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रेरा अधिनियम की समीक्षा से मकान खरीदारों को मिलेगी सुरक्षा

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Last Updated- December 11, 2022 | 8:59 PM IST

अगर मकान खरीदने वाले खरीदारों को पहले की तुलना में एक निर्माणाधीन परियोजना के बारे में और अधिक पता करने के वास्ते ज्यादा मेहनत करने के लिए मजबूर होना पड़ता है तो इसकी एक वजह यह है कि राज्यों ने 2016 रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम या रेरा को कमजोर कर दिया है। नतीजतन डेवलपरों को भी नियमों का उल्लंघन करने की अनुमति मिल जाती है। प्रत्येक राज्य ने नियमों को अलग-अलग तरीके से कमजोर किया है जिसकी वजह से मकान खरीदारों के लिए काम और भी मुश्किल हो गया है।
यही कारण है कि सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय को हर राज्य में रेरा नियमों की विस्तृत जांच करने के लिए कहा था। सभी चालू निर्माण परियोजनाएं जिन्हें कानून के शुरूहोने से पहले पूरा होने का प्रमाणपत्र नहीं मिला था उन्हें रेरा के अंतर्गत आना हैं। इन नियमों को पूरे देश में समान रूप से लागू किया जाना था। लेकिन एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के मुताबिक हरियाणा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सहित सात प्रमुख राज्यों ने इस नियम से छूट दे दी है। उत्तर प्रदेश ने उन चालू परियोजनाओं को बाहर रखा है जिन्होंने ऑक्यूपेंसी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया है या कानून को रेरा के दायरे से अधिसूचित किए जाने से पहले 60 प्रतिशत फ्लैट के लिए आंशिक या पूरे होने होने का प्रमाणपत्र हासिल किया है या बिक्री का ब्योरा हासिल किया है।
हरियाणा ने सभी जारी परियोजनाओं को इसके दायरे से बाहर कर दिया है वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र ने भी उन चालू परियोजनाओं को इसके दायरे से बाहर कर दिया जिनकी इमारत को ऑक्यूपेंसी या पूरा हो जाने का प्रमाणपत्र मिला है। कर्नाटक में भी चल रही परियोजनाएं जिनमें 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है या जिनके पास आंशिक ऑक्यूपेंसी के प्रमाणपत्र हैं वे रेरा नियमों के अधीन नहीं हैं।
एनारॉक के निदेशक और शोध प्रमुख प्रशांत ठाकुर ने कहा, ‘अगर अलग-अलग राज्यों में रेरा के अलग संस्करण हैं तो इससे खरीदारों के दिमाग में भ्रम पैदा होता है जो हर उन राज्य में कई चीजें पता करने के लिए मजबूर होते हैं जहां वे मकान खरीदना चाहते हैं।’ इस अध्ययन से पता चलता है कि प्रमुख राज्यों में केवल गुजरात ने केंद्र द्वारा तैयार किए गए रेरा नियमों का पालन उस तरह से किया जिस मकसद से इसे लागू किया गया था।
विश्लेषकों का कहना है कि इसकी धाराओं ने रेरा को कमजोर बना दिया गया है और डेवलपरों को खरीदारों की सुरक्षा के लिए तैयार किए गए नियमों को दरकिनार करने का मौका मिल गया है। यहां तक कि सजा को भी कम कर दिया गया है। रेरा ने परियोजना लागत का 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगाने और बार-बार अपराध करने पर तीन साल तक की कैद का प्रावधान किया है। उत्तर प्रदेश में कारावास के बदले अधिकतम 10 प्रतिशत जुर्माने का प्रावधान है। हरियाणा में 5 से 10 फीसदी जुर्माना, कर्नाटक में कैद के बदले 10 फीसदी तक का जुर्माना और रेरा के महाराष्ट्र संस्करण में भी जेल की सजा के बदले 5 से 10 फीसदी जुर्माने की बात कही गई है। स्वीकृत योजना में बदलाव के लिहाज से रेरा के मुताबिक आवंटियों में से दो-तिहाई की सहमति जरूरी है। उत्तर प्रदेश में इस उपधारा का जिक्र भी नहीं किया गया है। हरियाणा में, योजना में किसी बदलाव के लिए जरूरी आवंटियों की न्यूनतम संख्या का जिक्र नहीं है।
महाराष्ट्र ने ‘स्वीकृत योजना’ को ही ‘अंतिम स्वीकृत योजना’ में बदल दिया है जिसके तहत दो-तिहाई आवंटियों की सहमति के बिना चल रही परियोजना में किए गए पहले के सभी बदलावों को कानूनी बना दिया है। रेरा के मॉडल बिक्री समझौते में बिक्री के लिए एक लिखित समझौते करने के वक्त खरीदारों से 10 प्रतिशत अग्रिम भुगतान या आवेदन शुल्क लेना तय किया है। इसके अलावा, अगर खरीदारों के घर कब्जा लेने के पांच साल के भीतर कोई संरचनात्मक खामियां होती हैं तो डेवलपर उन गड़बडिय़ों को मुफ्त में ठीक करने के लिए जिम्मेदार होंगे।
गुजरात और मध्य प्रदेश ने इस प्रावधान पर पानी फेर दिया है और कुछ अन्य राज्य इसका जिक्र भी नहीं करते हैं। नाइट फ्रैंक के एक अध्ययन के अनुसार, राजस्थान के नियमों में वर्षों की संख्या को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है जबकि उत्तर प्रदेश ने इसको पूरी तरह से अनदेखा कर दिया है। ठाकुर ने उत्तर प्रदेश के उस आदेश का स्वागत किया है जिसमें कहा गया था कि आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय को इस बात की समीक्षा करनी चाहिए कि राज्यों ने कानून को कैसे कमजोर किया है। ठाकुर ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि शीर्ष अदालत मकान खरीदारों के हितों की रक्षा पर ध्यान दे रहा है और इस तरह के कदमों से रियल एस्टेट क्षेत्र में मकान खरीदारों के भरोसे में सुधार करने में एक लंबा रास्ता तय होगा।’
क्या कहते हैं रेरा के नियम?
उत्तर प्रदेश रेरा अधिनियम में उन चालू परियोजनाओं को बाहर रखा गया है जिन्होंने ऑक्यूपेंसी प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया है या जिन्हें कानून की अधिसूचना से पहले 60 प्रतिशत तैयार फ्लैट के लिए आंशिक पूर्णता प्रमाण पत्र मिला या बिक्री का ब्योरा मिला है। हरियाणा ने सभी चल रही परियोजनाओं को बाहर रखा है और महाराष्ट्र ने उन चालू परियोजनाओं को रेरा से बाहर रखा है अगर किसी इमारत को ऑक्यूपेंसी या पूर्णता प्रमाण पत्र मिल चुका है। कर्नाटक में वैसी जारी परियोजनाएं रेरा के नियमों के अधीन नहीं हैं जिनमें से 60 प्रतिशत का काम पूरा हो चुका है या जिनके पास आंशिक ऑक्यूपेंसी प्रमाण पत्र है।

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First Published - March 1, 2022 | 10:50 PM IST

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