facebookmetapixel
Advertisement
होर्मुज स्ट्रेट के पास टैंकर पर हमला: 3 भारतीय लापता, भारत ने जताई कड़ी आपत्तितृणमूल और कांग्रेस के विलय की संभावना का खंडन, ममता बनर्जी की TMC में उथल-पुथलस्वप्न दासगुप्ता बने पश्चिम बंगाल के नए वित्त मंत्री, तापस रॉय को मिला उद्योग एवं वाणिज्य विभागEditorial: प्राथमिकता ऋण ढांचे की हो समीक्षानए किस्म के पर्यावरणवाद की आवश्यकता, क्यों टिकाऊ विकास की शुरुआत समावेशिता से होनी चाहिए?मितव्ययिता सही पर उससे ज्यादा असरदार होंगे सुधार, 10 गुना से ज्यादा बचत संभवफंडों के आला कर्मियों के वेतन खुलासे पर नरमी; अब नाम नहीं, कुल सैलरी बताएंगी AMCनिचले स्तर के बाद भी RIL से उम्मीद, मेटा डील व एजीएम से जुड़ी उम्मीदों के चलते विश्लेषक पॉजिटिवमई में इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश 40% घटा, SIP बना मजबूत सहाराडाकघर बनेगा आपका दफ्तर, ई-कॉमर्स डिलीवरी से लेकर रियल एस्टेट तक फोकस

US-Iran War: ईरान से डील फेल! 21 घंटे की बातचीत बेनतीजा, खाली हाथ लौटे वेंस; क्या अब बढ़ेगा युद्ध का खतरा?

Advertisement

अमेरिका-ईरान वार्ता बिना समझौते खत्म, होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु मुद्दे पर टकराव बरकरार

Last Updated- April 12, 2026 | 8:34 AM IST
U.S. Vice President JD Vance speaks during a news conference after meeting with representatives from Pakistan and Iran as Jared Kushner and Steve Witkoff, Special Envoy for Peace Missions, listen, on Sunday, April 12, 2026, in Islamabad, Pakistan.. Jacquelyn Martin/Pool via REUTERS
JD Vance इस्लामाबाद में पाकिस्तान और ईरान के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, जबकि Jared Kushner और Steve Witkoff साथ में मौजूद रहे (फोटो - रॉयटर्स)

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई अहम बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने रविवार को कहा कि करीब 21 घंटे चली बातचीत के बाद भी दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई, जिसके बाद अमेरिकी टीम पाकिस्तान से वापस लौट रही है।

वेंस ने साफ कहा कि बातचीत में कई कमियां रहीं और ईरान ने अमेरिका की शर्तें मानने से इनकार कर दिया। अमेरिका की प्रमुख मांगों में यह शामिल था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे न बढ़े।

वेंस ने कहा, “समझौता न होना ज्यादा नुकसान ईरान के लिए है, अमेरिका के लिए नहीं। हमने अपनी शर्तें साफ कर दी थीं।” उन्होंने यह भी बताया कि बातचीत के दौरान उनकी Donald Trump से कई बार बात हुई।

यह बैठक कई मायनों में बेहद अहम मानी जा रही थी। एक दशक से ज्यादा समय बाद अमेरिका और ईरान के बीच यह पहली सीधी बातचीत थी और 1979 Islamic Revolution के बाद सबसे उच्च स्तर की चर्चा भी।

इस बातचीत का असर मौजूदा तनाव और दो हफ्ते पुराने संघर्षविराम पर भी पड़ सकता है। साथ ही, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है, अब भी बंद है। इस वजह से वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आया है और संघर्ष में हजारों लोगों की जान जा चुकी है।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत का पहला दौर खत्म हो गया है। ईरान सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि तकनीकी मुद्दों पर आगे चर्चा के लिए दोनों पक्षों के विशेषज्ञ अब दस्तावेजों का आदान-प्रदान करेंगे।

ईरान ने यह भी साफ किया कि कुछ मतभेद अभी बाकी हैं, लेकिन इसके बावजूद बातचीत जारी रहेगी। हालांकि अगली बैठक कब होगी, इस पर कोई जानकारी नहीं दी गई है।

सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance, विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner ने ईरान के संसदीय स्पीकर Mohammad Baqer Qalibaf और विदेश मंत्री Abbas Araqchi से करीब दो घंटे तक बातचीत की। यह बैठक पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को शोक में काले कपड़ों में पहुंचा। यह शोक हाल ही में युद्ध में मारे गए नेताओं और नागरिकों के लिए था, जिनमें पूर्व सुप्रीम लीडर Ali Khamenei भी शामिल बताए गए। ईरान सरकार का कहना है कि अमेरिकी हमले में एक स्कूल के पास कई छात्र भी मारे गए थे। हालांकि Pentagon ने इस हमले की जांच की बात कही है और शुरुआती रिपोर्ट में अमेरिकी जिम्मेदारी की आशंका जताई गई है।

पाकिस्तानी सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान माहौल कई बार बदला। कभी सहमति बनी तो कभी तनाव बढ़ गया।

इस बीच, Islamabad में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। पूरे शहर में हजारों सुरक्षाकर्मी और सेना के जवान तैनात रहे।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

मध्य पूर्व में तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सीजफायर बातचीत का सबसे अहम मुद्दा बन गया है। बातचीत शुरू होते ही अमेरिकी सेना ने कहा कि वह इस अहम समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाने की तैयारी कर रही है। अमेरिका के अनुसार उसके दो युद्धपोत इस होर्मुज से गुजर चुके हैं और यहां बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। हालांकि ईरान के सरकारी मीडिया ने इस दावे को खारिज किया है।

बातचीत से पहले एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि अमेरिका ने कतर और अन्य विदेशी बैंकों में फंसी ईरान की संपत्तियों को छोड़ने पर सहमति जताई है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने इसे सिरे से नकार दिया।

ईरान की मांगें भी काफी सख्त बताई जा रही हैं। तेहरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण चाहता है, युद्ध के लिए मुआवजा मांग रहा है और पूरे क्षेत्र में, खासकर लेबनान में, युद्धविराम की शर्त रख रहा है। इसके अलावा ईरान इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट शुल्क वसूलने की भी मांग कर रहा है।

वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump का रुख भी समय के साथ बदलता दिख रहा है, लेकिन उनकी प्राथमिकता साफ है कि इस होर्मुज से वैश्विक जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट जारी रहे और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को इस स्तर तक कमजोर किया जाए कि वह परमाणु हथियार न बना सके।

इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका का सहयोगी इजरायल भी सक्रिय है। Israel ने फरवरी में ईरान पर हमलों में साथ दिया था और अब वह लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह पर हमले कर रहा है। इजरायल का कहना है कि लेबनान में चल रही कार्रवाई इस सीजफायर बातचीत का हिस्सा नहीं है।

Advertisement
First Published - April 12, 2026 | 8:34 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement