facebookmetapixel
Advertisement
IT डिपार्टमेंट ने ‘स्वैपिंग प्रोविजन्स’ के लिए 20,000 ITRs को किया फ्लैग: जानें अब आपके पास क्या है रास्ताEPFO की EDLI स्कीम: कर्मचारियों को मिलता है ₹7 लाख तक का फ्री लाइफ इंश्योरेंस, ऐसे कर सकते हैं क्लेमअगले साल की शुरुआत में भारत आ सकते हैं ट्रंप, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दी जानकारीनिवेशक दें ध्यान! अगले हफ्ते कजारिया सेरामिक्स समेत ये 3 कंपनियां करेंगी शेयर बायबैक, जानें पूरी डिटेलDividend Stocks: अगले हफ्ते खुलेगा कमाई का पिटारा, टाटा-महिंद्रा-बजाज समेत 46 कंपनियां बांटेगी डिविडेंडAIF Market: पश्चिम एशिया संकट थमने से वैकल्पिक निवेश फंडों में लौटी रौनक, HNIs का बढ़ा भरोसाभारतीय फिनटेक कंपनियों की नजर अब ग्लोबल मार्केट पर, स्ट्राइप-पेपाल की तर्ज पर दुनिया भर में लाइसेंस लेने की होड़इनवेस्को सहित कई फंड कंपनियों ने नए निवेश पर लगाई रोक, पर निवेशक गोल्ड ETF खरीदें, बेचें या होल्ड करें?EMI नहीं चुका पाने के चलते बैंक वाले उठा ले गए बाइक? जानिए क्या हैं आपके पास कानूनी अधिकारSME IPO में करने जा हैं निवेश? सिर्फ GMP देखकर न फंसें, नुकसान से बचने के लिए इन फैक्टर्स का भी रखें ध्यान

गिग वर्करों की बुलंद होती आवाज: कल्याण और सुरक्षा की मांग तेज

Advertisement

हड़ताल का उद्देश्य कामकाज के लिए बेहतर हालात और अधिक वेतन की मांग के अलावा उस त्वरित डिलिवरी पर रोक लगाना था, जो भारत में बेहद लोकप्रिय 10 मिनट की डिलिवरी का पर्याय बन गई है

Last Updated- February 16, 2026 | 11:00 PM IST
Gig workers

सेवा क्षेत्र में तीन महीने से भी कम समय में हुईं तीन राष्ट्रव्यापी हड़ताल ध्यान आक​र्षित करती हैं, भले ही यह एक संयोग ही क्यों न हो कि ये संगठित विरोध प्रदर्शन एक के बाद एक हुए। वर्ष 2025 के अंत में छुट्टियों के दौरान ​क्विक कॉमर्स कंपनियों में आंदोलन का पहला दौर शुरू हुआ। नए साल की पूर्व संध्या पर सैकड़ों डिलिवरी पार्टनर काम पर नहीं आए, जिससे दुकानों से ऑर्डर किए गए सामान को मंगवाने और 10 मिनट या उससे कम समय में ग्राहक के दरवाजे तक पहुंचाने का काम रुक गया। हड़ताल का उद्देश्य कामकाज के लिए बेहतर हालात और अधिक वेतन की मांग के अलावा उस त्वरित डिलिवरी पर रोक लगाना था, जो भारत में बेहद लोकप्रिय 10 मिनट की डिलिवरी का पर्याय बन गई है।

डिलिवरी कर्मचारियों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर विचार करते हुए सरकार ने एक समाधान पेश किया। उसने कहा कि कंपनियों को 10 मिनट की डिलिवरी को मार्केटिंग या ब्रांडिंग टूल के रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उसके बाद ये कर्मचारी निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑर्डर पहुंचाने के लिए वापस काम पर आ गए, हालांकि कंपनियां डिलिवरी के लिए समय-सीमा का वादा करने में सतर्क दिख रही हैं।

दूसरी हड़ताल देश भर के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 27 जनवरी को हुई। बैंक यूनियनों के संयुक्त मंच ने बैंकों में पांच दिन के कार्य सप्ताह की मांग को लेकर हड़ताल का आह्वान किया था। बैंक फिलहाल एक छोड़कर एक शनिवार और सभी रविवार को बंद रहते हैं। सभी शनिवार को बैंक अवकाश के लिए सरकारी मंजूरी काफी समय से लंबित है। हालांकि हड़ताल से बैंक शाखाओं के कामकाज पर असर पड़ा, लेकिन डिजिटल लेनदेन के व्यापक उपयोग के कारण समग्र प्रभाव कम रहा।

तीसरी हड़ताल परिवहन क्षेत्र में हुई। उबर, ओला, रैपिडो जैसे कैब एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले ड्राइवर (जिन्हें ड्राइवर पार्टनर भी कहा जाता है) न्यूनतम किराया तय करने और व्यावसायिक उपयोग के लिए निजी वाहनों के दुरुपयोग को रोकने की मांग को लेकर 7 फरवरी को हड़ताल पर चले गए। ये प्लेटफॉर्म बड़े और छोटे शहरों में हजारों लोगों के लिए जीवन रेखा हैं। हड़ताल का आह्वान तेलंगाना गिग ऐंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन ने किया था, जिसने छह घंटे के इस आंदोलन को ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ बताया। इस यूनियन ने आरोप लगाया कि मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश लागू होने के बावजूद राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म मनमाने ढंग से किराया तय करते हैं। शिकायत का मुख्य कारण आय की अनिश्चितता को लेकर चिंता थी।

गौर करने वाली बात यह है कि तीन में से दो हड़तालें गिग इकॉनमी से संबंधित हैं, जिस पर नई श्रम संहिताओं में काफी ध्यान दिया गया है और जिसका उल्लेख आर्थिक समीक्षा 2025-26 और केंद्रीय बजट 2026-27 में प्रमुखता से किया गया है।

संसद द्वारा अनुमोदित होने के लगभग पांच वर्ष बाद नवंबर 2025 में अधिसूचित श्रम संहिताओं ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों को कानून में औपचारिक मान्यता प्रदान की। इसके साथ ही गिग वर्करों के लिए बीमा सहित सामाजिक सुरक्षा लाभों का वादा भी किया गया। प्लेटफॉर्म मालिकों और एग्रीगेटरों को गिग वर्करों के लिए सामाजिक सुरक्षा कोष स्थापित करने के वास्ते अपने वार्षिक कारोबार के एक छोटे हिस्से का अंशदान करने का आदेश दिया गया।

श्रम कानून लागू होने से सुधारों की प्रक्रिया शुरू होते ही डिलिवरी कर्मचारियों ने ​क्विक कॉमर्स मॉडल को समाप्त करने की मांग उठाई, जिससे कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर हलचल मच गई। शायद यह उस समय के सबसे बड़े सरकारी सुधारों में से एक के बाद, गिग क्षेत्र के सशक्त होने का संकेत था। साथ ही, इसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के मालिकों को यह संदेश भी दिया कि उन्हें कर्मचारियों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। जिस तरह डिलिवरी कर्मचारियों की हड़ताल और श्रम संहिता पर कार्रवाई लगभग एक ही समय हुई, उसी तरह कैब एग्रीगेटरों के ड्राइवरों का आंदोलन आर्थिक समीक्षा और केंद्रीय बजट में गिग वर्करों पर की गई घोषणाओं के लगभग एकदम बाद हुआ।

आ​र्थिक समीक्षा में गिग वर्करों के वास्ते कामकाज के हालात में सुधार लाने के श्रम संहिता के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए एक नीति की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही यह भी बताया गया कि लगभग 40 फीसदी गिग वर्कर प्रति माह 15,000 रुपये से कम कमाते हैं। इसमें प्लेटफॉर्म मालिकों के हाथों में सत्ता के केंद्रीकरण की ओर भी ध्यान दिलाया गया। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे गिग वर्करों ने अपनी हाल की दोनों हड़तालों में उठाया था।

गिग वर्करों के लिए सामाजिक सुरक्षा संहिता (श्रम संहिता का एक भाग) के तहत मिलने वाले लाभों को स्वीकार करते हुए, समीक्षा में अन्य मुद्दों के साथ-साथ श्रमिकों के वर्गीकरण पर चिंता व्यक्त की गई। नए कानून में गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों को एक ही श्रेणी में रखा गया है। समीक्षा में तर्क दिया गया कि यह कार्यबल कौशल के आधार पर अत्यधिक बंटा हुआ है, जिससे पता चलता है कि एक ही नियम सभी पर लागू नहीं हो सकता।

केंद्रीय बजट 2026-27 में साल 2025 में घोषित श्रम सुधारों को आगे बढ़ाते हुए देश में लगभग 1 करोड़ गिग वर्करों के लिए पहचान पत्र और स्वास्थ्य सेवा कवरेज की शुरुआत की गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण में कहा, ‘ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर गिग वर्कर भारत के नए युग की सेवा अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं…’ उन्होंने गिग वर्करों के पंजीकरण के लिए ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण और अन्य कल्याणकारी कदमों की घोषणा की।

ड्राइवरों की छह घंटे की हड़ताल उसी समय हुई जब भारत टैक्सी लॉन्च की गई ,जो ड्राइवरों के स्वामित्व वाला और सरकार समर्थित पहला सहकारी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जिससे प्रतिस्पर्धा की एक नई लहर और कुछ हद तक व्यवधान के संकेत मिल रहे हैं। क्या नई प्रतिस्पर्धा (जिसमें सरकार समर्थित भी शामिल है) से गिग इकॉनमी अपनी तमाम कमजोरियों के बावजूद, बेहतर स्थिति में होगी? और क्या श्रमिक कल्याण का वादा हड़तालों, जैसी की हाल में हुईं, को अनावश्यक बनाने के लिए पर्याप्त होगा?

Advertisement
First Published - February 16, 2026 | 10:28 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement