facebookmetapixel
Advertisement
चुनावी वादे पूरे करना नवनिर्वाचित सरकारों के लिए साबित होगा भारी-भरकम सिरदर्दEditorial: देश के प्रमुख जलाशयों में तेजी से घट रहा पानी, अधिकतर नदी बेसिन गंभीर जल संकट के कगार परRBI Annual Report: RBI के विदेशी मुद्रा लेन-देन का मुनाफा 52% बढ़ा, कमाया ₹1.69 लाख करोड़ का लाभपश्चिम एशिया युद्ध के कारण बढ़ी घबराहट, देश में यूरिया 10% और DAP की बिक्री में 39% तक की बढ़ोतरीAsian Paints Q4 Results: कंपनी का मुनाफा 69.3% उछला, चौथी तिमाही में कमाए ₹1,172 करोड़IndiGo Q4 Results: कंपनी को Q4 में ₹2,537 करोड़ का भारी घाटा, खर्च में भी 30% की बढ़ोतरीविदेश में भी चलेगा डिजिटल रुपया, सीमा-पार भुगतान के लिए पायलट प्रोजेक्ट लाएगा RBIकुछ ही हफ्तों में होगा भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, अंतिम चर्चा के लिए दिल्ली आ रहा अमेरिकी दल: गोरस्टेडियम शोज और शाही शादियों से चमकी लाइव इवेंट्स इंडस्ट्री, ₹15,000 करोड़ का होगा बाजारShare Market Crash: सेंसेक्स 1092 अंक टूटा, निफ्टी में भारी गिरावट; निवेशकों के ₹6 लाख करोड़ डूबे

स्वरोजगार बढ़ने से भारत के श्रम बाजार में बदलाव

Advertisement

रिपोर्ट के अनुसार भारत का श्रम बाजार बुनियादी ढांचागत बदलाव के दौर से गुजर रहा है। सभी क्षेत्रों में स्वउद्यमिता और उच्च शिक्षा प्राप्ति प्रमुख समर्थक के रूप में उभर रहा है।

Last Updated- November 14, 2023 | 11:06 PM IST
Economic Survey 2024: To make India developed by 2047, industry will have to focus on generating employment Economic Survey 2024: 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए उद्योग जगत को रोजगार पैदा करने पर देना होगा जोर

बढ़ते औपचारिक कर्ज, सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जीवन की आवश्यकताएं पूरी होने और श्रम बल की उद्यमशीलता के कारण स्वरोजगार में बढ़ोतरी हुई है। यह जानकारी एसबीआई की मंगलवार को जारी रिपोर्ट में दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार भारत का श्रम बाजार बुनियादी ढांचागत बदलाव के दौर से गुजर रहा है। सभी क्षेत्रों में स्वउद्यमिता और उच्च शिक्षा प्राप्ति प्रमुख समर्थक के रूप में उभर रहा है।

लिहाजा श्रम बल के आंकड़ों का उल्लेख करने में पुरानी शैली में बदलाव की जरूरत है। सरकार ने भी उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए ऋण मुहैया कराने के कार्यक्रम जैसे मुद्रा योजना और पीएमएसवीए निधि शुरू किए हैं। इससे भारत के श्रम बाजार में ढांचागत बदलाव आ रहा है।

इससे पारिवारिक कारोबार को औपचारिक रूप से ऋण मुहैया होने से उसका आकार बड़ा हुआ। यह इससे भी प्रदर्शित हो रहा है कि घर में रोजमर्रा के काम करने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘सरकार ने लोगों की प्राथमिक जरूरतों जैसे भोजन, आश्रय, चिकित्सा संबंधी जरूरतों को पूरा किया है। सरकार ने 80 करोड़ लोगों को नि:शुल्क राशन मुहैया करवाया है। राज्यों की योजनाओं के अतिरिक्त आवास योजना और आयुष्मान भारत ने लोगों की प्राथमिक जरूरतों को पूरा किया है। लोग कमाई और परिवार के कारोबार में सामंजस्य स्थापित कर रहे हैं।’

बीते महीने जारी नवीनतम आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के मुताबिक स्वरोजगार में इजाफा हुआ है। वित्त वर्ष 18 में स्वरोजगार 52.2 प्रतिशत था और यह वित्त वर्ष 23 में बढ़कर 57.3 प्रतिशत हो गया। इस अवधि में घर के काम में हाथ बंटाने वाले लोगों की संख्या 13.6 फीसदी से बढ़कर 18.3 प्रतिशत हो गई।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘श्रम अर्थशास्त्रियों और अन्य ने यह गलत व्याख्या की है कि रोजगार के अवसर घट रहे हैं। भारत के श्रम बल में स्वरोजगार का रुझान 50 फीसदी से अधिक रहा है और यह एनएसएसओ के 1980 और 1990 से 2000 के दशक के रोजगार व बेरोजगार के सर्वेक्षण में भी उजागर हुआ।’

पीएलएफएस के सर्वेक्षण में उच्च युवा (15-29 आयु वर्ग) में बेरोजगारी को गलत ढंग से दिखाया गया है और इसे रोजगार के घटते अवसर के रूप में दिखाया गया है। हालांकि यह असलियत में रोजगार और शिक्षा के बदलाव के तरीके को प्रदर्शित करता है। पुरुष/महिला 23-24 साल तक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं जबकि यह पहले 17 साल की उम्र तक शिक्षा हासिल करते थे।

Advertisement
First Published - November 14, 2023 | 11:03 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement