देश में महंगाई एक बार फिर धीरे-धीरे सिर उठाती नजर आ रही है। फरवरी 2026 में खुदरा महंगाई यानी सीपीआई (CPI) बढ़कर 3.21% हो गई है, जबकि जनवरी में यह 2.75% थी। एसबीआई की इकोरैप और Yes Bank की ताजा रिपोर्टें बताती हैं कि फिलहाल महंगाई नियंत्रण में दिख रही है, लेकिन कई घरेलू और वैश्विक फैक्टर्स ऐसे हैं जो आने वाले महीनों में कीमतों पर दबाव बढ़ा सकते हैं।
Yes Bank के अनुसार फरवरी में महंगाई सालाना आधार पर 3.2% रही, जो उनके अनुमान 3.3% से थोड़ा कम है। हालांकि मासिक आधार पर कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी हुई है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों और खाद्य कीमतों के रुझान को देखते हुए आगे जोखिम बने हुए हैं।
महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह इस बार खाने-पीने की चीजें बनी हैं। फरवरी में खाद्य महंगाई बढ़कर लगभग 3.5% हो गई, जबकि जनवरी में यह करीब 2.1% थी। गांवों में तो महंगाई लगभग पूरी तरह खाद्य वस्तुओं के महंगे होने से बढ़ी है। Yes Bank की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में कई सब्जियों और कृषि उत्पादों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई। टमाटर करीब 45%, फूलगोभी लगभग 44% और खोपरा करीब 46% महंगा हो गया। हालांकि कुछ चीजों में राहत भी मिली। लहसुन, प्याज और आलू की कीमतों में सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई।
शहरों में स्थिति थोड़ी अलग है। यहां खाने-पीने की चीजों के साथ पान, तंबाकू और दूसरी रोजमर्रा की चीजों के महंगे होने से भी महंगाई बढ़ी है।
खाद्य और ईंधन जैसी चीजों को हटाकर देखी जाने वाली कोर महंगाई फरवरी में करीब 3.4% पर बनी रही। लेकिन इसके अंदर कुछ चीजों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। Yes Bank की रिपोर्ट के मुताबिक पर्सनल केयर और अन्य सेवाओं से जुड़ी वस्तुओं की महंगाई करीब 19.7% तक पहुंच गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी है। फरवरी में चांदी के आभूषणों की कीमतें 160% से ज्यादा बढ़ गईं, जबकि सोना, हीरा और प्लैटिनम जैसे अन्य कीमती धातुओं के आभूषण करीब 48% महंगे हुए। वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर फिर से सोना और चांदी खरीदने लगे हैं, जिससे इनकी कीमतें बढ़ रही हैं।
देश के स्तर पर कोर महंगाई में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं दिख रही है, लेकिन राज्यों में इसकी स्थिति अलग-अलग है। एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक तेलंगाना में कोर महंगाई 6% से ऊपर पहुंच गई है। कई राज्यों में कोर महंगाई, कुल महंगाई दर से भी ज्यादा है। हालांकि केरल, पश्चिम बंगाल, पंजाब और महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों में महंगाई की स्थिति अभी अपेक्षाकृत संतुलित बनी हुई है।
महंगाई के लिए सबसे बड़ा जोखिम वैश्विक ऊर्जा बाजार से आ रहा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। Yes Bank का अनुमान है कि अगर कच्चे तेल की कीमत 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ती है, तो इससे थोक महंगाई दर में लगभग 100 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर धीरे-धीरे खुदरा महंगाई पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा रुपये की कमजोरी भी महंगाई के लिए चिंता बढ़ा रही है। आरबीआई के अध्ययन के अनुसार रुपये में 5% गिरावट से खुदरा महंगाई लगभग 35 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ सकती है।
Also Read | विदेश में संकट, भारत में राहत! प्रवासी भारतीय भेज रहे ज्यादा पैसा
महंगाई के लिए एक और संभावित खतरा मौसम से जुड़ा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 में एल-नीनो बनने की संभावना बढ़ रही है। एल-नीनो का असर भारतीय मानसून पर पड़ता है। अगर बारिश सामान्य से कम हुई तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है और खाद्य महंगाई पर फिर से दबाव बढ़ सकता है।
नई सीपीआई श्रृंखला में आवास, बिजली और ईंधन को एक संयुक्त श्रेणी में रखा गया है, जिसका वजन करीब 17.6% है। फरवरी में इस श्रेणी की महंगाई लगभग 1.5% रही। किराए और मकान के रख-रखाव पर खर्च में मामूली बढ़ोतरी दर्ज हुई, जबकि एलपीजी और पाइप्ड गैस की कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई। कोयले की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी हुई, जबकि जलाऊ लकड़ी की कीमतों में थोड़ी कमी दर्ज की गई।
Yes Bank का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में औसत खुदरा महंगाई लगभग 3.7% से 4% के बीच रह सकती है। हालांकि अगर पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा चलता है और तेल कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो महंगाई में 35 से 50 बेसिस प्वाइंट तक अतिरिक्त बढ़ोतरी का जोखिम है। इन अनिश्चितताओं को देखते हुए बैंक का मानना है कि आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव से बच सकता है और कुछ समय तक नीतिगत दरों में विराम बनाए रख सकता है।
कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि महंगाई फिलहाल नियंत्रण में जरूर दिख रही है, लेकिन इसके पीछे कई जोखिम छिपे हुए हैं। खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक ऊर्जा संकट, कमजोर रुपया और संभावित एल-नीनो, ये सभी कारक मिलकर आने वाले महीनों में महंगाई के नए दबाव पैदा कर सकते हैं।