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बिना कमाई वाले छात्रों को भी मिलेगा ₹25 लाख का लाइफ कवर, स्टूडेंट्स के लिए लॉन्च हुआ खास टर्म प्लान

छात्रों के लिए नया 'स्टूडेंट टर्म प्लान' लॉन्च हुआ है। यह एजुकेशन लोन और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच युवाओं को कम प्रीमियम पर लाइफ कवर देता है

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अमित कुमार   
Last Updated- August 22, 2026 | 2:33 PM IST

टर्म इंश्योरेंस को आमतौर पर नौकरीपेशा लोगों और परिवार की जिम्मेदारी संभालने वालों से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन अब छात्रों के लिए भी टर्म प्लान पेश किया गया है। इसका मकसद 18 से 25 साल की उम्र वाले उन युवाओं को लाइफ कवर देना है, जो अभी पढ़ाई कर रहे हैं या उन्होंने कमाई शुरू नहीं की है।

19 अगस्त को पॉलिसीबाजार ने इंश्योरेंस कंपनियों के साथ मिलकर ‘स्टूडेंट टर्म प्लान’ लॉन्च किया। कंपनी के मुताबिक, इस प्लान में 25 लाख रुपये से शुरू होने वाला लाइफ कवर मिलता है और पॉलिसी की अवधि 30 से 40 साल तक हो सकती है। 18 साल की उम्र में 30 साल की पॉलिसी के लिए 50 लाख रुपये का कवर लेने पर प्रीमियम 388 रुपये महीने से शुरू हो सकता है। यह प्रीमियम ऐसे आवेदक के लिए बताया गया है, जो स्मोकिंग नहीं करता और जिसे पहले से कोई बीमारी नहीं है।

छात्रों के लिए टर्म प्लान की जरूरत क्यों पड़ी?

छात्रों के लिए टर्म इंश्योरेंस की जरूरत का एक बड़ा कारण एजुकेशन लोन है। खासकर प्रोफेशनल कोर्स या विदेश में पढ़ाई के लिए परिवारों को बड़ी रकम का कर्ज लेना पड़ सकता है। कई मामलों में छात्र खुद लोन ले सकता है या सह-उधारकर्ता हो सकता है।

अगर लोन चुकाने से पहले छात्र की मौत हो जाती है, तो परिवार पर बकाया लोन चुकाने की जिम्मेदारी बनी रह सकती है। ऐसे में टर्म इंश्योरेंस परिवार को इस तरह के आर्थिक बोझ से बचाने में मदद कर सकता है।

पॉलिसीबाजार के मुख्य बिजनेस अधिकारी विवेक जैन ने कहा कि छात्र भारतीय इंश्योरेंस मार्केट का सबसे कम कवर वाला वर्ग हैं। उन्होंने एजुकेशन लोन और पारिवारिक जिम्मेदारियों को उन वजहों में बताया, जिनके चलते कम उम्र में भी लाइफ कवर की जरूरत हो सकती है।

छात्रों के सामने एक और समस्या यह होती है कि उनके पास अपनी कमाई नहीं होती। ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के मुताबिक, पात्र आवेदकों के लिए आर्थिक क्षमता साबित करने के लिए माता-पिता की आय को भी आधार बनाया जा सकता है।

कम उम्र में पॉलिसी लेने का क्या फायदा?

टर्म इंश्योरेंस में उम्र और स्वास्थ्य के आधार पर प्रीमियम तय होता है। आमतौर पर कम उम्र और अच्छे स्वास्थ्य वाले व्यक्ति को उसी कवर के लिए बाद में पॉलिसी लेने वाले व्यक्ति की तुलना में कम प्रीमियम मिल सकता है।

पॉलिसीबाजार के मुताबिक, कम उम्र में टर्म इंश्योरेंस लेने का एक फायदा यह है कि पॉलिसी शुरू होने के बाद तय प्रीमियम पूरी पॉलिसी अवधि में एक जैसा रहता है।

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यानी जो छात्र आगे नौकरी शुरू करने के बाद बड़ी आर्थिक जिम्मेदारियां उठाने वाला है, वह कम उम्र में ही अपना लाइफ कवर तय कर सकता है। हालांकि, सिर्फ कम प्रीमियम देखकर टर्म इंश्योरेंस लेना जरूरी नहीं है।

क्या हर छात्र को टर्म इंश्योरेंस चाहिए?

ऐसा जरूरी नहीं है। लाइफ इंश्योरेंस का मुख्य मकसद उन लोगों को आर्थिक सुरक्षा देना है, जो किसी व्यक्ति की कमाई पर निर्भर हैं। अगर किसी छात्र पर बड़ा कर्ज नहीं है, परिवार उसके पैसों पर निर्भर नहीं है और उस पर कोई बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी भी नहीं है, तो उसे बड़े लाइफ कवर की जरूरत सीमित हो सकती है। ऐसे छात्र के लिए इमरजेंसी फंड बनाना और पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस लेना ज्यादा जरूरी हो सकता है।

वहीं, अगर छात्र पर बड़ा एजुकेशन लोन है, वह किसी लोन में सह-उधारकर्ता है, परिवार की आर्थिक मदद करता है या उसकी मौत के बाद परिवार पर बड़ी देनदारी आ सकती है, तो टर्म इंश्योरेंस की जरूरत बढ़ सकती है।

ऐसे मामले में भी कवर की रकम सिर्फ ज्यादा से ज्यादा इंश्योरेंस लेने के आधार पर तय नहीं करनी चाहिए। कवर कितना होना चाहिए, यह बकाया कर्ज और परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर तय करना बेहतर है।

पॉलिसी लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

छात्रों को टर्म प्लान लेने से पहले अपने एजुकेशन लोन की रकम और उसकी अवधि जरूर देखनी चाहिए। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि उनके लिए कितना लाइफ कवर जरूरी है।

पॉलिसी की अवधि भी ध्यान देने वाली बात है। 30 या 40 साल का टर्म छात्र की आगे की नौकरी और कमाई के शुरुआती दौर तक चल सकता है। इसलिए पॉलिसी की अवधि भविष्य की जिम्मेदारियों को ध्यान में रखकर चुननी चाहिए।

इसके अलावा यह भी देखना जरूरी है कि प्रीमियम लंबे समय तक आसानी से चुकाया जा सकेगा या नहीं। अभी छात्र कम प्रीमियम दे सकता है, लेकिन नौकरी शुरू होने के बाद उसके खर्च और जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं।

इस प्लान में क्रिटिकल इलनेस और एक्सीडेंटल डेथ राइडर जैसे विकल्प भी मिलते हैं। ये अतिरिक्त सुरक्षा देते हैं, लेकिन इनके लिए अलग से प्रीमियम देना होता है। इसलिए इन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से समझकर ही चुनना चाहिए।

साथ ही पॉलिसी लेने से पहले उसके नियम, मेडिकल जांच की जरूरत, कवर से जुड़ी शर्तें, एक्सक्लूजन और क्लेम के नियम भी ध्यान से पढ़ लेना चाहिए।

First Published : August 22, 2026 | 2:33 PM IST