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किसान नहीं चाहते मध्यस्थता

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Last Updated- December 10, 2022 | 12:52 AM IST

पश्चिम बंगाल में भूमि अधिग्रहण के पुराने तरीके अपनाने को लेकर फिर से बहस छिड़ गई है। दरअसल राज्य सरकार ने बंगाल एयरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (बीएपीएल) के निजी प्रवर्तकों से भूमि अधिग्रहण के लिए खुद ही किसानों से बातचीत करने को कहा है।
इस परियोजना की स्थापना के लिए लगभग 3500 एकड़ भूमि की जरूरत होगी। पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम अंडाल क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण कानून 1890 के तहत इस अधिग्रहण को करना चाहती है। जबकि राज्य में निगम ही ऐसी संस्था है जो कि इतने बड़े स्तर पर भूमि का अधिग्रहण कर सकती है।
दिलचस्प बात यह है कि कंपनी ने शुरुआत में खुद ही किसानों से बात कर भूमि खरीदने की योजना बनाई थी। लेकिन राज्य में पुराने भूमि अधिग्रहण कानून पर लगी रोक के कारण यह प्रक्रिया रोक दी थी।
बीएपीएल के उपाध्यक्ष (परियोजना और कारोबार विकास) कौशिक बनर्जी और निदेशक व मुख्य कार्याधिकारी सुब्रत पॉल ने बताया कि राज्य में किसी भी इंसान या संस्था के शहरी इलाकों के बाहर 25 एकड़ से ज्यादा जमीन नहीं खरीदने पर पाबंदी है।
इसका मतलब है कि इस परियोजना के 3500 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने के लिए बीएपीएल को कम से कम 140 कंपनियां बनानी पड़ेंगी। सभी कंपनियों के पास 25 एकड़ भूमि होगी और उन्हें एक साथ मिलकर काम करना होगा।
राज्य में इस पुराने कानून पर वामपंथी सरकार ने ही रोक लगाई थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस समय किसान यानी आम जनता ही अपनी जमीन बेचने के लिए बीएपीएल के निजी प्रवर्तकों से बात करना चाहती है।
राज्य सरकार के लिए भूमि अधिग्रहण अध्ययन में जुटे जाधवपुर विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने बताया, ‘इससे साफ पता चलता है कि किसानों को यकीन है कि निजी कंपनियां उनकी जमीन के लिए सरकार के मुकाबले अधिक कीमत चुकाएंगी।’
हालांकि बीएपीएल के अधिकारियों ने कहा कि उच्चतम मूल्य कानून के तहत सीधे तौर पर 3500 एकड़ जमीन खरीद पाना नामुमकिन ही है। इसके अलावा इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि सभी किसान तय समयसीमा में ही जमीन बेच देंगे और बाद में भूमि की कीमत पर कोई विवाद नहीं होगा। 
स्थानीय लोग क्षेत्र में परियोजना तो चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भूमि की कीमत ज्यादा होगी लेकिन हमें यह तभी मिल पाएगी जब सरकार इस प्रक्रिया से पीछे हटे।  स्थानीय लोगों ने बीएपीएल की उस पहल का भी स्वागत किया जिसमें कंपनी ने उनके प्रत्येक बीघा के बदले परिसर के अंदर एक कोट्टा जमीन देने की पेशकश की है। किसानों को जमीन के बदले जमीन देने का कंपनी का प्रस्ताव काफी पसंद आया है।
(समाप्त)
परियोजना के विकास के लिए चाहिए 3,500 एकड़ जमीन

किसान चाहते हैं कंपनी से सीधे जमीन का सौदा करना

भूमि अधिग्रहण कानून पर लगी रोक से आ रही हैं मुश्किलें

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First Published - February 12, 2009 | 10:22 PM IST

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