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तीन महीने में 45 फीसदी तक गिर गया कच्चा तेल

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Last Updated- December 07, 2022 | 11:42 PM IST

एशियाई बाजार में शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमत साल भर में पहली बार 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चली गयी।


एशियाई बाजार में शुक्रवार को लंदन ब्रेंट क्रूड तेल का नवंबर अनुबंध 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे चला गया। इससे पहले सितंबर 2007 में कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गयी थी।

लंदन में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत शुक्रवार को 3.47 डॉलर घटकर 79.19 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गयी। लंदन में कल यही अनुबंध 1.70 डॉलर गिरकर 82.66 डॉलर प्रति बैरल तक चला गया था। उधर न्यू यॉर्क का मुख्य सौदा लाइट स्वीट क्रूड तेल का नवंबर अनुबंध भी 3.59 डॉलर घटकर 83 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

एक समय तो इसने 81.13 डॉलर के स्तर को छू लिया था जो अक्टूबर 2007 के बाद का न्यूनतम स्तर है। इस तरह जुलाई से अब तक कच्चे तेल की कीमत में करीब 45 फीसदी की कमी हो चुकी है।

गौरतलब है कि वैश्विक वित्तीय संकट के मद्देनजर मांग कमजोर पड़ने की आशंकाओं की वजह से 11 जुलाई 2008 को 147 डॉलर प्रति बैरल की रेकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद तेल की वैश्विक कीमतों में लगातार गिरावट जारी है। ब्रेंट नॉर्थ सी क्रूड 3.58 डॉलर कम होकर 79.08 डॉलर प्रति बैरल तक चली गयी।

विश्लेषकों के अनुसार, इस समय पूरी दुनिया के बाजार आर्थिक मंदी की चपेट में आ चुके हैं और इस बात को लेकर लगभग सहमति है कि यह मंदी लंबे समय तक कच्चे तेल की मांग को प्रभावित करेगी।

समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग के मुताबिक 2004 से एक दिन में कच्चे तेल में आयी यह सबसे अधिक कमी है। न्यू यॉर्क में कच्चा तेल साल भर के न्यूनतम स्तर तक चला गया जबकि तांबा पिछले ढाई साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। एमएससीआई वर्ल्ड इक्विटि इंडेक्स के लिए मौजूदा हफ्ता 1970 के बाद सबसे मनहूस साबित हुआ है।

सोना इस समय 11 हफ्तों के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। जानकारों के अनुसार इस समय कमोडिटी बाजार पूरी तरह वित्तीय बाजार के असर में आकर नीचे खिसकता जा रहा है। उनका स्पष्ट मानना है कि कच्चे तेल की कीमतें तब तक नहीं उठेगी जब तक कि शेयर बाजार में बिकवाली का दौर नहीं थमता।

सिंगापुर में हडसन कैपिटल एनर्जी के निदेशक जोनाथन कॉर्नाफेल ने बताया कि इस समय कोई भी सोने को छोड़कर कहीं भी निवेश करना नहीं चाहता। उनके मुताबिक संकट के इस दौर में जिसके पास जो कुछ भी है वह बेच रहा है और इतने बड़े संकट की मुख्य वजह यही है।

हालत यह है कि साख वाली कंपनियों के शेयर भी ऐसे बिक रहे हैं मानो साधारण और विशिष्ट कंपनियों में कोई फर्क ही नहीं है। इस बीच दुनिया के 28 देशों की ऊर्जा सलाहकार अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने अपने मासिक अनुमान में कहा है कि अगले साल दुनिया की कुल तेल मांग में तकरीबन 0.5 फीसदी की कमी होगी।

आईईए के मुताबिक, कच्चे तेल की मांग 4.4 लाख बैरल कम होकर तकरीबन 8.72 करोड़ बैरल प्रतिदिन रह जाएगी। अमेरिका में पिछले महीने भर में कच्चे तेल की मांग 1.87 करोड़ प्रति बैरल प्रतिदिन रह गयी है जो जून 1999 से सबसे कम है।

इस साल की शुरुआत में अमेरिका की तेल मांग इससे करीब 8.6 फीसदी ज्यादा थी। इस बीच कल ओपेक ने संकेत दिए हैं कि 18 नवंबर को बुलाई गई आपात बैठक में कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती कर सकती है।

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First Published - October 10, 2008 | 11:06 PM IST

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