इस साल भारत में जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ सबसे बड़ा निर्गम होने की उम्मीद है। कंपनी का अनुमानित मूल्यांकन लगभग 9.5 लाख करोड़ रुपये है, जिससे मेटा और गूगल जैसी बड़ी टेक कंपनियों को दूरसंचार क्षेत्र की इस दिग्गज कंपनी में किए गए अपने निवेश से बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। उन्होंने यह निवेश वर्ष 2020 में किया था।
जियो का आईपीओ पूरी तरह से ‘फ्रेश इश्यू’ होगा यानी इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से शेयरों की बिक्री पेशकश (ओएफएस) नहीं होगी। जादू होल्डिंग्स, एलएलसी (जो मेटा प्लेटफॉर्म्स की एक सहयोगी कंपनी है) के पास इस फर्म में 9.98 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि गूगल इंटरनैशनल एलएलसी के पास 7.73 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
जियो प्लेटफॉर्म्स ने 2020 में 13 निवेशकों से 1.5 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे। इन निवेशकों में जादू होल्डिंग्स, गूगल, इंटरस्टेलर प्लेटफॉर्म्स, पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड, जनरल अटलांटिक सिंगापुर जेपी और अन्य शामिल थे। जादू होल्डिंग्स और गूगल इंटरनैशनल को बोर्ड में नियुक्ति के लिए एक-एक निदेशक रखने का अधिकार है। हालांकि, अभी दोनों का कोई भी निदेशक कंपनी में नहीं है।
हाल के समय में आईपीओ बाजार के लिए यह सप्ताह सबसे व्यस्त सप्ताहों में से एक होने वाला है। इस सप्ताह चार कंपनियां – टर्टलमिंट फिनटेक सॉल्युशंस, वॉटरवेज लेजर टूरिज्म, अद्वित ज्वेल्स और सीएसएम टेक्नॉलजीज बाजार में आ रही हैं। ये सभी आईपीओ कुल 1,779 करोड़ रुपये जुटाने वाले हैं। जहां अद्वित ज्वेल्स का ग्रे मार्केट प्रीमियम 44 प्रतिशत है, वहीं बाकी कंपनियों का प्रीमियम 2 से 4 प्रतिशत के बीच है।
बैंकरों का कहना है कि आईपीओ बाजार की असली परीक्षा जुलाई में होगी, जब एसबीआई म्युचुअल फंड और मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज के निर्गम बाजार में आएंगे। साल 2026 के शुरुआती पांच महीनों में 20 आईपीओ के जरिये 19,854 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं।
एनएसई के सामने कानूनी मुश्किलों की लंबी लिस्ट में से एक मामला पिछले सप्ताह सुलझ गया। प्रतिभूति अपील पंचाट (सैट) ने एनएसई के को-लोकेशन मामले में चेन्नई फाइनैंशियल मार्केट्स ऐंड अकाउंटेबिलिटी की अपील को खारिज कर दिया। पंचाट ने कहा कि अपील करने वाले के पास इस मामले में अपील का अधिकार नहीं था।
पंचाट ने माना कि वह इकाई सेबी अधिनियम की धारा 15टी के तहत ‘पीड़ित व्यक्ति’ नहीं थी, क्योंकि उसे कोई सीधा कानूनी नुकसान नहीं हुआ था। अपील में एनएसई अधिकारियों और ओपीजी सिक्योरिटीज के बीच कथित मिलीभगत पर फिर से विचार करने की मांग की गई थी।
सैट ने गौर किया कि सेबी पहले ही मामले को वापस भेजे जाने के बाद इसकी जांच कर चुका था। यह निष्कर्ष निकालते हुए कि अपील जनहित याचिका जैसी थी, पंचाट ने फैसला सुनाया कि यह स्वीकार करने योग्य नहीं है और उसने इसे खारिज कर दिया।