भारतीय प्राथमिक बाजार में जल्द ही दो बड़े इश्यू आने वाले हैं। पिछले सप्ताह बाजार के दो अग्रणी समूहों ने अपने-अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (वे कानूनी दस्तावेज जो कंपनियां आईपीओ लाने के पहले बाजार नियामक को सौंपती हैं) दाखिल किए। जियो प्लेटफॉर्म्स लगभग 37,700 करोड़ रुपये जुटा सकती है जबकि नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) लगभग 30,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है। इस प्रकार ये अब तक की सबसे बड़ी पेशकश बन जाएंगी। साल 2024 में ह्युंडै मोटर इंडिया ने 27,870 करोड़ रुपये जुटाए थे।
यद्यपि इनके ऑफर बैंड अभी तक ज्ञात नहीं हैं लेकिन दोनों इश्यू में निवेशकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है। आकार के अलावा दोनों इश्यू में बहुत कम समानता है। वास्तव में इनके मूल व्यवसाय पूरी तरह अलग हैं। निवेशक दोनों व्यवसायों के भविष्य का आकलन करते समय पूरी तरह अलग मूल्यांकन मानदंड अपनाएंगे।
एनएसई भारत का प्रमुख एक्सचेंज है जो मूल्य के हिसाब से 90 फीसदी से अधिक नकद इक्विटी कारोबार और अधिकांश डेरिवेटिव वॉल्यूम उत्पन्न करता है। भारत अनुबंध वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव बाजार है और दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजारों में से एक है। भारतीय परिवारों की शेयर बाजार में भागीदारी अभी भी काफी कम है जो पैठ बढ़ने के साथ विकास के अवसर प्रदान करेगी।
एनएसई के पास पर्याप्त नकदी है और उसका टर्नओवर लगातार 18 फीसदी से अधिक की दर से बढ़ रहा है। इसकी बैलेंस शीट बिना ऋण वाली है जिसमें 17,000 करोड़ रुपये से अधिक नकद भंडार है। वर्ष 2025-26 में इसने 10,300 करोड़ रुपये से अधिक का कर पश्चात लाभ (पीएटी) दर्ज किया। इसने 63 फीसदी का शुद्ध मार्जिन हासिल किया और 8,660 करोड़ रुपये की राशि लाभांश के रूप में वितरित की।
उच्च भुगतान का कारण वे विनियम हैं जो एक्सचेंजों को जोखिमपूर्ण परिसंपत्तियों में निवेश करने से रोकते हैं। निवेशक समान लाभांश भुगतान की उम्मीद कर सकते हैं जब तक कि विनियमों में ढील देकर एनएसई को व्यापक परिसंपत्तियों में निवेश की अनुमति न दी जाए। इसके प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) पूरी तरह से बिक्री पेशकश हैं जिसमें कई संस्थान अपनी हिस्सेदारी का छोटा हिस्सा बेच रहे हैं।
एनएसई कई वर्षों से सूचीबद्ध होने की कोशिश कर रही थी लेकिन कानूनी और नियामक चिंताओं ने इसे रोके रखा। यह आईपीओ इसके वाजिब मूल्य को सामने लाएगा। छोटा एक्सचेंज बीएसई (जो तेजी से बढ़ रहा है) 67 के मूल्य आय अनुपात (पीई रेश्यो) पर कारोबार कर रहा है। एनएसई का मूल्यांकन भी इसके तुलनीय गुणकों पर किया जा सकता है।
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में 27 करोड़ नए शेयर (इश्यू के बाद की शेयर पूंजी का 2.9 फीसदी) होंगे। आईपीओ से प्राप्त लगभग 27,500 करोड़ रुपये का उपयोग उधारों के अग्रिम भुगतान या चुकाने के लिए किया जाएगा। जियो राजस्व बाजार हिस्सेदारी के मामले में दूरसंचार सेवाओं के खंड में अग्रणी है।
जियो प्रबंधन का लक्ष्य 2030 तक सभी ग्राहकों को 5जी में स्थानांतरित करना है, साथ ही भारत के 6जी में नेतृत्वकारी स्थिति को आगे बढ़ाना है। इसका उद्देश्य जियो एयरफाइबर के माध्यम से पूरे भारत में फाइबर बिछाना जारी रखते हुए उच्च गति वाला होम ब्रॉडबैंड (एचबीबी) प्रदान करना भी है। इससे भारतीय उद्यमों और छोटे व्यवसायों को बड़े पैमाने पर डिजिटल करने और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस यानी एआई को सभी के लिए सुलभ बनाने में मदद मिलेगी।
जियो सैटेलाइट ब्रॉडबैंड बाजार में भी प्रवेश कर सकता है और भारत की डीप टेक क्षमताओं को वैश्विक बनाने के लिए बड़े पैमाने पर एआई डेटा सेंटर क्षमता स्थापित कर रहा है। आईपीओ के बाद रिलायंस, जियो में लगभग 66 फीसदी हिस्सेदारी बनाए रखेगी। हालिया अनुमान अगले पांच वर्षों में परिचालन लाभ को दोगुना करने का लक्ष्य दर्शाता है।
यहां स्पष्ट रूप से विकास की एक कहानी नजर आती है और इश्यू से प्राप्त राशि न केवल ऋण बोझ को कम करेगी बल्कि विकास की गति बनाए रखने के लिए आवश्यक बड़े निवेशों को भी आर्थिक मदद देगी। सूचीबद्ध होना वाजिब मूल्य को सामने लाएगा क्योंकि यह निवेशकों को तेजी से बढ़ती उच्च-तकनीकी डिजिटल अर्थव्यवस्था में निवेश करने की अनुमति देता है, वह भी बिना पेट्रोकेमिकल्स और ऊर्जा समूह में भी निवेश करने की बाध्यता के।
पिछले 18 महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारत में अपनी हिस्सेदारी लगातार घटाई है। यह देखना है कि निवेशक इन बड़ी सूचीबद्धताओं पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं और ये इश्यू वास्तव में कब बाजार में आते हैं। ये आईपीओ भारतीय शेयरों में दिलचस्पी फिर से बढ़ा सकते हैं।