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बिहार में भाजपा का नया युग: सम्राट चौधरी बनेंगे राज्य के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री, नीतीश की लेंगे जगह

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सम्राट चौधरी बिहार के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। वह नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी होंगे, जो भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग और ओबीसी राजनीति का प्रतीक हैं

Last Updated- April 14, 2026 | 10:38 PM IST
Samrat Choudhary
सम्राट चौधरी | फाइल फोटो

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 30 अक्टूबर को एक चुनावी रैली में मुंगेर के तारापुर विधान सभा क्षेत्र के मतदाताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि वे सम्राट चौधरी को भारी बहुमत से चुनें। उन्होंने कहा था, ‘मेरा यकीन कीजिए, मोदीजी (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) सम्राट जी को बड़ा आदमी बनाएंगे।’ सात महीने बाद बुधवार को सुबह 11 बजे, चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। छप्पन वर्षीय सम्राट चौधरी, जनता दल यूनाइटेड के नेता और बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी होंगे। कुमार को पिछले सप्ताह राज्य सभा सदस्य के रूप में शपथ दिलाई गई थी।

सम्राट चौधरी बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पहले मुख्यमंत्री भी होंगे। नवंबर 2025 के अभूतपूर्व चुनावी परिणाम में भाजपा पहली बार बिहार विधान सभा में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी।

सम्राट चौधरी महज नौ साल पहले 2017 में भाजपा में शामिल हुए थे। इससे पहले 2015 के विधान सभा चुनाव में उन्होंने खगड़िया से जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) यानी हम (एस) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, लेकिन वह हार गए थे। उस समय हम, भाजपा-नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का घटक दल था। तब सम्राट चौधरी को राजेश कुमार उर्फ रोहित कुमार के नाम से जाना जाता था।

सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री पद पर आसीन होना इस बात को रेखांकित करता है कि पिछले दशक में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की राजनीति को सामाजिक न्याय के साथ मिलाने में कितनी राजनीतिक समझदारी दिखाई है, खासकर हिंदी पट्टी के राज्यों मसलन बिहार और उत्तर प्रदेश में। सम्राट चौधरी ने अपना राजनीतिक करियर 1999 में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ शुरू किया था।

वर्षों के दौरान उनके पिता शकुनी चौधरी, जिन्होंने भारतीय सेना में 15 साल सेवा देने के बाद 1980 में चुनावी राजनीति में पदार्पण किया, कांग्रेस, राजद, जदयू, समता पार्टी और मांझी-नेतृत्व वाले हम(एस) में रहे और लालू प्रसाद तथा नीतीश कुमार दोनों के करीबी रहे। सम्राट की मां, पार्वती देवी भी पूर्व विधायक हैं। सम्राट स्वयं भी राजद, जदयू और हम (एस) के साथ जुड़े रहे हैं।

बिहार में 2015 विधान सभा चुनावों में नीतीश कुमार-लालू प्रसाद के नेतृत्व वाले महागठबंधन से भारी पराजय के बाद से भाजपा ने एक अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) नेता की तलाश की, जिनमें तारकिशोर प्रसाद भी शामिल थे, जिन्होंने 2020 से 2022 तक राजग सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। दूसरा नाम वर्तमान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का है।

ओबीसी समुदायों में यादव बिहार की जनसंख्या का 14.26 प्रतिशत हैं और प्रमुख ओबीसी जाति मानी जाती है। यह समुदाय अब भी राजद का समर्थन करता है। सम्राट चौधरी कुशवाहा या कोइरी जाति से आते हैं। यह बिहार की दूसरी सबसे बड़ी (4.21 प्रतिशत) और प्रभावी ओबीसी जाति है। कहा जाता है कि यह बिहार की 243 विधान सभा सीटों में से कम से कम पांचवें हिस्से में चुनावी रूप से महत्त्वपूर्ण है। कुशवाहा और कुर्मी, वह जाति जिससे नीतीश कुमार आते हैं, को सामाजिक-आर्थिक रूप से समान समुदाय माना जाता है और इन्हें ‘लव-कुश’ समुदाय कहा जाता है, ये मिलकर जनसंख्या का 7 प्रतिशत हैं।

भाजपा ने सम्राट चौधरी में अपने खेमे से वृद्ध और बीमार नीतीश कुमार का सक्षम उत्तराधिकारी देखा, जो पिछले दो दशकों में यादवों के खिलाफ पिछड़ी जातियों की प्रतिक्रिया का प्रतीक रहे। बीते वर्षों में संघ परिवार से न जुड़े होने के बावजूद सम्राट चौधरी ने अपनी छवि को एक कट्टरपंथी के रूप में गढ़ा और 2022 में जब जदयू ने राजग छोड़कर राजद और कांग्रेस के साथ सरकार बनाई, तब वे नीतीश कुमार के प्रखर आलोचक के रूप में उभरे।

वर्तमान में उपमुख्यमंत्री, सम्राट चौधरी को मंगलवार को राजग विधायक दल का नेता चुना गया। वे 1999 में राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री रहे और शहरी विकास विभाग भी संभाला। भाजपा में 2017 में शामिल होने के बाद, सम्राट ने पार्टी में तेजी से उन्नति की। 2018 में वह राज्य उपाध्यक्ष बने, 2021 में पंचायती राज मंत्री, मार्च 2023 में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और जनवरी 2024 में उपमुख्यमंत्री बने। उन्होंने जीएसटी परिषद की बैठकों में भी राज्य का प्रतिनिधित्व किया। उनके चुनावी हलफनामों में उम्र से संबंधित कथित विसंगतियों और 1995 के एक हत्या मामले से जुड़े आरोपों की जांच की मांगें भी उठी हैं।

उधर राजग सूत्रों ने बताया कि नीतीश कुमार के 50 वर्षीय पुत्र, निशांत कुमार ने खुद को उपमुख्यमंत्री बनाये जाने के प्रस्ताव का विरोध किया है।

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First Published - April 14, 2026 | 10:23 PM IST

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