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NSE IPO: सरकारी बीमा कंपनियों की चांदी, 32 पैसे में खरीदे शेयर अब देंगे हजारों करोड़; पर सॉल्वेंसी संकट बरकरार

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IPO से मिलने वाली रकम से आर्थिक रूप से दबाव झेल रही सरकारी बीमा कंपनियों की सॉल्वेंसी से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का कोई खास समाधान नहीं हो पाएगा

Last Updated- June 21, 2026 | 5:36 PM IST
NSE IPO

NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के 30,000 करोड़ रुपये के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) में सरकारी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा शेयरों की प्रस्तावित बिक्री से उन्हें काफी फायदा होगा और उनकी बैलेंस शीट को एक बार के लिए मजबूती मिलेगी। हालांकि, इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि इससे मिलने वाली रकम से आर्थिक रूप से दबाव झेल रही सरकारी इंश्योरेंस कंपनियों की सॉल्वेंसी (वित्तीय मजबूती) से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का कोई खास समाधान नहीं हो पाएगा।

देश का सबसे बड़ा IPO

NSE ने इस हफ्ते की शुरुआत में अपने IPO के लिए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल किया। यह पूरी तरह से ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) वाला IPO होगा, जिसमें मौजूदा शेयरहोल्डर 14.89 करोड़ तक इक्विटी शेयर बेचेंगे। ये शेयर एक्सचेंज की इक्विटी कैपिटल का लगभग 6 फीसदी हिस्सा हैं। उम्मीद है कि यह इश्यू भारत के सबसे बड़े IPO में से एक होगा और 2024 में हुंडई मोटर इंडिया द्वारा जुटाए गए लगभग 28,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को भी पीछे छोड़ देगा।

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यें बीमा कंपनियां बेचेंगी शेयर?

सरकारी बीमा कंपनियों में नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस प्रत्येक अधिकतम 60 लाख शेयर बेचेंगी। नेशनल इंश्योरेंस के लिए यह उसकी 3.52 करोड़ शेयरों की हिस्सेदारी का 17.05 फीसदी है। बिक्री के बाद कंपनी के पास 2.92 करोड़ शेयर बचेंगे, जो एनएसई की कुल इक्विटी का लगभग 1.18 फीसदी होगा।

वहीं, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस की बिक्री उसकी 1.939 करोड़ शेयरों की हिस्सेदारी का लगभग 30.9 फीसदी होगी। इससे कंपनी की हिस्सेदारी 0.78 फीसदी से घटकर लगभग 0.54 फीसदी रह जाएगी।

ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी अधिकतम 49.6 लाख शेयर बेचेगी, जो उसकी 3.52 करोड़ शेयरों की हिस्सेदारी का 14.1 फीसदी है। आईपीओ के बाद कंपनी के पास करीब 3.024 करोड़ शेयर रहेंगे, जो एक्सचेंज में 1.22 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर होंगे।

वहीं, न्यू इंडिया एश्योरेंस, जिसके पास एनएसई के 3.52 करोड़ शेयर यानी 1.42 फीसदी हिस्सेदारी है, ऑफर फॉर सेल (OFS) में भाग नहीं लेगी और अपनी पूरी हिस्सेदारी बरकरार रखेगी।

32 पैसे के शेयर से हजारों करोड़ का लाभ

DRHP के अनुसार, न्यू इंडिया एश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस और ओरिएंटल इंश्योरेंस ने एनएसई के शेयर सिर्फ 32 पैसे प्रति शेयर की लागत पर खरीदे थे। वहीं, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस ने अपनी हिस्सेदारी 50 पैसे प्रति शेयर के भाव पर खरीदी थी।

अनलिस्टेड बाजार में मौजूदा वैल्यूएशन के आधार पर, नेशनल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस को शेयर बिक्री से करीब 1,200-1,200 करोड़ रुपये की प्राप्ति हो सकती है। वहीं, ओरिएंटल इंश्योरेंस को लगभग 1,000 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। दूसरी ओर, न्यू इंडिया एश्योरेंस द्वारा नहीं बेची जा रही हिस्सेदारी का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 2,100 करोड़ रुपये आंका गया है।

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एकमुश्त कमाई, पर संकट बरकरार

ग्रांट थॉर्नटन भारत में पार्टनर और फाइनेंशियल सर्विसेज रिस्क लीडर विवेक अय्यर ने कहा, “वित्तीय संकट से जूझ रही कंपनियों के लिए यह सौदा उनकी सॉल्वेंसी (पूंजी पर्याप्तता) की समस्या का समाधान नहीं है। यह नकदी का अच्छा फ्लो और एकमुश्त धन का स्रोत जरूर है, लेकिन उनकी पूंजी की जरूरत इससे कहीं ज्यादा है। इसके लिए उन्हें नई पूंजी जुटानी होगी, कंपनियों के एकीकरण (कंसोलिडेशन) या अंडरराइटिंग कारोबार की लाभप्रदता में लगातार सुधार की जरूरत पड़ेगी। यह उन्हें मौजूदा स्थिति से कुछ बेहतर स्थिति तक पहुंचाने वाला एक छोटा कदम है, लेकिन यह उनकी समस्याओं का स्थायी इलाज नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “जिन कंपनियों को सॉल्वेंसी की समस्या नहीं है, उनके लिए यह एकमुश्त लाभ कमाने का बेहतरीन अवसर है। इससे उनकी नेटवर्थ बढ़ेगी और मार्क-टू-मार्केट (MTM) लाभ मिलेगा, जिससे उनकी बैलेंस शीट सीधे तौर पर मजबूत होगी। जिन निवेशकों पर वित्तीय दबाव नहीं है, उनके लिए यह अच्छा रिटर्न साबित होगा।”

बीमा कंपनियों को चाहिए भारी पूंजी

अय्यर के अनुमान के अनुसार, तीनों सरकारी जनरल बीमा कंपनियों को मार्च 2026 तक नियामकीय 150 फीसदी सॉल्वेंसी अनुपात हासिल करने के लिए 15,200 करोड़ से 17,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी की जरूरत होगी। यह अनुमान फेयर वैल्यू चेंज अकाउंट (FVCA) पर नियामकीय राहत पूरी तरह मिलने की स्थिति में है। यदि ऐसी राहत नहीं मिलती है, तो इन कंपनियों की पूंजी की आवश्यकता बढ़कर 33,000 करोड़ से 34,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।

इन बीमा कंपनियों की सॉल्वेंसी की स्थिति अभी भी गंभीर दबाव में बनी हुई है। यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस का सॉल्वेंसी अनुपात वित्त वर्ष 2025-26 के अंत में -136 फीसदी रहा, जबकि एक साल पहले यह -65 फीसदी था। इसी तरह, नेशनल इंश्योरेंस का सॉल्वेंसी अनुपात -67 फीसदी से गिरकर -111 फीसदी हो गया। वहीं, ओरिएंटल इंश्योरेंस का सॉल्वेंसी अनुपात -103 फीसदी से घटकर -163 फीसदी पर पहुंच गया।

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NSE की लिस्टिंग से खुलेगी निवेश की वैल्यू

एक सीनियर इंश्योरेंस एक्सपर्ट ने कहा, “NSE IPO का असली महत्व OFS से मिलने वाली छोटी-मोटी रकम नहीं है, बल्कि उन होल्डिंग्स से वैल्यू अनलॉक करना है जिनकी कीमत अभी कम है। लिस्ट होने के बाद, इन शेयरों की वैल्यू मार्केट प्राइस के हिसाब से तय हो सकती है, जिससे इंश्योरेंस कंपनियों के एसेट बेस और नेट वर्थ में काफी बढ़ोतरी हो सकती है। आर्थिक रूप से मुश्किल में फंसी सरकारी इंश्योरेंस कंपनियों के लिए, सिर्फ इस रीवैल्यूएशन से ही उनकी सॉल्वेंसी में काफी सुधार हो सकता है, भले ही वे शेयर न बेचें।”

केंद्र सरकार ने इन तीन बीमा कंपनियों की आर्थिक स्थिति और सॉल्वेंसी लेवल को बेहतर बनाने के लिए FY20 से FY22 के बीच कुल 17,450 करोड़ रुपये की रकम दी। इसमें से नेशनल इंश्योरेंस को 9,275 करोड़ रुपये, ओरिएंटल इंश्योरेंस को 4,420 करोड़ रुपये और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस को 3,755 करोड़ रुपये मिले।

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First Published - June 21, 2026 | 5:16 PM IST

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