लाख बैरल की कमी आयी है। एक विश्लेषक ने बताया-उनका मानना है कि सऊदी अरब द्वारा उत्पादन में वृद्धि करने से बाजार के रुख में कोई खास बदलाव नहीं होने वाला। दरअसल उसके द्वारा उत्पादन में होने वाली यह वृद्धि कच्चे तेल की वैश्विक खपत के लिहाज से ऊंट के मुंह में जीरे जैसा है।

रविवार को जेद्दाह में कच्चे तेल के प्रमुख उत्पादकों और उपभोक्ताओं की बैठक खत्म होने के बाद ओपेक अध्यक्ष चकीब खलील ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी की वजह आपूर्ति का कम होना नहीं बल्कि तेल के खेल में सट्टेबाजों का सक्रिय होना, भौगोलिक राजनीति और डॉलर का कमजोर होना है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब द्वारा तेल का उत्पादन बढ़ाया जाना बिल्कुल ही अतार्किक कदम है और इससे तेल की कीमतें शायद ही कम हो सकेंगी।

न्यू यॉर्क तेल वायदा बाजार में कच्चे तेल की खरीद और बिक्री अनुबंध के बीच का अंतर यानि नेट-लाँग पोजीशन में 50 फीसदी की गिरावट आ चुकी है और यह 12,534 अनुबंध तक पहुंच चुका है। बताया जा रहा है कि यह पिछले 16 महीने में सबसे कम है। जानकारों की राय में कच्चे तेल की कीमत बढ़ाने में अमेरिकी फेडरल रिजर्व का भी काफी योगदान है क्योंकि उसने पिछले दिनों संकेत दिए थे कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए ब्याज की दरें घटायी जा सकती हैं।

इसके बाद डॉलर के प्रभुत्व वाली जिंसों में निवेशकों ने रुचि लेना शुरू कर दिया है जिससे इनमें तेजी आनी शुरू हो गयी। पिछले हफ्ते नाइजीरिया में एक पाइपलाइन पर आतंकवादियों के हुए हमले से आपूत में रुकावट पड़ने और दूसरी मुद्राओं की तुलना में डॉलर में गिरावट आने से कच्चे तेल की कीमत में वृद्धि हुई थी।

इस बीच न्यू यॉर्क टाइम्स ने खबर दी है कि ओपेक देशों में दूसरे सबसे बड़े तेल उत्पादक ईरान द्वारा किए जा रहे यूरेनियम संवर्द्धन को रोकने के लिए इस्राइल की ओर से अमेरिका और यूरोप पर दबाव डाला जा रहा है।

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First Published - June 23, 2008 | 11:04 PM IST

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