प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
मानसून की भारी बारिश जहां एक तरफ गर्मी से राहत दिलाती है, वहीं दूसरी तरफ जलभराव, बाढ़ और पहाड़ों पर जमीन खिसकने (भूस्खलन) से लोगों के घरों को भारी नुकसान पहुंचता है। कई बार तो पानी भरने से घर का कीमती सामान खराब हो जाता है, तो कभी दीवारें और छत कमजोर हो जाती हैं। ऐसे मुश्किल वक्त में होम इंश्योरेंस आपके पैसों को डूबने से बचा सकता है। लेकिन ज्यादातर लोगों को यह सही-सही पता ही नहीं होता कि इंश्योरेंस में क्या-क्या कवर होता है और क्लेम कैसे लिया जाता है। आइए एक्सपर्ट के माध्यम से होम इंश्योरेंस की जरूरत और नियम, क्लेम लेने के तरीके और ध्यान रखने वाली बातों को आसान भाषा में समझने की कोशिश करते हैं।
इफ्को टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट मोहिंद्र एस. इंडोलिया बताते हैं कि भारत में मिलने वाली ज्यादातर होम इंश्योरेंस पॉलिसियों में बाढ़, जलभराव, तूफान और भूस्खलन से होने वाले नुकसान को कवर किया जाता है। हालांकि, वे यह भी कहते हैं कि हर किसी को आंख बंद करके यह नहीं मान लेना चाहिए कि उनकी पॉलिसी में यह सब शामिल ही होगा। इंश्योरेंस लेते वक्त यह साफ-साफ जांच लेना चाहिए कि इंश्योरेंस सिर्फ घर के ढांचे (दीवार/छत) का है, घर के अंदर रखे सामान का है, या दोनों का।
वहीं जे.बी. बोडा ग्रुप के ग्रुप वाइस चेयरमैन गौतम बोडा का कहना है कि होम इंश्योरेंस पॉलिसियां आमतौर पर घर को प्राकृतिक हादसों से बचाने के लिए ही बनाई जाती हैं। लेकिन अलग-अलग कंपनियां अलग-अलग तरह के प्लान देती हैं। कुछ कंपनियों की पॉलिसी में बाढ़ या भूस्खलन का कवर अलग से (Add-on के रूप में) लेना पड़ता है। इसलिए पॉलिसी लेने से पहले उसके कागजात ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है।
Also Read: बदलती जरूरतों के हिसाब से बदलते रहेंगे पेंशन के नियम, सरकार ने कहा: समय-समय पर होगी समीक्षा
अगर आपकी पॉलिसी में बाढ़ और भूस्खलन कवर है, तो नुकसान होने पर आपको कितना पैसा मिलेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कितने रुपये का इंश्योरेंस कराया है। गौतम बोडा के मुताबिक, अगर आपने घर की बिल्डिंग का इंश्योरेंस कराया है, तो बाढ़ या भूस्खलन से दीवारों, छत और ढांचे को हुए नुकसान का पैसा मिलेगा। अगर आपने सामान का इंश्योरेंस भी कराया है, तो घर के अंदर रखा फर्नीचर, टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और दूसरा सामान भी इसमें कवर होता है।
वहीं मोहिंद्र एस. इंडोलिया बताते हैं कि अगर भूस्खलन से घर की बिल्डिंग को नुकसान पहुंचे या घर रहने लायक न बचे, तो कंपनी का सर्वेयर आकर नुकसान का जायजा लेता है। हालांकि, वे यह भी साफ करते हैं कि घर के सिर्फ ‘रहने लायक न बचने’ से ही पूरा इंश्योरेंस कवर नहीं मिल जाता। क्लेम का पैसा इस बात पर तय होता है कि वास्तव में कितना नुकसान हुआ है और सामान कितना पुराना था।
दोनों एक्सपर्ट की सलाह है कि अगर बाढ़ या भूस्खलन से घर या सामान को नुकसान पहुंचता है, तो घबराने की जगह तुरंत ये कदम उठाएं:
अक्सर लोग अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे उनका क्लेम अटक जाता है या रिजेक्ट हो जाता है। मोहिंद्र एस. इंडोलिया और गौतम बोडा ने ऐसी ही आम गलतियों से बचने की सलाह दी है: