इस परियोजना से जुड़े बीएआरसी के एक पूर्व अधिकारी सुरेश जी भागवत ने कहा, ै मौजूदा समय में हम धान की ह्वाईट पोन्नी और एडीटी 47 किस्मों को लेकर और बौनी किस्म को विकसित कर रहे हैं ताकि बालिया लगने के बाद फसल लेटे नहीं। हम दोनों प्रजातियों पर एक साथ काम कर रहे हैं। ै
इस परियोजना का वित्तपोषण परमाणु उर्जा विभाग के तहत आने वाले बोर्ड आफ रिसर्च इन न्यूक्लियर साइंस के द्वारा किया जा रहा है और शोध की अवधि तीन वर्ष होने की उम्मीद है।
उन्होंने बीएआरसी के एक समारोह के मौके पर कहा, ै नयी प्रजति की उपज
20 प्रतिशत से 30 प्रतिशत उंची रहने की उम्मीद है। ै