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वैश्विक व्यापार के साथ सामंजस्य

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 2:02 PM IST

 विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के ताजा अनुमान से इस दृष्टिकोण को मजबूती मिलती दिख रही है कि मौजूदा आर्थिक एवं भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण वैश्विक व्यापार कम हो जाएगा। चालू वर्ष की दूसरी छमाही में वैश्विक वा​णि​ज्यिक वस्तुओं के कारोबार की मात्रा में कमी आएगी और यह वर्ष 2023 में और कम होने की उम्मीद है।
वर्ष 2022 में वा​णि​ज्यिक वस्तुओं के कारोबार की मात्रा में 3.5 फीसदी वृद्धि का अनुमान है जबकि 2023 में यह घटकर करीब 1 प्रतिशत रह जाएगी। यह वृद्धि दर के पहले के 3.4 प्रतिशत के अनुमान से काफी कम है। व्यापार में इस अपेक्षित मंदी के लिए कई कारकों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
उदाहरण के लिए, यूरोप में ऊर्जा की अधिक कीमतें परिवारों के बजट को प्रभावित कर रही हैं और अन्य वस्तुओं की मांग कम कर रही हैं। चीन में तेज मंदी से वैश्विक व्यापार की मात्रा पर भारी दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा कई विकासशील देश खाद्य पदार्थों और ईंधन की अधिक कीमतों से जूझ रहे हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी धीमी होने की आशंका है। इसकी वजह उच्च स्तर की महंगाई दर को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंकों द्वारा कार्रवाई की गई है जिसके कारण वैश्विक व्यापार पर दबाव बढ़ेगा। विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाओं में केंद्रीय बैंकों, विशेष रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा मांग को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि जारी रखने की उम्मीद है। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) का अनुमान है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृदि्ध दर 2022 में 2.8 प्रतिशत और 2023 में धीमी होकर 2.3 प्रतिशत रहेगी जो पहले के अनुमान से लगभग 1 प्रतिशत कम है।
निकट भविष्य की चुनौतियों के अलावा व्यापार में होने वाले संरचनात्मक बदलाव भी वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं। विविधता के माध्यम से आपूर्ति श्रृंखलाओं के जोखिम को कम करने के लिए सरकारों और कंपनियों दोनों पर दबाव है। हालांकि यह समय के साथ आपूर्ति श्रृंखला को अधिक लचीला बना सकता है और अंतरिम स्तर पर समायोजन वैश्विक व्यापार और वृद्धि को प्रभावित कर सकता है।
निर्यात के मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भारतीय कारोबारियों को बदलते वैश्विक व्यापार माहौल के अनुरूप ढलना होगा। उदाहरण के तौर पर व्यापार से जुड़े ताजा आंकड़े बदलाव के शुरुआती संकेतों की ओर इशारा करते हैं। सितंबर में वा​णि​ज्यिक वस्तुओं के निर्यात मूल्य में सालाना आधार पर 3.5 फीसदी की गिरावट आई है।
उम्मीद के मुताबिक वैश्विक मांग में नरमी के कारण कुछ क्षेत्रों में निर्यात घटा है। उदाहरण के लिए सूती धागे और हथकरघा उत्पादों के निर्यात में 40 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जबकि इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात में लगभग 17 प्रतिशत की कमी आई है जो निर्यात वृद्धि का एक महत्त्वपूर्ण कारक था।
भारत का निर्यात वैश्विक वृद्धि के प्रति बहुत संवेदनशील है, ऐसे में वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी या शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में मंदी का असंगत प्रभाव पड़ सकता है। भारत के आयात में भी शुद्ध रूप से कमी आई है। अलबत्ता मौजूदा आ​र्थिक बहाली से आयात ऊंचा रहने की संभावना है जो चालू खाते का घाटा बढ़ाएगी।
वैश्विक व्यापार और आर्थिक स्थितियों को देखते हुए भारत के बाहरी खातों का प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ‘ओपेक’ ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कीमतों को मजबूती देने के लिए कच्चे तेल का उत्पादन कम करने का फैसला किया है। इससे भारत के तेल आयात का बिल कम नहीं हो पाएगा जैसा कि कुछ विश्लेषक उम्मीद कर रहे थे।
भारतीय रिजर्व बैंक के पेशेवर पूर्वानुमानकर्ताओं के हाल के सर्वेक्षण के मुताबिक, चालू वर्ष में कुल भुगतान संतुलन 57.6 अरब डॉलर की सीमा तक घाटे में रहेगा जिससे मुद्रा पर दबाव पड़ेगा। इस प्रकार नीतिगत कदम के जरिये मुद्रा प्रबंधन के क्षेत्र सहित, भारत की बाह्य स्थिति और वैश्विक व्यापार के दृष्टिकोण के मुताबिक सामंजस्य करने की आवश्यकता होगी। भारत की विदेश व्यापार नीति पिछले कुछ समय से कारगर रही है और इस नीति को सभी उभरती चुनौतियों को स्वीकार करने की आवश्यकता होगी।
 

First Published : October 6, 2022 | 10:38 PM IST