facebookmetapixel
Advertisement
भारत-अमेरिका को मतभेद दूर कर भरोसेमंद कर व्यवस्था बनाने पर काम करना चाहिए: सर्जियो गोरभारतीय चुनाव व्यवस्था की तारीफ कर बोले ट्रंप, कांग्रेस ने कहा- ईवीएम भी अमेरिका भेज देंगेब्रिक्स देशों ने पर्यावरण संरक्षण पर चार ज्ञान संकलन जारी किए, टिकाऊ विकास पर जोरदुबई का कमर्शियल रियल एस्टेट बाजार मजबूत, पहली छमाही में लेनदेन 8.5% बढ़ाबाल यौन शोषण सामग्री पर सरकार सख्त, सोशल मीडिया के ‘सेफ हार्बर’ प्रावधान पर साफ संदेश17 सितंबर से सेमीकॉन इंडिया 2026, वैश्विक सीईओ और 500 से ज्यादा प्रदर्शक करेंगे ​शिरकत 13-17 साल के किशोरों के लिए नया चैटजीपीटी, मजबूत सुरक्षा और पैरेंटल कंट्रोल की सुविधालाठीचार्ज और पुलिस हिंसा की जांच करेगी 3 सदस्यीय समिति, सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देशपायलटों की आकस्मिक ड्रग जांच 25% करने की मांग, डीजीसीए से एफआईपी की अपीलभारत के समुद्री व्यापार का नया गेटवे बना विझिंजम, 57 लाख टीईयू क्षमता की ओर बढ़ा बंदरगाह

Editorial: भारत को कम-कौशल प्रवासन से कुशल वैश्विक श्रमबल की ओर बढ़ना होगा

Advertisement

भारत दुनिया की सबसे बड़ी प्रवासी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और यहां के करीब 1.85 करोड़ लोग विदेश में रहते हैं

Last Updated- August 18, 2026 | 10:24 PM IST
Indian migrant workers
प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत दुनिया की सबसे बड़ी प्रवासी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और यहां के करीब 1.85 करोड़ लोग विदेश में रहते हैं। इतना ही नहीं भारत विदेश से वापस धनप्रेषण यानी रेमिटेंस हासिल करने वाला सबसे बड़ा देश भी है। यह इस आवश्यकता को रेखांकित करता है कि वैश्विक श्रम की मांग को पूरा करने के लिए कौशल विकास और संस्थागत तंत्र को मजबूत किया जाए। वर्तमान पाइपलाइन मुख्यतः कम कौशल वाले कार्यों पर केंद्रित है जहां केवल निर्माण क्षेत्र ही राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) द्वारा सुगम की गई विदेशी नियुक्तियों का 71.3 फीसदी हिस्सा रखता है।

इस रुझान में विविधता लाने का बहुत बड़ा अवसर है। विकसित देशों में बढ़ती उम्र की आबादी और श्रम योग्य आयु वाले लोगों की बढ़ती संख्या के कारण श्रम बाजारों में हालात तंग हो रहे हैं। इसके साथ ही ढांचागत कौशल की विसंगति और शिक्षा तथा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का कमजोर संयोजन भी कुशल श्रमिकों की कमी की वजह बन रहा है। मांग अब बुनियादी ढांचे और निर्माण, लॉजिस्टिक्स और परिवहन, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवाओं, हरित परिवर्तन उद्योग, आतिथ्य, स्वास्थ्य सेवा तथा व्यक्तिगत और सामाजिक सेवाओं में विस्तारित हो रही है। भारत की चुनौती यह है कि वह अपने श्रमबल को इन कमी या जरूरत वाले क्षेत्रों से जोड़े बजाय इसके कि वह पारंपरिक, कम वेतन वाले प्रवासन चैनलों पर मुख्य रूप से निर्भर रहे।

खराब तरीके से संगठित प्रवासन भारत की आर्थिक उपलब्धियों को भी कमजोर कर सकता है। नैशनल ब्यूरो ऑफ इकनॉमिक रिसर्च द्वारा 2023 में प्रकाशित एक अध्ययन में भारतीय श्रमिकों के यूएई प्रवासन का विश्लेषण किया गया और पाया गया कि प्रवासन ने पारिश्रमिक को दोगुना कर दिया लेकिन बिचौलियों की फीस ने वास्तविक आय को लगभग 10 फीसदी तक घटा दिया। प्रवासियों ने अपनी निजी खुशहाली और संतुष्टि में भी काफी गिरावट महसूस की। इस तरह के खर्च, अधूरी जानकारी और सुरक्षा के कमजोर इंतजामों से पैदा होने वाले जोखिमों को उजागर करते हैं।

नीति का उद्देश्य केवल अधिक कामगारों को भेजना नहीं होना चाहिए बल्कि अनौपचारिक कम-वेतन वाले प्रवासन से हटकर मांग-आधारित कौशलयुक्त गतिशीलता की ओर बढ़ना चाहिए। इसके लिए माइग्रेशन डैशबोर्ड, विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाणन और नियोक्ता साझेदारियों की जरूरत है। बड़ी संख्या में राज्यों को मोबिलिटी रिसोर्स सेंटर्स स्थापित करने पर विचार करना चाहिए जो गतिशीलता सेवाओं की अंतिम डिलीवरी के लिए संस्थागत इंटरफेस के तौर पर काम करें। 

ये केंद्र परामर्श, करियर मार्गदर्शन, गंतव्य देश की जरूरतों की जानकारी, दस्तावेजीकरण और प्रस्थान पूर्व सहयोग प्रदान कर सकते हैं जिससे कामगार अधिक जानकारीपरक निर्णय ले सकें और अनौपचारिक बिचौलियों पर उनकी निर्भरता कम हो। इसके अलावा प्रवासी समुदाय का समर्पित प्रतिनिधित्व भी महत्त्वपूर्ण है ताकि कामगारों की चिंताओं को मेजबान देशों की सरकारों तक पहुंचाया जा सके, कानूनी सुरक्षा को मज़बूत किया जा सके और समय पर शिकायत निवारण सुनिश्चित किया जा सके।

राज्य को सर्कुलर माइग्रेशन (श्रमिकों की बार-बार आवाजाही) को भी बढ़ावा देना चाहिए। कौशल, बचत और अंतरराष्ट्रीय अनुभव के साथ लौटने वाले कामगारों को घरेलू बाजार में दोबारा प्रवेश करने, उद्यम शुरू करने या उत्पादक रोजगार पाने के लिए सहयोग मिलना चाहिए। इससे प्रवासन केवल श्रम का एकतरफा प्रवाह न रहकर ज्ञान और पूंजी हस्तांतरण का माध्यम बन जाएगा।

यद्यपि यह ध्यान रखना आवश्यक है कि विदेशी प्रवासन घरेलू रोजगार तैयार करने का विकल्प नहीं हो सकता। भारत को दोहरी रणनीति अपनानी होगी। एक ओर उसे ऐसा कार्यबल तैयार करना जो बेहतर वैश्विक अवसरों तक पहुंच सके और दूसरी ओर घरेलू स्तर पर उत्पादक रोजगार का विस्तार करना होगा। उद्देश्य यह होना चाहिए कि प्रवासन आवश्यकता नहीं बल्कि अवसर पर आधारित विकल्प बने और भारत केवल श्रम आपूर्ति करने वाला देश न रहकर वैश्विक स्तर पर कौशलयुक्त मानव पूंजी का स्रोत बने।

Advertisement
First Published - August 18, 2026 | 10:23 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement