facebookmetapixel
हाइपरसर्विस के असर से ओला इलेक्ट्रिक की मांग और बाजार हिस्सेदारी में तेजी, दिसंबर में 9,020 स्कूटरों का हुआ रजिस्ट्रेशनदिसंबर 2025 में इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में उछाल, TVS टॉप पर; बजाज–एथर के बीच मुकाबला तेजव्हीकल रजिस्ट्रेशन में नया रिकॉर्ड: 2025 में 2.8 करोड़ के पार बिक्री, EVs और SUV की दमदार रफ्तारEditorial: गिग कर्मियों की हड़ताल ने क्यों क्विक कॉमर्स के बिजनेस मॉडल पर खड़े किए बड़े सवालभारत का झींगा उद्योग ट्रंप शुल्क की चुनौती को बेअसर करने को तैयारभारत में राज्यों के बीच निवेश की खाई के पीछे सिर्फ गरीबी नहीं, इससे कहीं गहरे कारणमनरेगा की जगह आए ‘वीबी-जी राम जी’ पर सियासी घमासान, 2026 में भी जारी रहने के आसारबिना बिल के घर में कितना सोना रखना है कानूनी? शादी, विरासत और गिफ्ट में मिले गोल्ड पर टैक्स के नियम समझेंMotilal Oswal 2026 Stock Picks| Stocks to Buy in 2026| मोतीलाल ओसवाल टॉप पिक्सNew Year 2026: 1 जनवरी से लागू होंगे 10 नए नियम, आपकी जेब पर होगा असर

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद बदला देश का सुरक्षा सिद्धांत, अब सीधे वार के लिए भारत तैयार

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक नए राष्ट्रीय सुरक्षा सिद्धांत का ऐलान किया। इसके तहत भविष्य में किसी भी आतंकी हमले को भारत के खिलाफ युद्ध माना जाएगा

Last Updated- December 30, 2025 | 10:56 PM IST
Operation Sindoor

यूरोप की एक वैचारिक संस्था के विश्लेषक ने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव के कुछ दिनों बाद अहम सवाल उठा दिया। उन्होंने स्पष्ट और सपाट लहजे में पूछा, ‘नीतिगत निर्णय लेने वाले काबिल लोगों ने हमें पिछले साल बताया था कि दक्षिण एशिया, जो ऐतिहासिक रूप से टकराव के लिए जाना जाता रहा है, वह अब यूरोप की तुलना में अधिक स्थिर हो गया है। यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद लंबी शांति यूक्रेन युद्ध के साथ भंग हो गई। मेरी दिलचस्पी इस बात में है कि अब वे दक्षिण एशिया के हालात का आकलन किस तरह कर रहे हैं।’

उस विश्लेषक की टिप्पणी इस बात पर अधिक केंद्रित थी कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (जो 7 मई को तड़के शुरू हुआ और 10 मई की शाम को थमा) ने असाधारण रूप से भारत और पाकिस्तान संबंधों को लेकर लंबे समय से चली आ रही धारणा को पलट दिया था। यह धारणा दोनों देशों के बीच हुए चार युद्धों के परिवेश में तैयार हुई थी। एक युद्ध दोनों देशों द्वारा परमाणु हथियार क्षमता हासिल करने के बाद लड़ा गया था।

धुंधली होती सीमाएं

रक्षा से जुड़े एक सूत्र ने दोनों देशों के टकराव के दूसरे दिन कहा था,‘पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा की मर्यादा लांघी है।’ सूत्र ने कहा कि पाकिस्तान ने बड़े पैमाने पर भारत में असफल ड्रोन हमले किए हैं। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकी हमले (जिसमें 26 लोग मारे गए थे) के जवाब में भारत के सशस्त्र बलों ने 7 मई को पाकिस्तान एवं उसके कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर इलाके में आतंकियों के 9 ठिकानों पर सटीक हमले किए।

सरकार ने कहा कि ये हमले ‘सीमित, सुनियोजित और आतंकवादियों को सबक सिखाने’ के लिए थे और उसका दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है। मगर पाकिस्तान ने भारतीय नागरिक और सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमले शुरू कर दिए और अगले कुछ दिनों तक पश्चिमी सीमा (गुजरात में कच्छ से लेकर श्रीनगर और जम्मू- कश्मीर में अवंतीपुर तक) को निशाना बनाया।

पाकिस्तान अपने मंसूबे में पूरी तरह विफल रहा मगर उसने हमलों से कश्मीर की सीमा लांघ कर देश के दूसरे हिस्सों को चोट पहुंचाने की कोशिश की। ये हमले इस बार पाकिस्तान के सशस्त्र बलों द्वारा किए गए थे न कि उसके समर्थित आतंकियों द्वारा। भारत ने भी 1971 की लड़ाई के बाद पहली बार पाकिस्तान के पंजाब प्रांत को निशाना बनाया।

नया सिद्धांत

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक नए राष्ट्रीय सुरक्षा सिद्धांत का ऐलान किया। इसके तहत भविष्य में किसी भी आतंकी हमले को भारत के खिलाफ युद्ध माना जाएगा। इस सिद्धांत का घोषित उद्देश्य ‘आतंकवादियों और उनके समर्थक देशों के बीच झूठे अंतर’ को खत्म करना है। यह बात 7, 8 और 9 मई को भारत के शहरों और सैन्य ठिकानों पर पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइल के विफल हमलों के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई में भी साफ दिख चुकी थी।

भारतीय सशस्त्र बलों ने 9 और 10 मई की दरमियानी रात में पाकिस्तान के 11 एयरबेस को निशाना बनाया। भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को पाकिस्तान की सोची समझी नीति के तहत इस्तेमाल किए जा रहे आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के रूप में भी परिभाषित किया। इसका संदेश स्पष्ट था कि अब आतंकी हमले रोकने के उपाय के बजाय सीधे उन पर और उनके समर्थकों पर चोट की जाएगी।

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में अध्ययन एवं विदेश नीति के उपाध्यक्ष हर्ष वी पंत का कहना है कि वर्ष 2014 से सरकार ने पाकिस्तान के साथ संबंध बहाली की शर्तें बदल दी हैं। पंत ने कहा कि दक्षिण एशिया में परमाणु स्थायित्व की बात छोड़ दें तो भारत और पाकिस्तान के संबंधों में आतंकवाद की दखल रही है जिससे सीमा पर हालात भी लगातार तनावपूर्ण रहे हैं। उन्होंने 2016 में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ और 2019 के बालाकोट हवाई हमले को भारत की एक सोची-समझी नीति बताई।

वह भारत के नए सिद्धांत को इसी निरंतरता के हिस्से के रूप में देखते हैं। पंत के अनुसार यह भारत की नीति में कोई व्यापक बदलाव तो नहीं है मगर यह सरकार की एक बदली एवं स्पष्ट सोच को दर्शाता है। पंत कहते हैं, ‘पाकिस्तान के लिए आतंकवाद फैलाना अब महंगा सौदा हो गया है। नए सिद्धांत के ठोस क्रियान्वयन के लिए भारत को उन्नत खुफिया, निगरानी और टोही क्षमताओं को और धार देनी होगी। अगर इससे भी आतंकवादी गतिविधियां जारी रहती हैं तो भारत को अपनी शर्तों पर आगे कदम बढ़ाने के लिए तैयार रहना चाहिए।’

नई युद्ध कला

‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारतीय उपमहाद्वीप में बड़े पैमाने पर तेज तर्रार और बिना एक दूसरे की सीमा में घुसे हमलों को अंजाम देने के युद्ध कौशल का सनसनीखेज ढंग से आगाज हुआ है। इसमें जमीन पर सैनिकों के आपस में टकराने के बजाय दूर से ही ड्रोन, मिसाइलों और हवाई हमलों का बढ़ता इस्तेमाल सामने आया है।

वर्ष 2016 और 2019 के टकराव से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ इस मायने में अलग रहा कि इसमें कम से कम तीन हथियारों का पहली बार इस्तेमाल हुआ। इनमें भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ ब्रह्मोस और यूरोपीय स्कैल्प क्रूज मिसाइलों का उपयोग और पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ फतह-1 और फतह-2 जैसे कम दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल शामिल हैं। इनके अलावा दोनों देशों ने एक दूसरे पर ड्रोन हमले भी किए। सैन्य टकराव और इनमें इस्तेमाल हुए हथियार युद्ध से जुड़े पहलुओं को प्रभावित करने लगे हैं।

उदाहरण के लिए रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत के लिए गुणवत्ता और मात्रा दोनों में एक ड्रोन महाशक्ति बनने की जरूरत आन पड़ी है। यह मौजूदा क्षमता से आगे की ओर एक बड़ी छलांग होगी। फिलहाल कुछ कंपनियां ही सैन्य स्तर के ड्रोन का उत्पादन करने में सक्षम हैं।

दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव थमने के तीन महीने बाद प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने अभिभाषण में ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत भारत की नियोजित रक्षा ढाल प्रणाली के शुभारंभ की घोषणा की। रक्षा विशेषज्ञों को उम्मीद है कि व्यापक रूप से यह प्रणाली वायु और मिसाइल रक्षा छत्र के रूप में कार्य करेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने वादा किया कि 2035 तक देश की राष्ट्रीय सुरक्षा ढाल का विस्तार, सुदृढ़ीकरण और आधुनिकीकरण किया जाएगा जिससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी अहम स्थान (सामरिक और नागरिक दोनों) नई तकनीकी प्लेटफॉर्म के माध्यम से सुरक्षित हैं। उन्होंने यह भी जोर दिया कि इस मिशन के साथ-साथ भविष्य के युद्धकला परिदृश्यों का आकलन करने और ‘प्लस-वन’ सामरिक प्रतिक्रिया तैयार करने के लिए एक तंत्र स्थापित किया जाएगा।

एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत्त) एवं एरोस्पेस पावर ऐंड स्ट्रैटजिक स्टडीज सेंटर के महानिदेशक अनिल गोलानी कहते हैं कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पहला ऐसा उदाहरण है जिसमें थल सेना, नौ सेना और वायु सेना के प्रमुखों ने संयुक्त रूप से संचालन की योजना बनाई।

गोलानी कहते हैं, ‘प्रचलित धारणा के विपरीत थिएटर कमान स्थापित करना सरकार का स्पष्ट लक्ष्य नहीं है। शीर्ष स्तर पर संयुक्त योजना के माध्यम से एकीकरण और मिलकर अभियान चलाने की नीति को बढ़ावा देना सरकारी की पहली प्राथमिकता है ताकि तीनों सेवाओं में दोहराव कम किया जा सके। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इस्तेमाल किया गया मॉडल शीर्ष स्तर पर प्रभावी साबित हुआ। अब जरूरी है कि इसे अग्रिम पंक्ति की टुकड़ियों तक इसे पहुंचाया जाए।’

अनिवार्य आत्मनिर्भरता

नए सिद्धांत और युद्ध कौशल के बदलते ढर्रे के बाद नीति निर्धारकों के बीच रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की जरूरत मजबूत करने पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। यह बात प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर दिए अभिभाषण में भी नजर आई जिसमें उन्होंने उल्लेख किया किया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने साबित कर दिया है कि कैसे सामरिक स्वायत्तता और स्वदेशी क्षमताएं (जिनमें भारत में बने हथियार भी शामिल हैं) बाहरी खतरों को धूल चटाने के लिए जरूरी एवं अहम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा विदेशी निर्भरता पर निर्भर नहीं हो सकती है।

प्रधानमंत्री ने खासकर भारतीय नवोन्मेषकों और युवाओं से जेट इंजन विकसित करने का स्पष्ट आह्वान किया जिससे एक लंबे समय से चली आ रही खाई पाटी जा सकेगी। जेट इंजन नहीं रहने से देश में स्वदेशी रक्षा कार्यक्रम बाधित हुए हैं। यह बात भी सभी मानने लगे हैं कि आत्मनिर्भरता कुछ हद तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात के रूप में रक्षा बजटीय आवंटन में गिरावट को पलटने पर निर्भर करेगी।

इसके साथ रक्षा मंत्रालय रक्षा उद्योग में नए अनुबंधों को लेकर स्थिति स्पष्ट करता रहेगा और सभी ठेके समय पर पूरा करना सुनिश्चित किया जाएगा। नवंबर के अंत में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा था कि अगले साल के बजट में नए साजो-सामान एवं हथियारों की खरीदारी के लिए व्यय बढ़ने की संभावना है। रक्षा मंत्रालय अगले वित्त वर्ष के लिए रक्षा आधुनिकीकरण के मोर्चे पर बजट में 20 फीसदी इजाफे की मांग कर रहा है जो पिछले वर्षों में दर्ज 10 फीसदी से दोगुना है।

मंत्रालय वित्त वर्ष 2025 में पांच वर्षों में पहली बार सैन्य आधुनिकीकरण के मद में जारी पूरी रकम इस्तेमाल करने के बाद अधिक आवंटन की मांग करेगा। वित्त वर्ष 2026 के लिए इस मद के तहत लगभग1.49 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं जबकि समग्र रक्षा बजट आवंटन 6.81 लाख करोड़ है।

रक्षा मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025 में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए और वित्त वर्ष 2026 में भी उसी गति से आगे बढ़ रहा है। इस वर्ष अब तक लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये के अनुबंध पहले ही पूरे हो चुके हैं।

रक्षा सचिव ने कहा कि वित्त वर्ष 2025 में लगभग 1.33 लाख करोड़ रुपये के अनुबंध (लगभग 88 फीसदी) घरेलू आपूर्तिकर्ताओं के साथ हुए थे। उन्होंने कहा कि यह रुझान जारी रहेगा और यह अनुपात 75फीसदी के मानक लक्ष्य से नीचे नहीं आएगा। उन्होंने कहा, ‘मानदंडों से इतर बड़े वैश्विक खरीद अपवाद होंगे’।

हालांकि, सचिव ने इस बात को लेकर भी आगाह किया कि अनुबंध पर हस्ताक्षर करने में बढ़ोतरी के साथ रक्षा उद्योग को भी वादे पूरे करने में अधिक जवाबदेही लेनी होगी। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों के लिए आपातकालीन खरीद की 40,000 करोड़ रुपये की छठी किस्त के तहत रक्षा मंत्रालय ने पहले ही फैसला कर लिया है कि समय पर पूरे नहीं होने वाले अनुबंध रोक दिए जाएंगे।

पंत कहते हैं,‘हमारे उत्तरी सीमा से सटे पड़ोसी देश द्वारा पेश चुनौती के अलावा हमारे पास इस बात को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान के साथ तनाव विभिन्न स्तरों तक पहुंचने पर दबाव किस तरह बढ़ाया जाएगा। कुछ क्षमताएं अहम होंगी और हमें संसाधनों की कमी देखते हुए हर चीज में निवेश करने की सनक से बचते हुए उन्हें पहचानने में सावधानी बरतने की आवश्यकता है।’

उन्होंने कहा कि जिस तेजी से युद्ध का स्वरूप बदल रहा है उसे देखते हुए हमें यह मान लेना चाहिए कि दीर्घकालिक, स्थिर आधुनिकीकरण ढांचे की जगह अधिक लचीले ढांचे के लिए गुंजाइश बनानी होगी।

First Published - December 30, 2025 | 10:36 PM IST

संबंधित पोस्ट