केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को जनगणना 2027 के दौरान हर घर से पूछे जाने वाले 40 सवालों की सूची जारी की है। इसमें आजादी के बाद पहली बार जाति की गणना शामिल की गई है। साथ ही, पहली बार लोगों की डिजिटल पहुंच और आधार व वोटर आईडी समेत कई पहचान दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी भी मांगी जाएगी।
जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत जारी अधिसूचना के साथ देश की 16वीं जनगणना का दूसरा चरण शुरू हो गया है। साथ ही, यह पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें लोगों को खुद अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प भी मिलेगा। सबसे बड़ा बदलाव सवाल नंबर 10 में किया गया है। 2011 की जनगणना में इस सवाल के जरिए सिर्फ यह पूछा जाता था कि व्यक्ति अनुसूचित जाति (एससी) या अनुसूचित जनजाति (एसटी) से है या नहीं। लेकिन 2027 की जनगणना में सवाल को बदलकर ‘एससी/एसटी/जाति’ कर दिया गया है।
अब लोगों से आधार नंबर, वोटर आईडी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, मोबाइल नंबर, स्थायी पता और उनके पास मौजूद बैंक खातों की कुल संख्या भी पूछी जाएगी। इसमें कोविड-19 का टीका कहां लगवाया, डिजिटल साक्षरता ,पढ़ाई आदि से जुड़े सवाल हैं।
कांग्रेस ने जाति जनगणना के मुद्दे पर शुक्रवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस ने कहा कि जातियों की सूची उपलब्ध नहीं कराए जाने और उत्तरदाताओं द्वारा बताए गए जवाब को उसी रूप में दर्ज किए जाने की व्यवस्था से सरकार की मंशा पर गंभीर संदेह पैदा होता है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि इस पूरे मामले में राजनीतिक दलों के साथ चर्चा नहीं की गई। यह उम्मीद की जा रही थी कि जाति संबंधी सवाल बिहार और तेलंगाना में किए गए जाति सर्वेक्षणों की तरह राज्यवार पहले से तैयार सूची के साथ पूछा जाएगा और उत्तर के अनुरूप उचित विकल्प पर केवल निशान लगाया जाएगा। रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ है, जिससे मंशा पर गंभीर संदेह पैदा होता है।’