संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में देश की आर्थिक स्थिति, महंगाई और टैक्स सुधारों को लेकर कई अहम जानकारी सामने आई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक लिखित सवाल के जवाब में बताया कि सरकार ने करेंसी नोटों की उम्र बढ़ाने और उनकी क्वालिटी बेहतर करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने को मंजूरी दी है। इसके साथ ही उन्होंने देश में महंगाई की मौजूदा स्थिति और आम लोगों को दी जा रही टैक्स राहत की भी पूरी जानकारी दी।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सेंट्रल बोर्ड की सिफारिश के बाद सरकार ने 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलीमर बैंक नोटों का फील्ड ट्रायल करने की मंजूरी दे दी है। इसके तहत 10 रुपये और 20 रुपये के 1-1 अरब पॉलीमर नोट बाजार में उतारे जाएंगे।
यह प्रस्ताव रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 के सेक्शन 25 के तहत तैयार किया गया था। अगर ये फील्ड ट्रायल सफल रहते हैं, तो पॉलीमर नोटों को नियमित रूप से जारी किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने साफ किया कि ये पॉलीमर नोट पूरी तरह नए नोटों की जगह नहीं लेंगे। ये बाजार में पहले से चल रहे कागज के नोटों के साथ ही सर्कुलेशन में रहेंगे। फिलहाल इन नोटों की खरीद की प्रक्रिया शुरुआती चरण में है। इसलिए अभी इस प्रोजेक्ट पर कुल कितना खर्च आएगा या इसे पूरी तरह कब लॉन्च किया जाएगा, इसकी कोई तय समय-सीमा नहीं बताई जा सकती।
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रिटेल महंगाई के मोर्चे पर सरकार ने आंकड़ों के जरिए राहत की तस्वीर पेश की है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर औसत रिटेल महंगाई दर पिछले तीन सालों में लगातार कम हुई है।
हालांकि, 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) में रिटेल महंगाई थोड़ी बढ़कर 3.9 प्रतिशत हो गई। इसके पीछे पश्चिम एशिया संकट के कारण कमोडिटी और ऊर्जा की वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी, सब्जियों के मौसमी दाम और एल नीनो का असर बताया गया है। हालांकि, वित्त मंत्री ने साफ किया कि महंगाई में यह बढ़ोतरी भी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 4 प्रतिशत के तय लक्ष्य के दायरे में है।
महंगाई को काबू में रखने के लिए सरकार ने प्रशासनिक और राजकोषीय स्तर पर कई कदम उठाए हैं। कच्चे पाम तेल, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सनफ्लावर ऑयल पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (BCD) कम की गई है। इसके अलावा मसूर दाल पर एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस भी घटाया गया है। वहीं, मार्च 2026 में पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी) में भी 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी।
GST काउंसिल की 56वीं बैठक में टैक्स सिस्टम को आसान बनाने के लिए टू-रेट फ्रेमवर्क लागू किया गया है। इसके तहत अब मुख्य तौर पर दो टैक्स रेट होंगे:
इस फैसले के बाद कई चीजों पर टैक्स की दरें कम हुई हैं। कुछ सामानों पर टैक्स 28 फीसदी से घटकर 18 फीसदी, 18 फीसदी से घटकर 12 या 5 फीसदी और 12 फीसदी से घटकर 5 फीसदी या पूरी तरह जीरो हो गया है। इसके अलावा, बजट 2026-27 में 2 फरवरी 2026 से कई तरह के सामानों पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी भी कम की गई है। इसका मकसद देश में लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और कंपनियों की इनपुट कॉस्ट कम करना है।
आम लोगों और खासकर मिडिल क्लास की जेब में ज्यादा पैसा बचाने के लिए इनकम टैक्स में भी बड़ी राहत दी गई है। अब 12 लाख रुपये तक की सालाना व्यक्तिगत आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा। वहीं, नौकरीपेशा लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन जोड़ने के बाद टैक्स फ्री आय की सीमा 12.75 लाख रुपये हो जाती है।
इन सभी राहतों का असर घरेलू खपत पर भी दिख रहा है। कुल GDP में प्राइवेट फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PFCE) की हिस्सेदारी 56.5 से 56.7 फीसदी के स्तर पर बनी हुई है। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन के आंकड़ों के मुताबिक, प्रति व्यक्ति PFCE की ग्रोथ रेट 2023-24 में 4.8 प्रतिशत थी, जो बढ़कर 2025-26 में 6.8 प्रतिशत हो गई।
सरकार का कहना है कि आम लोगों, खासकर कम और मध्यम आय वाले परिवारों की क्रय शक्ति (परचेजिंग पावर) को बनाए रखने के लिए बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
(PTI के इनपुट के साथ)