कई कर्मचारियों को लगता है कि नौकरी छोड़ते ही उनके EPF खाते पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है। लेकिन हर मामले में ऐसा नहीं होता। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों के अनुसार, EPF खाते पर ब्याज कब तक मिलेगा, यह कर्मचारी की उम्र और रिटायरमेंट के समय पर निर्भर करता है।
अगर कोई कर्मचारी सामान्य रिटायरमेंट की उम्र से पहले नौकरी छोड़ता या रिटायर होता है, तो उसके EPF खाते में जमा रकम पर तुरंत ब्याज मिलना बंद नहीं होता। वहीं, 55 साल या उससे ज्यादा उम्र में रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए ब्याज मिलने की अवधि अलग होती है। EPFO की हालिया जानकारी और FAQ में इस नियम को स्पष्ट किया गया है।
अगर कोई कर्मचारी 55 साल की उम्र से पहले रिटायर होता है, तो उसके EPF खाते पर ब्याज तुरंत बंद नहीं होता। ऐसे मामले में सिर्फ रिटायरमेंट की तारीख से तीन साल पूरे होने पर खाते को निष्क्रिय मानकर ब्याज रोकने का नियम लागू नहीं होता।
उदाहरण के लिए, अगर कोई कर्मचारी 52 साल की उम्र में स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेता है, तो उसके खाते में एम्प्लॉयर की तरफ से नई EPF राशि जमा नहीं होगी। हालांकि, खाते में पहले से जमा रकम पर ब्याज जारी रह सकता है। EPFO के मौजूदा नियमों के मुताबिक, ऐसे कर्मचारी को 58 साल की उम्र तक EPF पर ब्याज मिल सकता है।
EPFO के FAQ में यह भी बताया गया है कि अगर कोई कर्मचारी 50 साल की उम्र में स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेता है, तो उसके EPF खाते पर 58 साल की उम्र तक ब्याज जारी रह सकता है।
इसलिए नौकरी छोड़ने या समय से पहले रिटायर होने की तारीख के आधार पर ही यह तय नहीं किया जा सकता कि EPF पर ब्याज कब बंद होगा। इसमें कर्मचारी की उम्र भी अहम होती है।
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अगर कर्मचारी 55 साल या उससे ज्यादा उम्र में रिटायर होता है, तो उसके EPF खाते पर ब्याज से जुड़े नियम अलग होते हैं। EPFO के मुताबिक, ऐसे मामलों में रिटायरमेंट के 36 महीने यानी तीन साल बाद EPF खाता निष्क्रिय हो जाता है। इसके बाद खाते पर ब्याज नहीं मिलता।
उदाहरण के तौर पर, अगर कोई कर्मचारी 58 साल की उम्र में रिटायर होता है, तो उसके EPF खाते पर अगले तीन साल तक ब्याज मिल सकता है। यानी 61 साल की उम्र में खाता निष्क्रिय हो जाएगा। इसी तरह, 60 साल की उम्र में रिटायर होने वाले कर्मचारी के खाते पर 63 साल की उम्र तक ब्याज जारी रह सकता है।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि खाते के निष्क्रिय होने का मतलब यह नहीं है कि उसमें जमा पैसा खत्म हो जाता है या कर्मचारी का उस रकम पर अधिकार नहीं रहता। वैध दावा करने पर EPFO के नियमों के तहत खाते में जमा रकम का भुगतान किया जा सकता है।
अगर कोई कर्मचारी रिटायर होने के बजाय दूसरी नौकरी ज्वाइन करता है और नई कंपनी भी EPF के दायरे में आती है, तो पुराने EPF खाते को ऐसे ही छोड़ना सही तरीका नहीं है। EPFO ऐसे कर्मचारियों को पुराने खाते की रकम नए EPF खाते में ट्रांसफर करने की सलाह देता है।
वहीं, रिटायर हो चुके कर्मचारी लागू नियमों के मुताबिक अपने EPF खाते की रकम निकाल सकते हैं। नौकरी बदलने या रिटायरमेंट के बाद UAN और EPF से जुड़े रिकॉर्ड को अपडेट रखना भी जरूरी है।
इसलिए EPF खाते को लंबे समय तक बिना जानकारी के छोड़ने से पहले कर्मचारियों को यह समझ लेना चाहिए कि उनकी उम्र और रिटायरमेंट की स्थिति के हिसाब से खाता कब बंद होगा और उस पर ब्याज कब तक मिलेगा।