RBI MPC Rate Cut: केंद्रीय बजट 2027 से ठीक पहले सरकार ने 29 जनवरी को आर्थिक सर्वे 2026 संसद में पेश किया। मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सर्वे सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं कहता, बल्कि उस दौर में भारत की स्थिति को सामने रखता है जब दुनिया भूराजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में बदलाव और नई वैश्विक व्यवस्था के दौर से गुजर रही है।
आर्थिक सर्वे के मुताबिक, 2026 में दुनिया की हालत सबसे बेहतर तब मानी जाएगी, अगर हालात 2025 जैसे ही बने रहें। यानी वैश्विक स्तर पर किसी बड़ी राहत की उम्मीद फिलहाल कम है। ऐसे माहौल में भारत के लिए FY27 खुद को ढालने का साल होगा, जहां कंपनियां और आम लोग GST में बदलाव, तेज डीरिगुलेशन और कानूनी प्रक्रियाओं को आसान करने के असर को महसूस करेंगे।
सर्वे साफ चेतावनी देता है कि हालात अभी भी नाजुक हैं। भारत को एक लंबे समय तक वैश्विक तनाव और टकराव के लिए तैयार रहना होगा। बदलती वैश्विक राजनीति और आर्थिक हालात आने वाले वर्षों में फैसलों को और मुश्किल बना सकते हैं।
आर्थिक सर्वे ने भारत की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सेक्टर्स को तीन स्तरों में देखा है। कुछ सेक्टर ऐसे हैं, जहां जोखिम सबसे ज्यादा और रणनीतिक जरूरत सबसे अहम है। इनमें रक्षा से जुड़े सिस्टम, बुनियादी ढांचे के जरूरी इनपुट, ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य से जुड़ी अहम चीजें और बुनियादी औद्योगिक तकनीकें शामिल हैं।
कुछ सेक्टर ऐसे भी हैं, जहां भारत में उत्पादन आर्थिक रूप से संभव है, लेकिन इसके बावजूद आयात पर निर्भरता बनी हुई है। सर्वे के मुताबिक, क्रेन्स, इंडस्ट्रियल मशीनरी, इलेक्ट्रिक व्हीकल ड्राइवट्रेन और गैर-जरूरी मेडिकल डिवाइस ऐसे ही क्षेत्र हैं, जहां भारत को आत्मनिर्भर बनने की जरूरत है।
वहीं कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं, जहां घरेलू विकल्प महंगे हैं या रणनीतिक जरूरत कम है। इनमें रेल सिग्नलिंग, डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रोलाइजर जैसे सेक्टर शामिल हैं, जहां जल्दबाजी की जरूरत नहीं मानी गई है।
मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि आने वाला बजट हकीकत पर आधारित लेकिन सोच में बड़ा होगा। रिपोर्ट कहती है कि मौजूदा वैश्विक हालात में ‘स्वदेशी’ सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है।
आर्थिक सर्वे के संकेतों के मुताबिक, सरकार का ध्यान एक तरफ पुराने और मजबूत क्षेत्रों पर रहेगा, जैसे दवा उद्योग, कपड़ा, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा। वहीं दूसरी तरफ नए और रणनीतिक रूप से अहम क्षेत्रों पर भी फोकस रहेगा, जैसे रक्षा, जहाज बनाने का काम, इलेक्ट्रॉनिक्स और जरूरी खनिज।
वैश्विक मोर्चे पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को 3.50 से 3.75 फीसदी पर स्थिर रखा है। लगातार तीन बार कटौती के बाद यह ठहराव साफ करता है कि फेड अब महंगाई और रोजगार के ठोस संकेत का इंतजार करना चाहता है। बाजार अब भी इस साल अमेरिका में दो बार 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की संभावना देख रहा है, लेकिन भरोसा कमजोर हुआ है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत दिख रही है, जिससे फेड जल्दबाजी के मूड में नहीं है।
मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, भारत में RBI फरवरी 2026 में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है। वजह यह है कि FY26 की दूसरी छमाही में ग्रोथ की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है, भले ही महंगाई नियंत्रण में बनी रहे।