गुजरात के गिफ्ट सिटी में इंटरनैशनल फाइनैंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (आईएफएससीए) के चेयरमैन के राजारामन ने कहा कि अथॉरिटी का फोकस खुद को अंतरराष्ट्रीय पूंजी और वित्तीय गतिविधियों के स्वाभाविक केंद्र के तौर पर स्थापित करना है। खुशबू तिवारी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि गिफ्ट आईएफएससी अब बाजार का दायरा बढ़ा रहा है, जिसमें महंगी परिसंपत्तियों की लीजिंग और बॉन्ड बाजार में भागीदारी बढ़ाने से लेकर वैश्विक एक्सचेंज से जुड़ाव मजबूत करना शामिल है। उनसे बातचीत के अंश:
आईएफएससी प्राधिकरण के बनने के बाद से गिफ्ट-आईएफएससी तंत्र का कैसा विकास हुआ है?
हमने ऑनशोरिंग यानी भारत पर केंद्रित विदेशी वित्तीय सेवाओं को देश में लाने के मकसद के साथ शुरुआत की थी। लेकिन अब हमने अपना दायरा बढ़ा लिया है और यह देख रहे हैं कि हम भारत की ग्रोथ स्टोरी में किस तरह सहयोग कर सकते हैं। सरकार के ‘विकसित भारत 2047’ विजन पर काम करने के साथ, हम यह देख रहे हैं कि एसएमई (छोटे और मध्यम उद्यमों) सहित सभी तरह के व्यवसायों के लिए हम कैसे ज्यादा उपयोगी और मददगार हो सकते हैं।
हमारा फोकस सस्ती पूंजी जुटाना है। गिफ्ट सिटी के बैंकों से भारत को कुल ऋण लगभग 61 अरब डॉलर का है। उनका फंड प्रवाह लगभग 16 अरब डॉलर है। गिफ्ट आईएफएससी के जरिये लगभग 77 अरब डॉलर जुटाए गए हैं। यह अब लोगों के लिए संसाधन जुटाने का पसंदीदा क्षेत्र बन गया है। कम से कम 24 फंड विदेशी क्षेत्रों से यहां शिफ्ट हुए हैं और कुल 360 फंड यहां पंजीकृत हैं।
आप विदेशी फंड हाउस के लिए यहां कामकाज आकर्षक बनाने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं?
इस पर अभी काम चल रहा है क्योंकि कई वैश्विक फंड प्रबंधक दशकों से कई विदेशी क्षेत्रों में काम करने के आदी रहे हैं। हमें शुरुआती सफलता मिली है क्योंकि कई वैश्विक फंड प्रबंधकों ने अब गिफ्ट आईएफएससी में अपनी रणनीतियां शुरू कर दी हैं। मौजूदा वैश्विक हालात में हो सकता है कि कई लोगों ने फैसले रोक दिए हों, लेकिन लंबे समय में उन्हें भारत की दमदार वृद्धि की कहानी को देखते हुए यहां आना ही होगा।
वित्त मंत्री ने 25 वर्षों में से 20 के लिए टैक्स हॉलिडे यानी कर रियायत और 25 साल के बाद 15 प्रतिशत की दर का भी ऐलान किया है, जिससे कर संबंधित निश्चितता मिलेगी। यह विमान और जहाज लीज पर देने वाली कंपनियों, वैश्विक पेंशन फंडों और सॉवरिन वेल्थ फंडों जैसे लंबे समय के निवेशकों के लिए बहुत मददगार होगा। वैश्विक हालात सामान्य होने के बाद हम अगले छह महीने से एक साल में जबरदस्त वृद्धि के अगले दौर के लिए तैयार हैं।
फोकस के कोई नए क्षेत्र?
लीजिंग के क्षेत्र में हम आईएफएससी से बड़ी पूंजी वाली मशीनों को लीज की इजाजत पर दिए जाने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहे हैं। इनमें टनल बोरिंग मशीन, फ्लोटिंग प्रोडक्शन और स्टोरेज और ऑफलोडिंग प्लेटफॉर्म या एफपीएसओ शामिल हैं जो असल में फ्लोटिंग रिफाइनरी होती हैं। कई भारतीय कंपनियों के पास ये ऐसेट हैं। इस तरह की परिसंपत्तियों को गिफ्ट आईएफएससी से भी लीज पर दिया जा सकता है।
गिफ्ट सिटी से पहली आईपीओ की सूचीबद्धता सफल नहीं हो पाई। क्या इसे झटका मानते हैं?
यह कोई बड़ी बाधा नहीं है। आईएफएससीए का काम एक असरदार नियामकीय ढांचा बनाना है। लिस्टिंग के लिए बनाए गए नियम बहुत अच्छे से काम कर रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य से जिस आईपीओ का आपने जिक्र किया, वह ऐसे समय आया जब पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हो गया था। शायद गलत समय की वजह से वह आईपीओ सफल नहीं हो पाया।
उस समय हमें अपने नियमों को परखने का मौका मिला और यही हमारी सबसे बड़ी कामयाबी है। जब वैश्विक उथल-पुथल खत्म हो जाएगी, तो मुझे उम्मीद है कि और भी कंपनियां पैसा जुटाने के लिए आईपीओ लेकर आएंगी। कुछ कंपनियां पहले से ही एक्सचेंजों के साथ बातचीत कर रही हैं।
क्या यहां से विदेशी मुद्रा बाहर जाने को लेकर कोई चिंता है?
आईएफएससी में एआईएफ (वैकल्पिक निवेश फंडों) द्वारा जुटाए गए कोष में से 16 अरब डॉलर भारत में निवेश किए गए हैं। बाकी 4 अरब डॉलर दूसरे विदेशी क्षेत्रों में निवेश किए गए हैं। एआईएफ द्वारा जुटाई गई पूंजी का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा भारत में निवेश हुआ है।