अक्टूबर 2021 में भारत में रोजगार का स्तर सितंबर के 40.62 करोड़ से घटकर 40.08 करोड़ रह गया। यह निराशाजनक है, क्योंकि यह भारत के त्योहारी मौसम से पहले अक्टूबर के मध्य में जगी उम्मीदों को झुठलाता है, जब साप्ताहिक अनुमानों ने रोजगार दर में वृद्धि दिखाई थी। सितंबर में रोजगार में 85 लाख की वृद्धि का जताया गया अनुमान अक्टूबर में 55 लाख के वास्तविक स्तर से घट गया। अलबत्ता रोजगार 40 करोड़ से ऊपर था। ऐसा स्तर वैश्विक महामारी के पहले के 19 महीनों में केवल दो बार-जनवरी और सितंबर 2021 में हासिल किया गया था।
अक्टूबर में रोजगार में 55 लाख की इस गिरावट में एक विषम बात यह थी कि उन 53 लाख लोगों की भारी-भरकम संख्या में इजाफा हुआ, जिन्होंने खुद को कारोबारी व्यक्ति के रूप में नियोजित घोषित किया था। यह अनोखी बात है, क्योंकि भारत में कारोबार शुरू करने के लिए यह बेहतरीन वक्त नहीं है। मांग कमजोर है और क्षमता उपयोग कम है। परिवार की आय काफी हद तक कमजोर है। अक्टूबर में 10 प्रतिशत से भी कम परिवारों ने एक साल पहले के मुकाबले आय में इजाफा दर्ज किया और 40 प्रतिशत ने कुछ अवधि में गिरावट दर्ज की। आरबीआई का ओबिकस (ऑर्डर बुक्स, इन्वेंटरीज ऐंड कैपेसिटी यूटिलाइजेशन सर्वे) बिगड़ती क्षमता उपयोग दिखाना जारी रखे हुए है। जून 2021 का नवीनतम सर्वेक्षण केवल 60 प्रतिशत का उपयोग अनुपात दर्शाता है।
सितंबर में बेरोजगारी 6.9 प्रतिशत से बढ़कर 7.8 प्रतिशत हो गई। श्रम को हतोत्साहित किया गया और त्योहारी महीने में इसकी भागीदारी दर सितंबर के 40.7 प्रतिशत से घटकर 40.4 प्रतिशत रह गई। जहां एक ओर कुछ श्रमिक इसमहीने के दौरान बाजारों से बाहर निकल गए, वहीं दूसरी ओर अन्य ने ‘कारोबार’ कर लिया। त्योहारों के इस मौसम ने कारोबारी बनने के अवसर प्रदान किए, संभवत: अस्थायी रूप से। हम मानते हैं कि खुद को कारोबारी घोषित करने वाले लोगों में यह इजाफा दरअसल स्वरोजगार में इजाफा है। जो लोग खुद को किसी योग्य नौकरी में नहीं रख पाते हैं, वे स्वरोजगार का आश्रय लेते हैं। त्योहारों के इस मौसम ने ऐसा करने का मौका प्रदान किया है।
हमने वर्ष 2016 से स्वरोजगार में लगातार इजाफा देखा है, जब सीएमआईई के कंज्यूमर पिरामिड्स हाउसहोल्ड सर्वे (सीपीएचएस) ने रोजगार के संबंध में अंाकड़े जुटाने शुरू किए थे। सीपीएचएस उद्यमियों को तीन प्रकारों में वर्गीकृत करता है। पहले हैं ‘कारोबारी’ जो किसी कार्यालय, कार्यशाला, दुकान, कारखाने आदि जैसे प्रतिष्ठान के तौर पर किसी उद्यम के रूप में पूंजी रखते और प्रबंधन करते हैं। ये उस दूसरी श्रेणी से अलग होते हैं, जो अपना खुद का व्यावसायिक उद्यम चलाते हैं – जैसे कि डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट आदि, जिन्हें ‘पेशेवर रूप से योग्यता प्राप्त स्व-नियोजित उद्यमी’ के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। तीसरी श्रेणी ‘स्व-नियोजित उद्यमी’ की है। इसमें टैक्सी ऑपरेटरों, नाइयों, जिम मालिकों, ब्यूटीशियन, एस्टेट एजेंटों, दलालों, धार्मिक पेशेवरों, प्रशिक्षकों, मॉडल, ज्योतिषियों आदि के स्व-संचालित कारोबार शामिल रहते हैं। इस तीसरी श्रेणी-स्व-नियोजित उद्यमी-में रोजगार बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2016 में सभी प्रकार के उद्यमियों में उनकी हिस्सेदारी 62 प्रतिशत थी। वर्ष 2017 से 2019 तक यह अनुपात बढ़कर लगभग 73 प्रतिशत हो गया। इसके बाद वर्ष 2020 में यह बढ़कर 77 प्रतिशत हो गया तथा वर्ष 2021 में अगस्त तक इसकी हिस्सेदारी और बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई थी।
अप्रैल 2020 के लॉकडाउन के दौरान स्व-नियोजित उद्यमियों के रूप में इस रोजगार वृद्धि को मुसीबत झेलनी पड़ी थी। जनवरी से अप्रैल 2020 (सीपीएचएस की लहर 19) के दौरान इस श्रेणी में रोजगार पूर्ववर्ती लहर के 5.77 करोड़ से घटकर 5.7 करोड़ रह गया। स्व-नियोजित उद्यमियों की संख्या में गिरावट का यह पहला उदाहरण था। इसके बाद से इस संख्या में अस्थिरता देखी गई है। चूंकि कोविड-19 के प्रतिबंधों में राहत मिली थी, इसलिए सितंबर-दिसंबर 2020 के दौरान इस श्रेणी में रोजगार बढ़कर 6.2 करोड़ हो गया। लेकिन जनवरी से अप्रैल 2021 के दौरान यह फिर से घटकर 5.78 करोड़ और मई से अगस्त 2021 के दौरान 5.75 करोड़ रह गया, साफ तौर पर दूसरी लहर के कारण। चूंकि टीकाकरण बढ़ा है और मामलों का दबाव कम हुआ है, इसलिए संभवत: स्वरोजगार फिर से दिखने लगा है।
इस बात की संभावना नहीं है कि कारोबार रोजगार के अन्य रूपों में वृद्धि हुई होगी। जो कारोबारी दुकानों, कारखानों आदि के रूप में पूंजी रखते और उसका प्रबंधन करते हैं, उनमें वर्ष 2018 के आखिर से गिरावट देखी जा रही है। इस वक्त के दौरान इस गिरावट के उलटने की संभावना नहीं है। उनकी संख्या सितंबर से दिसंबर 2018 के दौरान 2.02 करोड़ से गिरकर मई से अगस्त 2020 तक 1.48 करोड़ रह गई। फिर सितंबर से दिसंबर 2020 के दौरान एक छोटे-से सुधार के बाद यह मई से अगस्त 2021 तक दोबारा गिरकर 1.35 करोड़ पर आ गई।
वर्ष 2017 से वर्ष 2019 तक पेशेवर रूप से योग्यता प्राप्त स्व-नियोजित उद्यमियों के बीच रोजगार अच्छी तरह से बढ़ रहा था। सितंबर से दिसंबर 2019 के दौरान भारत में अनुमानित 13.9 लाख पेशेवर रूप से योग्यता प्राप्त स्व-नियोजित उद्यमी थे। हालांकि कोविड-19 की वजह से हुए प्रतिबंधों के कारण उनकी संख्या मई से अगस्त 2021 के दौरान कम होकर केवल 9.4 लाख रह गई।
जो लोग योग्य नौकरी नहीं पा सकते हैं और स्व-नियोजित उद्यमी बन सकते हैं, वे खुद को इससे संतुष्ट कर लेते हैं, लेकिन वे आम तौर पर दूसरों को रोजगार नहीं दे पाते हैं। यह इस तथ्य से स्पष्ट हो जाता है कि स्व-नियोजित उद्यमिता तो बढ़ रही है, लेकिन संपूर्ण रोजगार नहीं। इसके विपरीत अक्टूबर में कारोबारी व्यक्तियों के रोजगार में 53 लाख की वृद्धि के साथ-साथ दिहाड़ी मजदूरों और छोटे व्यापारियों के रोजगार में 1.96 करोड़ की गिरावट आई थी। स्पष्ट है कि उद्यमिता में इस विचित्र वृद्धि के बावजूद रोजगार की स्थिति विकट बनी हुई है।