जिंदगी की अधूरी दास्तान
एक आत्मकथा के रूप में आडवाणी की किताब उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती है। फिलहाल देश के सबसे वरिष्ठ राजनेता लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी आत्मकथा में 60 साल से भी ज्यादा के अपने सार्वजनिक जीवन (राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ, जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी) के बारे में बहुत कुछ लिखा है। लेकिन उन्होंने कराची […]
आसमान छू रही है सीए की डिमांड
देसी कॉरपोरेट सेक्टर में पिछले कुछ साल से चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की डिमांड तेजी से बढ़ी है। इसी बढ़ती हुई मांग को देखते हुए इंस्टीटयूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ने अपने छात्रों की तादाद को बढ़ाने का फैसला किया है। पिछले साल इसने रिकॉर्ड 1.25 लाख छात्रों को लिया था। इस साल तो मई और […]
बाध्यता हो पूरी, तभी मिलेगी बैंक गारंटी से छूट
हमें अपने उस सामान का रीइम्पोर्ट करवाना पड़ा, जिसे हमने एक्सपोर्ट किया था। इस बाबत हमने 14 नंवबर, 1995 को जारी हुए नोटिफिकेशन नंबर 15895 के तहत क्लीयरेंस मांगा था। हमने 17 अगस्त 2007 को बिल ऑफ इंट्री दायर की थी, लेकिन कस्टम विभाग को उस सामान के एग्जमिनेशन में थोड़ा वक्त लग गया। उन्होंने […]
पंजाब में टेक्सटाइल यूनिटों की चमक फीकी पड़ी
पंजाब में कपड़ा उद्योग की चमक फीकी पड़ती जा रही है। इस क्षेत्र की कंपनियों को कभी पंजाब का गौरव कहा जाता था, लेकिन अब इनकी हालत खस्ता है। तकनीकी रूप से पिछड़ने और नई-नई चीजों को नहीं अपनाने की वजह से कई टेक्सटाइल यूनिटें कंपनियां बंद भी हो चुकी हैं। लघु और छोटे व्यवसाय […]
आरबीआई का प्रस्ताव, बैंकों की मुसीबत
बैंकों के लिए मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले तो उन पर बजट में 60 हजार करोड़ रुपये का बोझ डाला गया और अब रिजर्व बैंक के नए दिशानिर्देशों की वजह से उन्हें 800 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े सकते हैं। दरअसल, रिजर्व बैंक ने कर्ज वसूली के नियमों फेरबदल करने […]
ओबीसी कोटे पर कोर्ट की मुहर
यह बात अब साफ हो गई है कि केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के विद्यार्थियों के लिए 27 फीसदी सीटों का आरक्षित किया जाना संविधान की मूल भावना के साथ किसी तरह का खिलवाड़ नहीं है। इन संस्थानों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए पहले […]
‘सच्चे न्याय’ की आस में अपील पर अपील
अदालती मुकदमेबाजी में फंसे किसी शख्स को दो चुनौतियों से दो-चार होना पड़ता है। पहली चुनौती मुकदमे की सुनवाई के बार-बार टलने यानी तारीख पर तारीख पड़ने से है। उनकी दूसरी चुनौती का सरोकार बार-बार अपील से संबधित है, जिसका सिलसिला सुप्रीम कोर्ट तक चलता है। यदि बात सिर्फ एक अपील तक सीमित हो, तो […]
रिजर्व बैंक पर ‘नकेल’ सही नहीं
वित्तीय क्षेत्र में सुधारों पर बनी रघुराम राजन कमिटी की रिपोर्ट वेबसाइट पर पहुंच चुकी है और इस पर टिप्पणियां भी मांगी गई हैं। मैं इस न्योते को डरते हुए स्वीकार कर रहा हूं। पिछले साल जब युवा पर्सी मिस्त्री ने अपनी रिपोर्ट ‘मुंबई : एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेंटर’ पर मुझे एक कॉलम लिखने को […]
यस बैंक: प्रावधानों में शूल
यस बैंक का प्रावधान और आकस्मिक कोष मार्च 2008 में समाप्त हुई तिमाही में 22.8 करोड़ रुपये था, जो वर्तमान वर्ष के पहले नौ महीने के लिए इसी मद के 20.8 करोड़ रुपये के से कहीं अधिक है। प्रबंधन का मानना है कि विवेकपूर्ण उपायों के रूप में ” जनरल क्रेडिट प्रोविजन” यानी साधारण ऋण […]
सही मूल्य निर्धारण बदल सकता है आईपीओ बाजार
पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) प्राथमिक बाजार में सुधार लाने की तैयारी में है ताकि निवेशकों को लाभ हो और आईपीओ बाजार के प्रति उनका विश्वास फिर से लौट सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नव जागरण तभी संभव है जब पब्लिक इश्यू के मूल्य आकर्षक हों और सेकंडरी बाजार […]
