सामान्य से कम मॉनसून और अल नीनो के जोखिम के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी की आवक पर मुख्य तौर पर खतरा मंडराने लगा है। यह गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) जैसे महिंद्रा फाइनैंस, श्रीराम फाइनैंस, एचडीबी फाइनैंशियल सर्विसेज के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है। इससे कर्ज देने वाली कंपनियों को जोखिम वाले खंडों के बही खाते के निरीक्षण और और अंडरराइटिंग (जोखिम का आकलन) बढ़ाना पड़ सकता है।
भारत के मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून दीर्घावधि औसत (एलपीए) का 90 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है और यह सामान्य से कम बारिश की ओर इशारा करता है। एनबीएफसी के लिए चिंता की बात सिर्फ वर्षा नहीं है बल्कि इसका असर खेती की पैदावार, ग्रामीण आय और कर्ज चुकाने की क्षमता पर भी पड़ा है। अगर लंबे समय तक बारिश की कमी से ग्रामीण इलाकों में नकदी की आवक कमजोर होती है तो ट्रैक्टर और वाणिज्यिक वाहनों को धन मुहैया कराने के साथ-साथ छोटे व्यवसायों को दिए जाने वाले कर्ज पर भी दबाव पड़ सकता है।
महिंद्रा ऐंड महिंद्रा फाइनैंशियल सर्विसेज (महिंद्रा फाइनैंस) ने ग्रामीण और कृषि आय पर ज्यादा निर्भर खंड में निगरानी और अंडरराइटिंग को बढ़ा दिया है। एमडी व सीईओ राउल रेबेलो ने कहा कि कंपनी अल-नीनो के जोखिम का आकलन सिर्फ बारिश के आधार पर नहीं बल्कि ग्रामीण नकदी आवक पर इसके असर के जरिए कर रही है। रेबेलो ने परिणाम घोषित करने के कार्यक्रम में कहा, ‘हम अल-नीनो के जोखिम को सिर्फ बारिश के तौर पर नहीं देखते बल्कि ग्रामीण और कृषि नकदी आवक से यह जोखिम और बढ़ जाता है।’
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में नकदी की आवक खेती की पैदावार, मंडियों में आवक, न्यूनतम समर्थन मूल्य और अन्य कारकों पर निर्भर करता है। महिंद्रा फाइनैंस ने मौजूदा लोन बुक के लिए अलग-अलग इलाकों में उच्च संवेदनशील निगरानी प्रणाली लागू की है। इसमें स्ट्रेस थ्रेशोल्ड (तनाव की सीमा) पार होने पर अतिरिक्त वसूली के उपाय किए जाते हैं। कंपनी ने नए बिज़नेस के लिए एंट्री बैरियर बढ़ा दिए हैं और कमजोर खंड (जिसमें कुछ एसएमई और मोबिलिटी कस्टमर शामिल हैं) के कर्जदारों से ज्यादा योगदान की मांग की है। कंपनी अपने ट्रैक्टर पोर्टफोलियो पर भी बारीकी से नज़र रख रही है।
रेबेलो ने कहा कि जिन उधारकर्ताओं की लोन चुकाने की क्षमता खेती से जुड़ी है, उनके लिए लोन मंजूर करते समय खेती से होने वाली संभावित पैदावार और फसलों के प्रकार को ध्यान में रखा जाता है। कंपनी ऋण लागत में संभावित बढ़ोतरी से निपटने के लिए ‘लोन-टू-वैल्यू’ अनुपात का भी इस्तेमाल कर रही है।
श्रीराम फाइनैंस के एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन उमेश रेवांकर ने कहा कि कंपनी पूरे साल की वृद्धि के बारे में कोई पक्का फैसला लेने से पहले एक और तिमाही का इंतजार करेगी। दरअसल, मॉनसून की कमी का ग्रामीण आय और खेती की पैदावार पर क्या असर होगा, इसे लेकर अभी अनिश्चितता है।
रेवणकर ने कंपनी परिणाम की घोषणा के दौरान कहा, ‘हम एक और तिमाही का इंतज़ार करना चाहेंगे क्योंकि मॉनसून की कमी का कुल असर अभी ठीक से पता नहीं है। इसलिए हम उसका इंतजार करना चाहेंगे। हमें भरोसा है कि हम कम से कम अगली तिमाही में 15 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हासिल कर पाएंगे। उसके बाद अगर हालात बेहतर होते हैं तो हमें लगता है कि हम तेजी से आगे बढ़ पाएंगे।’ उन्होंने कहा कि खेती की पैदावार पर अल-नीनो का असर दूसरी तिमाही के बाद और साफ हो जाएगा।
एचडीबी फाइनैंशियल सर्विसेज भी ऋण लागत पर मॉनसून के संभावित असर को देखते हुए इसकी प्रगति पर बारीकी से नजर रख रही है। मुख्य वित्तीय अधिकारी जयकुमार शाह ने कहा, ‘अतीत में मॉनसून की वजह से अल-नीनो जैसे हालात का हम पर असर पड़ा है। इसलिए हम इस पर बहुत बारीकी से नजर रख रहे हैं, रोजाना और हर हफ्ते इसकी निगरानी कर रहे हैं, ताकि अगर कोई संकेत मिले तो हम अलग-अलग तरीके अपना सकें, जैसे प्लान ए, प्लान बी, प्लान सी वगैरह।’
शाह ने कहा कि एचडीबी फाइनैंशियल का 2.3 प्रतिशत ऋण लागत का आंकड़ा वित्त वर्ष 27 के लिए कोई औपचारिक दिशानिर्देश नहीं, बल्कि स्थिर स्थिति का अनुमान है। असल नतीजा आर्थिक हालात और मॉनसून मंई होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा। एनबीएफसी के लिए अगली दो तिमाहियों में मुख्य सवाल यह होगा कि क्या बारिश की कमी से ग्रामीण आय कम होगी और ऋण चूक के मामलों में वृद्धि होगी। हालांकि प्रबंधन अभी संपत्ति गुणवत्ता में बड़े पैमाने पर गिरावट का अनुमान नहीं लगा रहा है लेकिन वे अलग-अलग नतीजों के हिसाब से अपने पोर्टफोलियो को तैयार कर रहे हैं।