अमेरिका की व्यापार नीति से संबंधित अनिश्चितता अभी भी वैश्विक आर्थिक बहस पर हावी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा जारी वर्ल्ड इकनॉमिक आउटलुक (डब्ल्यूईओ) के अक्टूबर संस्करण में कहा गया कि वैश्विक वृद्धि में कमी के जोखिम अप्रैल की तुलना में थोड़े कम हुए हैं लेकिन अभी भी वे ऊंचे स्तर पर हैं। अब […]
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नोबेल शांति पुरस्कार के उलट अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में दिया जाने वाला अर्थशास्त्र का स्वेरिजेस रिक्सबैंक पुरस्कार आमतौर पर राजनीतिक पुरस्कार नहीं माना जाता है। परंतु निश्चित तौर पर यह पुरस्कार ये तो बताता ही है कि मुख्य धारा में आर्थिक नीति को किस तरह देखा जा रहा है। पुरस्कार के शुरुआती वर्षों में […]
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कियर स्टार्मर की हालिया भारत यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आपसी रिश्तों में हुए हाल में आई गर्मजोशी को आगे बढ़ाना था। इससे पहले गत जुलाई में दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर हस्ताक्षर हुए थे। स्टार्मर के साथ यूके के कारोबारियों का अब तक […]
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यह बात तो सभी मानते हैं कि भारत को अपनी निवेश दर बढ़ाने और अपनी वृद्धि दर में टिकाऊ सुधार के लिए बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की आवश्यकता है। हालांकि, कर के मामले में अनिश्चितता अभी भी देश की कुल एफडीआई संभावनाओं के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। इस संदर्भ में नीति […]
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नई दिल्ली में चल रहे दूरसंचार सम्मेलन में स्वदेशी 4 जी स्टैक और भारत में डिजिटल क्रांति प्रमुख विशेषताओं के रूप में उभरकर सामने आए हैं। ‘इंडिया मोबाइल कांग्रेस’ का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के दूरसंचार क्षेत्र की उपलब्धियों को रेखांकित किया और भारत में निवेश, निर्माण और नवाचार की समयबद्धता […]
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स्टैनफोर्ड के हूवर हिस्ट्री लैब के डैन वांग ने अपनी पुस्तक ‘ब्रेकनेक: चाइनाज क्वेस्ट टु इंजीनियर द फ्यूचर’ के माध्यम से व्यापक तौर पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। इसमें वे तर्क देते हैं कि चीन एक ‘इंजीनियरिंग राज्य’ है, जबकि अमेरिका ‘वकीलों का राज्य’ है। यह विश्लेषण नया नहीं है। द इकनॉमिस्ट के […]
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क्या बहुपक्षीय व्यवस्था में अभी दुनिया को देने के लिए कुछ शेष है? अपनी तमाम खामियों और अक्षमताओं के बावजूद यह हाल तक एक ऐसी व्यवस्था बनी रही जिसके तहत वैश्विक महत्त्व के मुद्दों को उठाया जाना चाहिए और उठाया जाता रहा है। इस व्यवस्था में खामियां तब पैदा हुईं जब अमेरिका ने उन दशकों […]
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केंद्र सरकार को नीति आयोग के मुख्य कार्याधिकारी बीवीआर सुब्रह्मण्यम की सलाह पर ध्यान देना चाहिए। सोमवार को सुब्रह्मण्यम ने कई दिलचस्प और महत्त्वपूर्ण बातें कहीं जो बताती हैं कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर भारत के नीतिगत विचार में क्या कमियां हैं और इस मामले में क्या करने की आवश्यकता है। कुछ अन्य बातों के […]
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‘दुनिया की फार्मेसी’ के रूप में भारत की प्रतिष्ठा को उस समय झटका लगा जब खांसी का एक विषाक्त सिरप पीने से 14 बच्चों की मौत हो गई। इस सिरप में ऐसे औद्योगिक रसायन मिले जिन्हें आमतौर पर पेंट, स्याही और ब्रेक फ्लुइड में इस्तेमाल किया जाता है। इस घटना के बाद केंद्र और राज्य […]
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कीमती धातुओं ने वर्ष 2025 में अधिकांश वित्तीय परिसंपत्तियों को पीछे छोड़ दिया है। वर्ष अपनी अंतिम तिमाही में प्रवेश कर रहा है और सोना तथा चांदी लगातार तेजी पर बने हुए हैं। अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में सोना 48 फीसदी ऊपर है जबकि चांदी ने जनवरी 2025 से अब तक 65 फीसदी का रिटर्न […]
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