1991 के ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों के 35 साल पूरे, क्या बदला और आगे की क्या बदलने की जरूरत है
पैंतीस वर्ष पहले तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने अपना पहला केंद्रीय बजट पेश किया था। वह स्वतंत्र भारत का शायद सर्वाधिक परिणामोन्मुखी बजट था। उसके बाद हुए आर्थिक सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को आंतरिक और बाहरी प्रतिस्पर्धा के लिए खोल दिया। तब से अब तक सभी सरकारों ने मोटे तौर पर आर्थिक वृद्धि के […]
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सहकारी मॉडल और एग्रीवोल्टेइक्स से बदलेगी खेती, किसानों की आय बढ़ाने यही है नया फॉर्मूला
भारत में किसान अपनी खेती की पद्धतियों को मुख्यतः पारंपरिक तरीकों में सुधार करके आगे बढ़ा रहे हैं। इसके लिए वे बेहतर बीजों, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग कर रहे हैं, खेती के कामों में मशीनों का सहारा ले रहे हैं और कुछ मामलों में नई फसलों को भी अपना रहे हैं। कई किसान […]
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Editorial: ऑफलाइन पेमेंट के लिए बेहतर साइबर सुरक्षा और मजबूत नियमों की दरकार
भारत का डिजिटल भुगतान तंत्र एक और बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है। नैशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने नियर-फील्ड कम्युनिकेशन (एनएफसी) का उपयोग करके एक ऑफलाइन ‘टैप-ऐंड-पे’ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) सुविधा विकसित की है, जिससे इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना भी लगभग 2,000 रुपये तक का भुगतान किया जा सकेगा। प्रस्तावित प्रणाली […]
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1991 के आर्थिक सुधारों के 35 साल: उपलब्धियां बड़ी, लेकिन अधूरे एजेंडे अब भी भारत के सामने
कई लोग 1991 के सुधारों को भारत की आर्थिक उड़ान की शुरुआत मानते हैं। आज से 35 साल पहले 24 जुलाई, 1991 को अपने बजट भाषण में मनमोहन सिंह ने विक्टर ह्यूगो का कथन दोहराया, ‘धरती पर कोई भी ताकत उस विचार को नहीं रोक सकती, जिसका वक्त आ गया है’ और साथ में कहा, […]
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