facebookmetapixel
कई बड़े शहरों में नहीं बिक रहे घर! मेट्रो सिटी में अनसोल्ड घरों का लगा अंबार, 2025 में आंकड़ा 5.7 लाख के पारMCap: शेयर बाजार की तेजी में टॉप 7 कंपनियों का मुनाफा, ₹1.23 लाख करोड़ बढ़ा मार्केट कैपसाल की शुरुआत में FPIs ने निकाले 7,608 करोड़, विदेशी निवेशक रहे सतर्कMarket Outlook: इस हफ्ते बाजार में रुझान तय करेंगे मैक्रो डेटा और FII ट्रेडिंगUS Venezuela Attack: कौन हैं Nicolás Maduro? जिनके पकड़े जाने का दावा अमेरिका ने कियाWeather Update Today: उत्तर भारत में ठंड और घने कोहरे का कहर, IMD ने जारी की चेतावनीUP: लखनऊ में बनेगी AI सिटी, उत्तर प्रदेश को मिलेगा ग्लोबल टेक पहचानHealth Insurance: हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय अधिकतर लोग क्या गलती करते हैं?दिल्ली की हवा इतनी खराब कैसे हुई? स्टडी में दावा: राजधानी के 65% प्रदूषण के लिए NCR व दूसरे राज्य जिम्मेदारExplainer: 50 शहरों में हिंसा, खामेनेई की धमकी और ट्रंप की चेतावनी…ईरान में आखिर हो क्या रहा है?

वेटिंग टिकट रद्द कराने पर अब कम कटेगी जेब!

2015 में बने वर्तमान नियमों के अनुसार सभी आरक्षित श्रेणी के टिकटों पर 60 रुपये क्लर्केज शुल्क लगता है।  द्वितीय श्रेणी के अनारक्षित टिकटों पर 30 रुपये शुल्क लगता है।

Last Updated- June 29, 2025 | 10:59 PM IST
Indian Railway
प्रतीकात्मक तस्वीर

यात्री किराये में वृद्धि की संभावना के बीच रेल मंत्रालय यात्री चार्ट तैयार होने पर वेटिंग टिकट रद्द होने या प्रतीक्षा सूची वाले टिकट रद्द कराने के पैसे वापस करने में लिपिकीय शुल्क माफ करने की संभावना पर विचार कर रहा है। अगर होता है तो यात्रियों को वेटिंग टिकट रद्द कराने के शुल्क में कमी आएगी।

2015 में बने वर्तमान नियमों के अनुसार सभी आरक्षित श्रेणी के टिकटों पर 60 रुपये क्लर्केज शुल्क लगता है।  द्वितीय श्रेणी के अनारक्षित टिकटों पर 30 रुपये शुल्क लगता है। कनफर्म टिकट और वेटिंग या आरएसी (किसी के आरक्षिट टिकट पर रद्द होने पर मिलने वाली सीट) टिकट रद्द कराने पर सुविधा शुल्क व लिपिकीय शुल्क यात्रियों को वापस नहीं किया जाता है।

अधिकारी ने कहा, ‘रेलवे टिकटिंग प्रणाली के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के विकास व उसके संचालन के लिए कामकाजी शुल्क लिया जाता है। यह फंक्शनल व्यय है, जो टिकट कन्फर्म न होने पर भी लगता है। इस पर चर्चा हो रही है कि कामकाजी शुल्क पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है या आंशिक रूप से।’

टिकट रद्द कराने का शुल्क देखने में कम लग सकता है, लेकिन रेलवे को इससे बड़ी आमदनी होती है, क्योंकि हर साल लाखों टिकट रद्द कराए जाते हैं। दिसंबर 2024 में लोकसभा में एक लिखित जवाब में रेल मंत्रालय ने कहा था कि प्रतीक्षा सूची के टिकट रद्द कराने से कितना राजस्व आता है, इसका अलग से कोई रिकॉर्ड रेलवे के पास नहीं है। संसद को दी गई सूचना के मुताबिक प्रतीक्षा सूची के टिकट इसलिए दिए जाते हैं कि कन्फर्म और आरएसी टिकट रद्द होने से खाली हुई सीटें भरी जा सकें। साथ ही अपग्रेडेशन योजना के तहत प्रतीक्षा सूची के टिकटों को अपग्रेड किए जाने का विकल्प होता है, या विकल्प योजना के तहत उन यात्रियों को वैकल्पिक ट्रेनों में भेजा जाता है।

सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के मुताबिक 2021 से 2024 के बीच टिकट रद्द कराए जाने से रेलवे को 1,230 करोड़ रुपये की आमदनी हुई है। 2021में प्रतीक्षा सूची से 2.52 करोड़ टिकट रद्द किए गए थे। इससे रेलवे को 242 करोड़ रुपये कमाई हुई थी। वर्ष 2022 में 4.6 करोड़ टिकट रद्द हुए थे जिससे 429 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 505 करोड़ रुपये हो गया और 5.2 करोड़़ टिकट रद्द हुए।

First Published - June 29, 2025 | 10:59 PM IST

संबंधित पोस्ट