facebookmetapixel
Pariksha Pe Charcha 2026: PM मोदी ने छात्रों को दी सलाह- नंबर नहीं, स्किल व बेहतर जीवन पर दें ध्याननागालैंड में क्षेत्रीय प्राधिकरण के गठन को मिली त्रिपक्षीय मंजूरी, PM मोदी ने बताया ‘ऐतिहासिक’क्या खत्म हो रहा है स्थायी दोस्ती का दौर? ट्रंप की नीतियों ने हिला दी वैश्विक गठबंधनों की बुनियाद2026 में भारत का ट्रेड एजेंडा: द्विपक्षीय समझौतों से आगे बढ़कर वैश्विक व्यापार धुरी बनने की तैयारीEditorial: डेटा सेंटर को बिजली देना जरूरी, AI में लीडरशिप ऊर्जा आपूर्ति के नियंत्रण पर टिकीRBI गवर्नर को भरोसा: भारत की आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत, बाहरी मोर्चे पर भी देश पूरी तरह सुरक्षितPSL वर्गीकरण विवाद पर RBI का रुख साफ: यह बैंकों का व्यक्तिगत मसला, पूरी व्यवस्था के लिए खतरा नहींसोने की कीमतों में उछाल से बढ़ा गोल्ड लोन का ग्राफ, RBI ने कहा: एसेट क्वालिटी पर कोई खतरा नहींREITs को मिली बैंक ऋण की मंजूरी: फंड जुटाना होगा आसान, कमर्शियल संपत्तियों का होगा विस्तारRBI का बड़ा फैसला: अब REITs को भी मिलेगा बैंक लोन, रियल एस्टेट सेक्टर की खुलेगी किस्मत

MSCI सूचकांक में बढ़ा देसी बाजार का भार, चीन व भारत का अंतर घटकर 400 आधार अंक रह गया

आज सुबह एमएससीआई ने अपने मानक सूचकांक में 7 और देसी शेयरों को शामिल करने की घोषणा की जबकि चीन के 60 शेयरों को इससे बाहर कर दिया।

Last Updated- August 13, 2024 | 11:16 PM IST
MSCI Index November review

भारतीय बाजार की हिस्सेदारी अब प्रमुख इमर्जिंग मार्केट (ईएम) बेंचमार्क में पहली बार 20 फीसदी से ज्यादा हो जाएगी। इस सूचकांक में 500 अरब डॉलर से ज्यादा की संप​त्तियों वाले फंडों को ट्रैक किया जाता है।

वै​श्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई द्वारा ताजा समीक्षा के बाद एमएससीआई (ईएम) सूचकांक में भारत का भार पहली बार 20 फीसदी पार जाएगा। इससे सूचकांक में सर्वा​धिक भार वाले चीन और भारत के भार के बीच महज 400 आधार अंक का अंतर रह जाएगा।

2021 की शुरुआत में भारत का भार 9.2 फीसदी था जो चीन के 38.7 फीसदी भार के एक-चौथाई से भी कम था। 2021 से एमएससीआई इंडिया सूचकांक 84 फीसदी बढ़ा है जबकि एमएससीआई चीन में करीब 50 फीसदी की गिरावट आई है।

आज सुबह एमएससीआई ने अपने मानक सूचकांक में 7 और देसी शेयरों को शामिल करने की घोषणा की जबकि चीन के 60 शेयरों को इससे बाहर कर दिया। इससे दुनिया के दूसरे सबसे मूल्यवान बाजार का एमएससीआई में भार घटकर 24 फीसदी से कम रह गया।

आईआईएफएल सिक्योरिटीज में वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीराम वेलायुधन ने कहा, ‘एमएससीआई ईएम सूचकांक में भारत का भार 20 फीसदी से पार पहुंचना महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। यह वै​श्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख और स्वीकार्यता को दर्शाता है। 2017 में भारत का भार करीब 8 फीसदी था जो अब दोनुगे से भी ज्यादा बढ़ गया है। यह देश की प्रगति और अंतरराष्ट्रीय निवेशक समुदाय को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को इंगित करता है।’

नुवामा अल्टरनेटिव ऐंड क्वांटीटेटिव रिसर्च के प्रमुख अ​भिलाष पागडिया ने कहा कि एमएससीआई सूचकांक में ताजा फेरबदल से देसी बाजार में 2.7 अरब डॉलर से 3 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश हो सकता है।

इनमें से करीब 1.8 अरब डॉलर सूचकांक में एचडीएफसी बैंक के भार बढ़ाए जाने के कारण आएगा। पैसिव निवेश और भारत के भार बढ़ाए जाने से और ज्यादा निवेश आ सकता है। सूचकांक प्रदाता ने कहा कि वह एचडीएफसी बैंक में विदेशी निवेश की गुंजाइश पर नजर रखेगा। बाजार उम्मीद कर रहा था कि अकेले एचडीएफसी बैंक में ही 3 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश होगा। मगर इसका भार उम्मीद के अनुरूप नहीं बढ़ाए जाने से एचडीएफसी बैंक का शेयर 3.5 फीसदी गिरावट पर बंद हुआ।

2018 में भारत का भार 8.2 फीसदी था और सूचकांक में 78 देसी कंपनियां शामिल थीं मगर अब इनकी संख्या 150 से भी ज्यादा हो गई हैं।
एमएससीआई सूचकांकों में ज्यादा शेयरों के शामिल होने से विदेशी निवेश प्रवाह बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे तरलता में भी सुधार होगा।

डिक्सन, वोडाफोन, ऑयल इंडिया, जायडस लाइफसाइंसेज, रेल विकास निगम, प्रेस्टीज एस्टेट और ऑरेकल फाइनैं​शियल को एमएससीआई में शामिल किया गया है जबकि बंधन बैंक को सूचकांक से निकाला गया है।

सूचकांक में एचडीएफसी बैंक के अलावा भारती एयरटेल और कोल इंडिया का भी भार थोड़ा बढ़ाया गया है। इस बीच एमएससीआई ने पिछले साल अदाणी समूह के शेयरों पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को हटा लिया है।

First Published - August 13, 2024 | 10:54 PM IST

संबंधित पोस्ट